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Delhi NCR News: पूर्व नौकरशाह-सामाजिक कार्यकर्ता नहीं पहुंच सके चुनाव आयोग
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बैरिकेडिंग के चलते निर्वाचन आयोग में नोटिस नहीं दे सके
प्रेस वार्ता में आरोप-पत्र किया सार्वजनिक, सीईसी के खिलाफ महाभियोग की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पूर्व नौकरशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को निर्वाचन आयोग (ईसीआई) नहीं पहुंच सका। प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस देने आयोग जाना चाहता था। कड़ी सुरक्षा और बैरिकेडिंग के कारण उसे आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद शाम पांच बजे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस वार्ता कर महाभियोग की सूचना और आरोप-पत्र सार्वजनिक किया गया।
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई, पूर्व सचिव अमिताभ पांडे, पूर्व विशेष निदेशक आईबी व पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद, पूर्व लोक सेवक आशीष जोशी, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और योगेंद्र यादव समेत कई लोग शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग जाने के दौरान पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रेस क्लब में नोटिस सार्वजनिक करते हुए सीईसी से इस्तीफे की मांग की गई।
जारी आरोप-पत्र में सीईसी पर छह प्रमुख आरोप लगाए गए हैं। इनमें निर्वाचन आयोग के सामूहिक कामकाज को कमजोर करने, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े वैधानिक फॉर्म में बदलाव, मतदाता सूची के कामकाज के केंद्रीकरण और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिये बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप शामिल हैं।
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प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि एसआईआर पर्याप्त तैयारी, प्रशिक्षण और नाम गलत तरीके से हटाए जाने पर तत्काल सुधार की व्यवस्था के बिना आगे बढ़ाया गया। आरोप-पत्र में कहा गया है कि इसके चलते अब तक 13.3 करोड़ नाम पिछली मतदाता सूचियों से हटाए जा चुके हैं। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं, गरीबों, प्रवासियों, अल्पसंख्यकों और बुजुर्गों पर पड़ने का दावा किया गया है।
ईसीआईनेट और फॉर्म-6 पर भी सवाल
आरोप-पत्र में ईसीआईनेट व्यवस्था और मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि इन बदलावों से निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की भूमिका कमजोर हुई और नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
प्रतिनिधिमंडल ने सीईसी के आचरण में राजनीतिक पक्षपात की आशंका जताते हुए विपक्षी नेताओं पर उनकी सार्वजनिक टिप्पणियों और एसआईआर से जुड़े फैसलों का भी हवाला दिया।
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प्रेस वार्ता में आरोप-पत्र किया सार्वजनिक, सीईसी के खिलाफ महाभियोग की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पूर्व नौकरशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को निर्वाचन आयोग (ईसीआई) नहीं पहुंच सका। प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस देने आयोग जाना चाहता था। कड़ी सुरक्षा और बैरिकेडिंग के कारण उसे आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद शाम पांच बजे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस वार्ता कर महाभियोग की सूचना और आरोप-पत्र सार्वजनिक किया गया।
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई, पूर्व सचिव अमिताभ पांडे, पूर्व विशेष निदेशक आईबी व पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद, पूर्व लोक सेवक आशीष जोशी, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और योगेंद्र यादव समेत कई लोग शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग जाने के दौरान पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रेस क्लब में नोटिस सार्वजनिक करते हुए सीईसी से इस्तीफे की मांग की गई।
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जारी आरोप-पत्र में सीईसी पर छह प्रमुख आरोप लगाए गए हैं। इनमें निर्वाचन आयोग के सामूहिक कामकाज को कमजोर करने, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े वैधानिक फॉर्म में बदलाव, मतदाता सूची के कामकाज के केंद्रीकरण और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिये बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप शामिल हैं।
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प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि एसआईआर पर्याप्त तैयारी, प्रशिक्षण और नाम गलत तरीके से हटाए जाने पर तत्काल सुधार की व्यवस्था के बिना आगे बढ़ाया गया। आरोप-पत्र में कहा गया है कि इसके चलते अब तक 13.3 करोड़ नाम पिछली मतदाता सूचियों से हटाए जा चुके हैं। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं, गरीबों, प्रवासियों, अल्पसंख्यकों और बुजुर्गों पर पड़ने का दावा किया गया है।
ईसीआईनेट और फॉर्म-6 पर भी सवाल
आरोप-पत्र में ईसीआईनेट व्यवस्था और मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि इन बदलावों से निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की भूमिका कमजोर हुई और नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
प्रतिनिधिमंडल ने सीईसी के आचरण में राजनीतिक पक्षपात की आशंका जताते हुए विपक्षी नेताओं पर उनकी सार्वजनिक टिप्पणियों और एसआईआर से जुड़े फैसलों का भी हवाला दिया।