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Sirmour News: धान में घाटा<bha>;</bha> गन्ने में बढ़ी उम्मीद, 1.22 लाख क्विंटल उत्पादन का लक्ष्य
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-पांवटा के 300 किसानों ने उत्तराखंड की चीनी मिल को गन्ना देने के लिए कराया पंजीकरण, 282 हेक्टेयर में उत्पादन का अनुमान
-धान में लगातार रोग और बढ़ती लागत से परेशान किसानों ने बदली फसल, नए दर की घोषणा का भी इंतजार
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। धान की फसल में लगातार हो रहे नुकसान और बढ़ती लागत ने पांवटा विकास खंड के किसानों का रुझान गन्ने की ओर बढ़ा दिया है। इस सीजन क्षेत्र के करीब 300 किसानों ने उत्तराखंड की चीनी मिल को 1.22 लाख क्विंटल गन्ना देने के लिए स्थानीय सोसायटियों में पंजीकरण कराया है। इससे क्षेत्र में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ने के साथ किसानों को नकदी फसल से बेहतर आमदनी की उम्मीद जगी है।
पांवटा गन्ना खरीद सोसायटी में 146 किसानों ने 132 हेक्टेयर में उत्पादित 85 हजार क्विंटल गन्ने की आपूर्ति के लिए पंजीकरण कराया है। वहीं, शकुंबरा शुगर कैन ग्रोवर सोसायटी में 150 किसानों ने 40 हजार क्विंटल गन्ने का पंजीकरण करवाया है। सोसायटी के अध्यक्ष संतोष कुमार ने बताया कि इस वर्ष पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है।
किसानों हेमराज, हिम्मत सिंह और राजेश चौधरी के अनुसार पिछले तीन वर्षों से धान की फसल में रोग लगने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इस वर्ष भी क्षेत्र में करीब 30 प्रतिशत धान की फसल रोग की चपेट में आई है। किसानों का कहना है कि धान में दवाइयों और अन्य लागत बढ़ने से खेती घाटे का सौदा बन रही है। ऐसे में गन्ने की ओर रुख करना किसानों के लिए आय का वैकल्पिक जरिया बन रहा है।
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हालांकि, इस सीजन गन्ने का नया खरीद दर अभी घोषित नहीं हुआ है। किसानों को उम्मीद है कि दर बढ़ने पर गन्ने का उत्पादन और बढ़ सकता है। प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक दर्शन चौधरी ने बताया कि गन्ने की फसल एक बार तैयार होने के बाद दो साल तक लगातार आमदनी देती है। रासायनिक खाद और खरपतवारनाशक के बिना भी इसकी खेती संभव है।-- -- -- -- -- -
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-धान में लगातार रोग और बढ़ती लागत से परेशान किसानों ने बदली फसल, नए दर की घोषणा का भी इंतजार
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। धान की फसल में लगातार हो रहे नुकसान और बढ़ती लागत ने पांवटा विकास खंड के किसानों का रुझान गन्ने की ओर बढ़ा दिया है। इस सीजन क्षेत्र के करीब 300 किसानों ने उत्तराखंड की चीनी मिल को 1.22 लाख क्विंटल गन्ना देने के लिए स्थानीय सोसायटियों में पंजीकरण कराया है। इससे क्षेत्र में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ने के साथ किसानों को नकदी फसल से बेहतर आमदनी की उम्मीद जगी है।
पांवटा गन्ना खरीद सोसायटी में 146 किसानों ने 132 हेक्टेयर में उत्पादित 85 हजार क्विंटल गन्ने की आपूर्ति के लिए पंजीकरण कराया है। वहीं, शकुंबरा शुगर कैन ग्रोवर सोसायटी में 150 किसानों ने 40 हजार क्विंटल गन्ने का पंजीकरण करवाया है। सोसायटी के अध्यक्ष संतोष कुमार ने बताया कि इस वर्ष पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है।
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किसानों हेमराज, हिम्मत सिंह और राजेश चौधरी के अनुसार पिछले तीन वर्षों से धान की फसल में रोग लगने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इस वर्ष भी क्षेत्र में करीब 30 प्रतिशत धान की फसल रोग की चपेट में आई है। किसानों का कहना है कि धान में दवाइयों और अन्य लागत बढ़ने से खेती घाटे का सौदा बन रही है। ऐसे में गन्ने की ओर रुख करना किसानों के लिए आय का वैकल्पिक जरिया बन रहा है।
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हालांकि, इस सीजन गन्ने का नया खरीद दर अभी घोषित नहीं हुआ है। किसानों को उम्मीद है कि दर बढ़ने पर गन्ने का उत्पादन और बढ़ सकता है। प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक दर्शन चौधरी ने बताया कि गन्ने की फसल एक बार तैयार होने के बाद दो साल तक लगातार आमदनी देती है। रासायनिक खाद और खरपतवारनाशक के बिना भी इसकी खेती संभव है।