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संयुक्त राष्ट्र: आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका और क्यूबा आमने-सामने, वोट से पहले समर्थन जुटाने की कोशिश

Tue, 20 Oct 2026 02:46 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 20 Oct 2026 02:46 AM IST
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US, Cuba clash at UN as Washington seeks to sway annual vote on economic embargo
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय - फोटो : एएनआई
अमेरिका और क्यूबा के बीच संयुक्त राष्ट्र में टकराव देखने को मिला। ट्रंप प्रशासन एक बार फिर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद अगले सप्ताह होने वाले वार्षिक मतदान को प्रभावित करना है। इस मतदान में क्यूबा के खिलाफ अमेरिका के दशकों पुराने आर्थिक प्रतिबंधों की निंदा करने वाला प्रस्ताव पेश किया जाएगा।
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संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने सोमवार को 'क्यूबा लिब्रे' नाम से एक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें सरकार के विरोधियों और पूर्व कैदियों ने हिस्सा लिया। इसका मकसद द्वीप देश की सरकार के उस व्यवहार को सामने लाना था, जिसे वॉल्ट्ज ने दमनकारी बताया।
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इस कार्यक्रम में कुछ ऐसे वीडियो भी दिखाए गए, जिनमें कथित तौर पर क्यूबा के नागरिकों को हिरासत में लेते हुए दिखाया गया था। चर्चा में शामिल लोगों ने बताया कि सरकार के खिलाफ बोलने के कारण उन्हें कई वर्षों तक प्रताड़ित किया गया और उनके साथ उत्पीड़न हुआ। क्यूबा लंबे समय से राजनीतिक कैदियों को रखने के आरोपों से इनकार करता रहा है। हालांकि, कार्यकर्ता समूहों ने राजनीतिक कारणों से जेल में बंद हजारों लोगों के मामले दर्ज किए हैं।
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संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वॉल्ट्ज ने कहा, 'यह वह दमन है, जिसे हवाना छिपाना चाहता है'। उन्होंने देशों से आग्रह किया कि वे '70 साल के प्रचार' से आगे देखें और अगले सप्ताह प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करें।

वहीं, कुछ ही दूरी पर संयुक्त राष्ट्र में क्यूबा के राजदूत अर्नेस्टो सोबेरोन गुजमान ने दुनियाभर के राजनयिकों और सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों को इकट्ठा किया। उन्होंने इस कार्यक्रम का विरोध किया। गुजमान ने इसे क्यूबा के खिलाफ आयोजित एक दिखावटी कार्यक्रम बताया।

गुजमान ने कहा, यह दिखावा एक साधारण तथ्य से ध्यान हटाने की कोशिश है। अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियम तोड़ने वाले देश की तरह काम कर रहा है और क्यूबा के लोगों को सामूहिक सजा दे रहा है। 

यह लगातार दूसरा साल है, जब ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को प्रभावित करने के लिए अभियान चलाया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य क्यूबा के खिलाफ अमेरिकी सरकार की 'अधिकतम दबाव की नीति' की आलोचना करना है।

अमेरिका की कोशिश एक बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका मककसद क्यूबा की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए उस पर दबाव बनाना है। इसके तहत द्वीप देश को ईंधन की आपूर्ति रोकने की कोशिश की जा रही है। इससे बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो रही है। इसका असर खाना पकाने, पानी की आपूर्ति, इंटरनेट और टेलीफोन सेवाओं जैसी बुनियादी जरूरतों पर पड़ रहा है।


अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों की निंदा करने वाला वार्षिक प्रस्ताव पिछले 34 वर्षों से संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया जा रहा है। हर बार संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से भारी बहुमत इसका समर्थन करता है। पिछले साल मतदान में 165 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में और सात ने विरोध में वोट दिया था। 12 देश मतदान से दूर रहे थे। अर्जेंटीना, यूक्रेन और हंगरी ने पहली बार इस प्रस्ताव का विरोध किया था।

हालांकि, ऐसे प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते। फिर भी वे दुनिया की राय को दर्शाते हैं।
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