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अयोध्या: रामलीला का बदला रंग-रूप, परंपरा पर तकनीक का कब्जा; हाईटेक मंच और विदेशी दलों ने बदली रामकथा की तस्वीर
Wed, 07 Oct 2026 07:45 PM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: Bhupendra Singh
Updated Wed, 07 Oct 2026 07:45 PM IST
सार
अयोध्या की रामलीला का रंग-रूप बदल गया है। परंपरा पर तकनीक का कब्जा हो गया है। हाईटेक मंच और विदेशी दलों ने रामकथा की तस्वीर बदल दी है। स्थानीय रामलीलाएं पीछे, अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों को बड़ा मंच मिला है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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अयोध्या में रामलीला का एक दृश्य। (सांकेतिक)
- फोटो : amar ujala
विस्तार
रामनगरी अयोध्या की रामलीला अब केवल परंपरा और स्थानीय कलाकारों तक सीमित नहीं है। पिछले करीब एक दशक में इसका रंग-रूप तेजी से बदला है। 2017 में अयोध्या में बंद पड़ी रामलीलाओं को दीपोत्सव के मंच से दोबारा जीवंत करने की पहल हुई। इसके साथ ही रामलीला का केंद्र भी बदला। स्थानीय पारंपरिक मंचन की जगह हाईटेक मंच, सजीव प्रसारण, देश-विदेश की टीमें और फिल्मी सितारे आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गए।
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डिजिटल तकनीक और बड़े स्तर के प्रसारण ने रामकथा को अयोध्या की सीमाओं से निकालकर देश-दुनिया तक पहुंचाया। सरकार के संरक्षण में रामलीला और दीपोत्सव को बड़े पैमाने पर लगातार आयोजित किया गया। इससे न सिर्फ दर्शकों की संख्या में इजाफा हुआ बल्कि आयोजन की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी। हालांकि, इस बदलाव के बीच सवाल यह भी उठा कि अयोध्या की अपनी पारंपरिक रामलीला और स्थानीय कलाकारों को अपेक्षित कितनी जगह मिली।
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विदेशी रामलीलाओं से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय रंग
दीपोत्सव के मंच पर विदेशी रामलीला दलों की मौजूदगी लगातार बढ़ी। 2019 में मॉरीशस, सूरीनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया और कनाडा की टीमों ने प्रस्तुति दी। 2022 में रूस, वियतनाम, मलेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका, इंडोनेशिया, फिजी, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और नेपाल के दल पहुंचे।2023 में नेपाल, म्यांमार, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया, रूस और सिंगापुर की टीमों ने मंच संभाला। 2024 में म्यांमार, नेपाल, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया और इंडोनेशिया के कलाकारों ने रामकथा प्रस्तुत की। जबकि 2025 में श्रीलंका, रूस, थाईलैंड जैसे देशों की मंडली ने रामकथा का मंचन किया।
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