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Lalitpur News: बगुला, बतख और जलीय जीवों पर 'जेई' लाने का शक
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ललितपुर। जिले में दिमागी बुखार से एक 10 वर्षीय बालिका की मौत समेत तीन में लक्षण मिले थे। 22 दिन बीत जाने के बाद भी इस वायरस के जिले में आने का पता नहीं चल सका है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि अब बगुला, बतख, मुर्गी फार्मों समेत जलीय जीवों के सैंपल लिए जाएंगे। इसके बाद ही वायरल के जिले में आने के स्रोत का पता चल सकेगा।
ब्लॉक बार अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़ोखरा के मजरा रामनगर निवासी एक दस वर्षीय बालिका की दस जुलाई को तबीयत खराब हो गई थी। उल्टी व चक्कर आने के चलते परिजन टीकमगढ़ ले गए। यहां से सागर लेकर गए, जहां पर 17 जुलाई को सैंपल लेकर जांच की गई। 20 जुलाई को आई रिपोर्ट में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) की पुष्टि हुई। उपचार के दौरान 27 जुलाई को उसकी मौत हो गई थी।
मामले से स्वास्थ्य महकमा में हड़कंप मच गया। डिप्टी सीएमओ जिला मुख्यालय से टीम लेकर गांव में पहुंचे। सीएचसी बार और मलेरिया की टीम ने भी गांव में डेरा डाला। गांव में स्क्रीनिंग की गई। इसमें 16 लोगों में हल्के बुखार के लक्षण होने के चलते सैंपल लिया गया। 12 अगस्त को आई रिपोर्ट में दो बच्चों में दिमागी बुखार (जापानी इंसेफेलाइटिस) की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट मिलने पर स्वास्थ्य महकमा गांव में पहुंचा था। बच्चे स्वस्थ पाए गए थे।
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लेकिन, अब तक वायरस की जानकारी नहीं हो सकी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि हिमालय की तराई वाले क्षेत्र में जेई के वायरस पाए जाते हैं। यहां पर यह पहला मामला था। वायरस के आगमन की जांच के लिए मरीजों की ट्रेवल हिस्ट्री आदि की जांच की गई। इसके बाद भी जानकारी नहीं हो सकी थी। अब वायरस के स्रोत का पता लगाने के लिए जलीय जीवों के सैंपल लिए जाएंगे। इनमें बगुला, बतख आदि शामिल हैं। साथ ही सूकर व मुर्गी पालन होने पर इनके सैंपल भी लिए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पशु पालन विभाग को सभी सूचना दी गई है। इनके सैंपल की रिपोर्ट के बाद वायरस का पता लगाया जा सकेगा।
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जेई के मरीज मिलने वाले क्षेत्र में लगातार निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य शिविर लगाकर जांच की जा रही है। अब स्थिति सामान्य है।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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उटारी बांध व सूकर और मुर्गी फार्म में सीरम सैंपल लेने की बात कही गई है। जलीय जीव मिलने पर सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी।
भगवान सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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ब्लॉक बार अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़ोखरा के मजरा रामनगर निवासी एक दस वर्षीय बालिका की दस जुलाई को तबीयत खराब हो गई थी। उल्टी व चक्कर आने के चलते परिजन टीकमगढ़ ले गए। यहां से सागर लेकर गए, जहां पर 17 जुलाई को सैंपल लेकर जांच की गई। 20 जुलाई को आई रिपोर्ट में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) की पुष्टि हुई। उपचार के दौरान 27 जुलाई को उसकी मौत हो गई थी।
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मामले से स्वास्थ्य महकमा में हड़कंप मच गया। डिप्टी सीएमओ जिला मुख्यालय से टीम लेकर गांव में पहुंचे। सीएचसी बार और मलेरिया की टीम ने भी गांव में डेरा डाला। गांव में स्क्रीनिंग की गई। इसमें 16 लोगों में हल्के बुखार के लक्षण होने के चलते सैंपल लिया गया। 12 अगस्त को आई रिपोर्ट में दो बच्चों में दिमागी बुखार (जापानी इंसेफेलाइटिस) की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट मिलने पर स्वास्थ्य महकमा गांव में पहुंचा था। बच्चे स्वस्थ पाए गए थे।
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लेकिन, अब तक वायरस की जानकारी नहीं हो सकी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि हिमालय की तराई वाले क्षेत्र में जेई के वायरस पाए जाते हैं। यहां पर यह पहला मामला था। वायरस के आगमन की जांच के लिए मरीजों की ट्रेवल हिस्ट्री आदि की जांच की गई। इसके बाद भी जानकारी नहीं हो सकी थी। अब वायरस के स्रोत का पता लगाने के लिए जलीय जीवों के सैंपल लिए जाएंगे। इनमें बगुला, बतख आदि शामिल हैं। साथ ही सूकर व मुर्गी पालन होने पर इनके सैंपल भी लिए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पशु पालन विभाग को सभी सूचना दी गई है। इनके सैंपल की रिपोर्ट के बाद वायरस का पता लगाया जा सकेगा।
जेई के मरीज मिलने वाले क्षेत्र में लगातार निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य शिविर लगाकर जांच की जा रही है। अब स्थिति सामान्य है।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
उटारी बांध व सूकर और मुर्गी फार्म में सीरम सैंपल लेने की बात कही गई है। जलीय जीव मिलने पर सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी।
भगवान सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी