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Saharanpur News: फैसले के हर पेज में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की काट को रखे तर्क और साक्ष्य

Sun, 06 Sep 2026 12:57 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 12:57 AM IST
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On every page of the judgment, both sides presented arguments and evidence to counter each other.
सहारनपुर। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने अपने 35 पेज के आदेश में मस्जिद को अवैध करार दिया था। वहीं मस्जिद प्रबंधन पक्ष की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए जिला जज की अदालत ने 27 पेज में अपना फैसला सुनाया। आदेश के हर पेज पर पक्ष विपक्ष ने एक दूसरे के तर्क की काट प्रस्तुत की।
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फैसले के यह पांच बिंदु रहे थे अहम
मस्जिद प्रबंधन पक्ष : मस्जिद प्रबंधन पक्ष की तरफ से एक जनवरी 1911 का बिजली बिल अदालत में रखा गया था। बताया कि मस्जिद आजादी से पहले की है। इसके संबंध में तत्कालीन मुतवल्ली शहजाद हुसैन द्वारा बिजली बिल का कनेक्शन भी लिया था।
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शासकीय अधिवक्ता : इस दलील पर शासकीय अधिवक्ताओं ने तीखी बहस की। बताया कि एक जनवरी 1911 को रविवार अवकाश का दिन था। इसके साथ ही दस्तावेज प्रस्तुत किए कि महानगर में 1922 में बिजली पहुंची थी। इसका वितरण 1928 से शुरू हुआ।
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मस्जिद प्रबंधन पक्ष : मस्जिद प्रबंधन पक्ष की तरफ से अदालत में मस्जिद को वक्फ संपत्ति होने का तर्क रखा गया। साथ ही मस्जिद को 150 वर्ष पुरानी होने का दावा किया।
शासकीय अधिवक्ता : शासकीय अधिवक्ताओं ने मस्जिद पक्ष द्वारा दाखिल नगर पालिका बिल, बिजली बिल पर आपत्ति जताई। कहा कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद की विधि व्यवस्था के मुताबिक स्थानीय निकाय का कर निर्धारण स्वत्व का कागज नहीं है। इससे स्वामित्व का निर्धारण नहीं होता।
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मस्जिद प्रबंधन पक्ष : सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रबंधन पक्ष ने अब्दुल सलाम, विरेश कुमार आदि के शपथ पत्र दाखिल किए थे।
शासकीय अधिवक्ता : शासकीय अधिवक्ताओं की ओर से राजस्व निरीक्षक पाल सिंह आदि के बयान कराए। उन्होंने बताया कि जमीन हदूद(सीमा) वाली भूमि है। संपत्ति का जमींदारा खात्मा नहीं हुआ है। संपत्ति कचहरी कलक्ट्रेट के रूप में दर्ज है।
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मस्जिद प्रबंधन पक्ष : जिला जज की अदालत में मस्जिद प्रबंधन पक्ष की ओर से बताया गया कि खेवट नंबर 10/1 आज भी रिकॉर्ड के मुताबिक वाहिद खान, याकूब खान के नाम है। यह संपत्ति आज भी उनके नाम चली आ रही है। संपत्ति 1947 से पहले की है।
शासकीय अधिवक्ता : शासकीय अधिवक्ताओं ने दलील रखी कि खसरा नंबर 539 रकबा 5.780 हेक्टेयर ग्राम पठानपुरा तहसील व जिला कचहरी कलक्ट्रेट स्थित है। फसली वर्ष 1296 जो 1888-89 होता है में भूमि केसर-ए-हिंद के नाम है, साथ ही कलक्ट्रेट कचहरी भी दर्ज है। भूमि बाद में भारत सरकार को हस्तांतरित हो गई। पहले खसरा नंबर 383 और खेवट नंबर 31 था, जो बाद में बदलकर खसरा नंबर 539 हो गया है।
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- वर्शिप एक्ट के तहत भी रखी दलील
मस्जिद प्रबंधन पक्ष : मस्जिद प्रबंधन पक्ष की तरफ से दलील रखी गई कि मस्जिद का निर्माण 1947 से पहले का है। ऐसे में धार्मिक स्थल होने के नाते इस पर वर्शिप एक्ट लागू होता है।

शासकीय अधिवक्ता : शासकीय अधिवक्ताओं ने दलील रखते हुए कहा कि मामला सरकारी भूमि पर कब्जे का है। ऐसे में इस मामले यह एक्ट लागू नहीं होता, साथ ही अन्य दलीलें भी रखी।
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