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Muzaffarnagar News: आसमान में छा जाते हैं धुएं के काले बादल...छह पेपर मिलों को नोटिस
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। शहर और आसपास के क्षेत्र के आसमान में आए दिन छाने वाले धुएं के बादलों पर प्रदूषण विभाग ने भोपा रोड स्थित पेपर मिलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। छह पेपर मिलों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए आरडीएफ (रिफ्यूज्ड डिराइव्ड फ्यूल) के प्रयोग और उसके भंडारण में नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। मिल प्रबंधन को चेताया गया है कि आरडीएफ, इनर्ट और राख का भंडारण मानकों के अनुसार किया जाए।
जनपद में करीब 30 पेपर मिल संचालित हो रही हैं। अधिकतर में ईंधन के रूप में आरडीएफ प्रयोग की अनुमति है। मानकों का उल्लंघन कर आरडीएफ प्रयोग किए जाने से क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। कुछ माह पहले किसान संगठनों की ओर से आरडीएफ प्रयोग में मानकों का उल्लंघन और बढ़ते वायु प्रदूषण को आधार बनाते हुए आंदोलन किए गए।
दिल्ली और अन्य प्रदेशों से आने वाले आरडीएफ से भरे ट्रकों को भी रोका गया। जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की सख्ती के बाद क्षेत्र में वायु प्रदूषण में कमी आई। लेकिन पिछले कुछ दिनों से भोपा रोड क्षेत्र में स्थित औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से फिर से काला धुआं निकलता देखा जा रहा है।
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अवर अभियंता राजा गुप्ता ने बताया कि हाल में ही छह पेपर मिलों को नोटिस दिए गए हैं। जिनमें भोपा रोड क्षेत्र की सिल्वरटन पेपर, तिरुपति बालाजी पेपर, शाकुंभरी पेपर और भागेश्वरी पेपर मिल शामिल हैं।
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प्रतिदिन पहुंच रहे कचरा लदे 100 से अधिक ट्रक
आरटीआई कार्यकर्ता सुमित मलिक ने आरडीएफ की आड़ में पेपर मिलों में कचरा जलाए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने दावा किया कि आरडीएफ के नाम पर कई मिलों में बिना प्रोसेस किया हुआ कचरा जलाया जा रहा है। कहा कि कचरे से लदे 100 से अधिक ट्रक नियमित रूप से मुजफ्फरनगर पहुंच रहे हैं। इस कचरे में प्लास्टिक और रबर जैसे खतरनाक पदार्थ भी शामिल हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
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नियमानुसार किया जा रहा ईंधन में आरडीएफ प्रयोग
यूपी पेपर मिल एसोसिएशन अध्यक्ष पंकज अग्रवाल का कहना है कि ईंधन में आरडीएफ का प्रयोग नियमानुसार किया जा रहा है। जिसके लिए अनुमति ली गई है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग समय-समय पर जांच भी करता है। बावजूद कुछ पेपर मिलों को नोटिस दिए जाते हैं तो उनका नियमानुसार जवाब दिया जाएगा।
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मुजफ्फरनगर। शहर और आसपास के क्षेत्र के आसमान में आए दिन छाने वाले धुएं के बादलों पर प्रदूषण विभाग ने भोपा रोड स्थित पेपर मिलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। छह पेपर मिलों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए आरडीएफ (रिफ्यूज्ड डिराइव्ड फ्यूल) के प्रयोग और उसके भंडारण में नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। मिल प्रबंधन को चेताया गया है कि आरडीएफ, इनर्ट और राख का भंडारण मानकों के अनुसार किया जाए।
जनपद में करीब 30 पेपर मिल संचालित हो रही हैं। अधिकतर में ईंधन के रूप में आरडीएफ प्रयोग की अनुमति है। मानकों का उल्लंघन कर आरडीएफ प्रयोग किए जाने से क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। कुछ माह पहले किसान संगठनों की ओर से आरडीएफ प्रयोग में मानकों का उल्लंघन और बढ़ते वायु प्रदूषण को आधार बनाते हुए आंदोलन किए गए।
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दिल्ली और अन्य प्रदेशों से आने वाले आरडीएफ से भरे ट्रकों को भी रोका गया। जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की सख्ती के बाद क्षेत्र में वायु प्रदूषण में कमी आई। लेकिन पिछले कुछ दिनों से भोपा रोड क्षेत्र में स्थित औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से फिर से काला धुआं निकलता देखा जा रहा है।
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अवर अभियंता राजा गुप्ता ने बताया कि हाल में ही छह पेपर मिलों को नोटिस दिए गए हैं। जिनमें भोपा रोड क्षेत्र की सिल्वरटन पेपर, तिरुपति बालाजी पेपर, शाकुंभरी पेपर और भागेश्वरी पेपर मिल शामिल हैं।
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प्रतिदिन पहुंच रहे कचरा लदे 100 से अधिक ट्रक
आरटीआई कार्यकर्ता सुमित मलिक ने आरडीएफ की आड़ में पेपर मिलों में कचरा जलाए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने दावा किया कि आरडीएफ के नाम पर कई मिलों में बिना प्रोसेस किया हुआ कचरा जलाया जा रहा है। कहा कि कचरे से लदे 100 से अधिक ट्रक नियमित रूप से मुजफ्फरनगर पहुंच रहे हैं। इस कचरे में प्लास्टिक और रबर जैसे खतरनाक पदार्थ भी शामिल हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
नियमानुसार किया जा रहा ईंधन में आरडीएफ प्रयोग
यूपी पेपर मिल एसोसिएशन अध्यक्ष पंकज अग्रवाल का कहना है कि ईंधन में आरडीएफ का प्रयोग नियमानुसार किया जा रहा है। जिसके लिए अनुमति ली गई है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग समय-समय पर जांच भी करता है। बावजूद कुछ पेपर मिलों को नोटिस दिए जाते हैं तो उनका नियमानुसार जवाब दिया जाएगा।