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अहोई अष्टमी : तारों को अर्घ्य देकर की संतान की सुख-समृद्धि की कामना
Mon, 02 Nov 2026 12:30 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Mon, 02 Nov 2026 12:30 AM IST
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टूंडला में अहोई अष्टमी पर बच्चों को तिलक लगाकर दीर्घायु की कामना करते माताएंसंवाद
- फोटो : टूंडला में अहोई अष्टमी पर बच्चों को तिलक लगाकर दीर्घायु की कामना करते माताएं संवाद
फिरोजाबाद। संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर रविवार को जिलेभर में अहोई अष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। माताओं ने अपने पुत्रों की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखा। दिनभर उपवास करने के बाद शाम को अहोई माता की पूजा-अर्चना की और तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया। घरों में महिलाओं ने अहोई माता की प्रतिमा और चित्र के सामने दीप जलाकर विधि-विधान से पूजन किया।
सुबह स्नान-ध्यान के बाद महिलाओं ने व्रत का संकल्प लिया। दिनभर अन्न-जल ग्रहण किए बिना संतान की मंगलकामना की। शाम को पूजा की तैयारी करते हुए अहोई माता के चित्र के सामने पूजन सामग्री रखी गई। महिलाओं ने माता को रोली, चावल, फूल और मिठाई अर्पित की। कई स्थानों पर सिंघाड़े, मूली और गन्ने सहित अन्य मौसमी फल चढ़ाकर पूजा की गई। इसके बाद अहोई माता की कथा सुनी गई और परिवार की सुख-शांति की कामना की गई।
बिहारीजी मंदिर के महंत पंडित मुन्नालाल शास्त्री ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए रखा जाता है। परंपरागत रूप से यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को तारों के दर्शन करने के बाद अर्घ्य देती हैं। कुछ स्थानों पर चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा भी है। अहोई माता की पूजा में स्याहू और उसके बच्चों की कथा का विशेष महत्व है।
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सुबह स्नान-ध्यान के बाद महिलाओं ने व्रत का संकल्प लिया। दिनभर अन्न-जल ग्रहण किए बिना संतान की मंगलकामना की। शाम को पूजा की तैयारी करते हुए अहोई माता के चित्र के सामने पूजन सामग्री रखी गई। महिलाओं ने माता को रोली, चावल, फूल और मिठाई अर्पित की। कई स्थानों पर सिंघाड़े, मूली और गन्ने सहित अन्य मौसमी फल चढ़ाकर पूजा की गई। इसके बाद अहोई माता की कथा सुनी गई और परिवार की सुख-शांति की कामना की गई।
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बिहारीजी मंदिर के महंत पंडित मुन्नालाल शास्त्री ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए रखा जाता है। परंपरागत रूप से यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को तारों के दर्शन करने के बाद अर्घ्य देती हैं। कुछ स्थानों पर चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा भी है। अहोई माता की पूजा में स्याहू और उसके बच्चों की कथा का विशेष महत्व है।
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