शरीर के स्वस्थ रहने के लिए पाचन का ठीक रहना सबसे जरूरी माना जाता है और पाचन ठीक से होता रहे इसके लिए आंतों में गुड बैक्टीरिया का संतुलन जरूरी है। हमारी आंतों में अरबों सूक्ष्मजीव और बैक्टीरिया होते हैं। ये पाचन, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और मेटाबॉलिज्म को ठीक रखने में सहायता करते हैं। हालांकि जब आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की संरचना और संतुलन बिगड़ जाता है, तो इसका असर केवल पाचन ही नहीं संपूर्ण स्वास्थ्य पर हो सकता है।
सेहत की बात: आंतों के गुड बैक्टीरिया कम हुए तो शरीर में दिखते हैं ये बदलाव, समय रहते दें ध्यान
आंतों में मौजूद बैक्टीरिया पाचन, प्रतिरक्षा और मेटाबॉलिज्म के लिए जरूरी होते हैं। इनके संतुलन में बदलाव को डिस्बायोसिस कहा जाता है जो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। हालांकि हर बार पेट की समस्या को बैक्टीरिया की कमी मानना सही नहीं है।
गुड बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने पर पाचन पर असर
आंतों के सूक्ष्मजीव पाचन तंत्र के लिए जरूरी होते हैं। इनके संतुलन में बदलाव के साथ कुछ लोगों में पेट फूलने, गैस, अनियमित मल त्याग या दूसरी पाचन संबंधी परेशानियां देखी जा सकती हैं।
- लेकिन इन लक्षणों का मतलब सीधे तौर पर यह नहीं है कि अच्छे बैक्टीरिया कम हो गए हैं।
- इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम और आंतों की दूसरी बीमारियों में भी ये दिक्कतें देखने को मिलती हैं। इसलिए लगातार पेट की परेशानी होने पर खुद से प्रोबायोटिक या कोई सप्लीमेंट शुरू करने के बजाय कारण की जांच जरूरी है।
इम्युनिटी पर भी पड़ता है असर
आंतों के बैक्टीरिया, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को ठीक रखने में भी मदद करते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि माइक्रोबायोम में बदलाव आंत की अंदरूनी सुरक्षा परत और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
- ऐसा नहीं है कि गुड बैक्टीरिया कम होते ही आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है बल्कि आंतों का माइक्रोबायोम शरीर की प्रतिरक्षा व्यवस्था का एक हिस्सा है।
- लंबे समय तक असंतुलित खान-पान, कुछ दवाएं और बीमारियां माइक्रोबायोम की संरचना को प्रभावित कर सकती हैं।
आंतों के बैक्टीरिया को बेहतर रखने के लिए क्या करें?
आंतों के माइक्रोबायोम को ठीक रखने के लिए डाइट और लाइफस्टाइल को ठीक रखना जरूरी है।
- भोजन में अलग-अलग तरह की सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज और फाइबर वाले खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदा दे सकता है।
- जरूरत के बिना एंटीबायोटिक न लें, ये दवाएं बैक्टीरिया को प्रभावित कर सकती हैं।
- लगातार पेट फूलने, दस्त-कब्ज, वजन कम होने या लंबे समय से पाचन संबंधी समस्या हो तो डॉक्टर से संपर्क करें और कारणों को पता लगाएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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