शहर के कनेरी मार्ग स्थित विंध्यावासिनी कॉलोनी में 17 दिन पहले ई-स्कूटर में आग लगने से झुलसी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और उसकी बेटी की मौत के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया। रविवार को मृतकों के परिजन और समाजजन मृतका आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का शव लेकर माणकचौक पहुंचे और धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ई-स्कूटर कंपनी और डीलर के खिलाफ कार्रवाई, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा तथा मृतका की बड़ी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की। करीब पौने तीन घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद डीलर की ओर से 10 लाख रुपए की सहायता देने पर सहमति बनी और प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।
10 दिन पहले खरीदा था ई-स्कूटर
झाबुआ जिले की ग्राम पंचायत गुणावद में कार्यरत 38 वर्षीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बिंदुकुंवर रतलाम की विंध्यावासिनी कॉलोनी में अपनी दो बेटियों 20 वर्षीय विजयलक्ष्मी और 16 वर्षीय अंतिमकुंवर के साथ रहती थीं। पति से उनका कई वर्ष पहले तलाक हो चुका था।
18 अगस्त की रात तीनों घर में सो रही थीं। घर के पास वाले हिस्से में ई-स्कूटर खड़ा था। 19 अगस्त की तड़के करीब साढ़े तीन से चार बजे के बीच ई-स्कूटर में अचानक आग लग गई। कुछ ही देर में आग घर में फैल गई और कूलर, पंखे सहित अन्य सामान को भी अपनी चपेट में ले लिया। पूरे घर में धुआं भर गया।
विजयलक्ष्मी की नींद खुली तो वह बाहर निकलकर छत की ओर चली गई। इसके बाद वह मां और बहन को बचाने के लिए वापस कमरे की ओर पहुंची। उसने दोनों का हाथ पकड़कर जैसे-तैसे छत तक पहुंचाया। शोर सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। बाद में तीनों पड़ोसी की छत के रास्ते नीचे उतरे।
स्थानीय लोगों ने निजी वाहनों से बिंदुकुंवर और अंतिमकुंवर को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को इंदौर रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान 1 सितंबर को अंतिमकुंवर की मौत हो गई। वहीं, 5 सितंबर की शाम बिंदुकुंवर ने भी दम तोड़ दिया।
विजयलक्ष्मी ने घटना के दिन बताया था कि रात करीब 9 बजे तक परिवार सो गया था और सोने से पहले ई-स्कूटर का चार्जिंग प्लग निकाल दिया गया था। इसके बावजूद ई-स्कूटर में आग कैसे लगी, इसकी जानकारी नहीं हो सकी। ई-स्कूटर घटना से महज 10 दिन पहले ही खरीदा गया था।
शव लेकर माणकचौक पहुंचे परिजन
बिंदुकुंवर की मौत के बाद रविवार को परिजन और करणी सेना परिवार के कार्यकर्ता ई-स्कूटर शोरूम संचालक के घर के पास माणकचौक चौराहे पर पहुंचे और धरना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद इंदौर से बिंदुकुंवर का शव लेकर एंबुलेंस भी वहां पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस को धरना स्थल पर ही खड़ा कर दिया। मौके पर तहसीलदार कुलभूषण शर्मा और माणकचौक थाना प्रभारी विक्रमसिंह चौहान सहित अन्य अधिकारी पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों और कंपनी के डीलर के प्रतिनिधियों से चर्चा की।
मुआवजे पर बनी सहमति
धरना प्रदर्शन के दौरान मुआवजे को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक चर्चा चलती रही। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि डीलर की ओर से 15 लाख रुपए की सहायता देने की बात कही गई थी। वहीं, डीलर प्रतिनिधि ने बताया कि 3 लाख रुपए की सहायता पहले ही दी जा चुकी है और 8 लाख रुपए अतिरिक्त देने की पेशकश की गई है। हालांकि, इस पर प्रदर्शनकारी सहमत नहीं हुए।
तहसीलदार ने बताया कि बिंदुकुंवर झाबुआ जिले में कार्यरत थीं, इसलिए उनकी बड़ी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति देने की प्रक्रिया वहां का प्रशासन करेगा। रतलाम प्रशासन आवश्यक कार्रवाई में परिवार का सहयोग करेगा। परिजनों और करणी सेना परिवार के सदस्यों ने मांग की कि बड़ी बेटी को तत्काल रोजगार या अनुकंपा नियुक्ति दी जाए, क्योंकि मां और बहन की मौत के बाद वह परिवार की एकमात्र सदस्य बची है। शाम करीब पौने छह बजे डीलर की ओर से 10 लाख रुपए की सहायता देने पर सहमति बन गई। इसमें 8 लाख रुपए का चेक और 2 लाख रुपए नकद दिए गए। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया और बिंदुकुंवर का शव अंतिम संस्कार के लिए उनके गांव तंबोलिया ले जाया गया।
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तहसीलदार को सौंपा छह सूत्रीय ज्ञापन
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद कलेक्टर के नाम छह सूत्रीय ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया। ज्ञापन में ई-बाइक और ई-स्कूटर में आग व विस्फोट की घटनाओं का हवाला देते हुए पूरे मध्य प्रदेश में इनकी बिक्री पर रोक लगाने और शोरूम बंद कराने की मांग की गई।
इसके अलावा संबंधित ई-स्कूटर की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने, मृतका बिंदुकुंवर और उनकी बेटी के आश्रितों को शासन के नियमानुसार मुआवजा व अनुग्रह राशि देने तथा ई-स्कूटर कंपनी और शोरूम संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि बिंदुकुंवर की मौत के बाद उनकी बड़ी बेटी के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। इसलिए उसे अनुकंपा नियुक्ति या शासन स्तर से उपलब्ध अन्य सहायता दी जाए। माणकचौक थाना पुलिस ने ई-स्कूटर शोरूम संचालक के खिलाफ बीएनएस की धारा 106(1) के तहत प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।