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पुरुषों में कैंसर: चुपचाप बढ़ता है ये जानलेवा कैंसर, हर घंटे हो रही एक मौत; पूर्व पीएम ऋषि सुनक की बड़ी पहल

Sun, 13 Sep 2026 02:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 13 Sep 2026 02:44 PM IST
सार

ब्रिटेन में ऋषि सुनक समेत कई प्रमुख लोगों ने ज्यादा जोखिम वाले पुरुषों के लिए राष्ट्रीय प्रोस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम की मांग की है। ब्लैक पुरुषों और प्रोस्टेट कैंसर की हिस्ट्री वाले पुरुषों में खतरा अधिक हो सकता है। अभियानकर्ता शुरुआती पहचान पर जोर दे रहे हैं ताकि जल्दी से इसका पता किया जा सके।

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Rishi Sunak Backs Targeted Prostate Cancer Screening for High-Risk Men why it is important
प्रोस्टेट कैंसर की जल्दी स्क्रीनिंग की मांग - फोटो : Amarujala.com/AI

कैंसर दुनिया की सबसे घातक और गंभीर बीमारियों में से एक है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। पुरुषों में फेफड़े-पेट और मुंह के कैंसर के सबसे ज्यादा मामले रिपोर्ट किए जाते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग प्रोस्टेट कैंसर का भी शिकार हो रहे हैं।



प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक प्रमुख कैंसर है। यह प्रोस्टेट ग्रंथि में शुरू होता है, जो मूत्राशय के नीचे स्थित होता है और वीर्य के एक हिस्से को बनाने में मदद करता है। ज्यादातर प्रोस्टेट कैंसर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, लेकिन कुछ कैंसर तेजी से बढ़ने और शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने वाले हो सकते हैं। करीब 10 में से 6 प्रोस्टेट कैंसर के मामले 65 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में देखे जाते हैं।

जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये बीमारी रही है, उनमें खतरा अधिक हो सकता है। वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड के 2022 के ग्लोबल डेटा के अनुसार, इस कैंसर से हर साल लगभग 4 लाख लोगों की मौत होती है। इतना ही नहीं ये हर 45-50 मिनट में एक व्यक्ति की जान ले रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पुरुषों में शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। बीमारी शरीर में बढ़ती रहती है और कई बार तब पता चलता है जब ये आखिरी के स्टेज में पहुंच जाता है। इसी खतरे को कम करने के लिए ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समेत कई चर्चित हस्तियों ने कैंसर के जल्दी स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू करने की मांग की है। समय पर पहचान होने से रोग के बढ़ने का खतरा कम होता है और इलाज भी आसान हो जाता है।

Rishi Sunak Backs Targeted Prostate Cancer Screening for High-Risk Men why it is important
प्रोस्टेट कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe stock photos

ऋषि सुनक समेत कई हस्तियों ने सरकार को लिखा पत्र

अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रोस्टेट कैंसर की जानकारी दी थी। वे लंबे समय से इसका शिकार हैं। बाइडन के बेटे हंटर बाइडन ने एक हालिया इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता का कैंसर हड्डियों तक फैलने के बाद अब उससे भी आगे बढ़ गया है। बीमारी की वजह से बाइडन को काफी दर्द और शारीरिक कमजोरी का सामना करना पड़ रहा है। 

मेडिकल विशेषज्ञ कहते हैं, अगर समय रहते प्रोस्टेट कैंसर का पता चल जाए तो इससे हर साल लाखों मौतों को रोका जा सकता है। इसी को लेकर ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समेत कई चर्चित हस्तियों ने सरकार का ध्यान खींचा है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर ज्यादा जोखिम वाले पुरुषों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर टारगेटेड प्रोस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू करने की मांग की है।

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मसलन अगर किसी के पिता या भाई को पहले प्रोस्टेट कैंसर हो चुका है, तो परिवार के दूसरे पुरुष सदस्यों का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे जोखिम वालों की समय पर स्क्रीनिंग करने से बड़ी मदद मिल सकती है। इस मांग को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। 250 से ज्यादा सांसद इसके पक्ष में बताए जा रहे हैं और एक लाख से अधिक लोग याचिका पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।

Rishi Sunak Backs Targeted Prostate Cancer Screening for High-Risk Men why it is important
प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग समय पर जरूरी - फोटो : Amarujala.com/AI

किन पुरुषों के लिए समय पर स्क्रीनिंग बहुत जरूरी?

प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भारतीय पुरुषों में भी गंभीर रहा है, ऐसे में सवाल है कि किन लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हर पुरुष में प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा एक जैसा नहीं होता। जिनमें इस कैंसर की फैमिली हिस्ट्री रही है या फिर जिन्हें प्रोस्टेट की कोई अन्य दिक्कत हो उनके लिए स्क्रीनिंग बहुत जरूरी है।
 

  • मेडिकल रिपोर्ट्स में 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को अपने डॉक्टर की सलाह पर स्क्रीनिंग जरूर करा लेनी चाहिए।
  • जिन लोगों में पहले से BRCA1 या BRCA2 जैसा जेनेटिक म्यूटेशन है, उन्हें 40 से 45 साल की उम्र के बीच डॉक्टर से मिलकर जांच करानी चाहिए। 


प्रोस्टेट कैंसर शुरुआती चरण में कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी विकसित हो सकता है। यही वजह है कि कुछ पुरुषों में बीमारी का पता देर से चलता है। आमतौर पर इस कैंसर के कारण पेशाब करने में परेशानी, पेशाब की धार कमजोर होने, बार-बार पेशाब लगने, पेशाब या वीर्य में खून आने और पीठ या कमर के निचले हिस्से में  अक्सर दर्द की दिक्कत देखी जाती रही है।

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Rishi Sunak Backs Targeted Prostate Cancer Screening for High-Risk Men why it is important
प्रोस्टेट कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe stock

प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है गंभीर

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रोस्टेट कैंसर शरीर के आसपास के हिस्सों में भी फैल सकता है जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर के शरीर में फैलने पर हड्डियां जैसे रीढ़ की हड्डी और कूल्हे प्रभावित हो सकते हैं। हड्डियों में कैंसर फैलने से लगातार या तेज दर्द हो सकता है। इससे हड्डियां कमजोर होकर फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ा सकता है।

अगर कैंसर रीढ़ की हड्डी के आसपास फैलकर स्पाइनल कॉर्ड यानी रीढ़ की नसों के मुख्य हिस्से पर दबाव डालता है, तो पैरों में कमजोरी या सुन्नपन और पेशाब या मल पर नियंत्रण खोने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

क्या इससे बचाव किया जा सकता है?

अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि खान-पान की कुछ चीजों को अध्ययनों में प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने वाला पाया गया था। एपिडेमियोलॉजिकल और क्लिनिकल अध्ययनों से पता चलता है कि लाइकोपीन फ्री रेडिकल्स को बेअसर करने, डीएनए को होने वाले नुकसान को कम करने के साथ कैंसर सेल्स के फैलने की रफ्तार को धीमा करने में मदद करता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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