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राजस्थान: बांसवाड़ा में गरीबों के हक का 913 क्विंटल गेहूं गायब, लेम्प्स व्यवस्थापक समेत अन्य पर केस
Sat, 12 Sep 2026 07:44 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 07:44 PM IST
सार
बांसवाड़ा की बड़वी ग्राम पंचायत में तीन उचित मूल्य दुकानों की जांच के दौरान 912.99 क्विंटल गेहूं के गबन का मामला सामने आया है। रसद विभाग की शिकायत पर लेम्प्स व्यवस्थापक समेत अन्य के खिलाफ बीएनएस और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।
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भूंगड़ा पुलिस थाना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत गरीबी की रेखा से नीचे जीवन जीने वाले और अन्त्योदय परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गेहूं का वितरण किया जाता है, किंतु बांसवाड़ा जिले की बड़वी ग्राम पंचायत के बड़वी, निचला और उपला घंटाला गांव में लेम्प्स व्यवस्थापक इन्हीं गरीब परिवारों के हक का 913 क्विंटल गेहूं डकार गया। इसे लेकर रसद विभाग के प्रवर्तन निरीक्षक कालूराम निनामा ने लेम्प्स व्यवस्थापक व अन्य के खिलाफ भूंगड़ा थाने में प्रकरण दर्ज कराया है।
तीन उचित मूल्य दुकानों की जिम्मेदारी थी
पुलिस के अनुसार प्रवर्तन निरीक्षक कालूराम निनामा ने रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में बताया कि ग्राम पंचायत बड़वी के गांव बड़वी, उपला घंटाला एवं निचला घंटाला की तीन उचित मूल्य दुकानों का जिम्मा लेम्प्स व्यवस्थापक संभालते हैं। तीनों दुकानों के लिए विभाग की ओर से पोस मशीन और कोड आवंटित हुए हैं। गेहूं का वितरण बायोमैट्रिक सत्यापन के आधार पर किया जाता है।
जांच में सामने आई गेहूं वितरण में गड़बड़ी
रिपोर्ट के अनुसार प्रवर्तन निरीक्षक गौरव सुथार ने तीनों दुकानों को आवंटित पोस कोड के आधार पर स्टॉक और वितरण की जांच की। इसमें सामने आया कि तीनों क्षेत्रों के पात्र उपभोक्ताओं के लिए सितंबर 2016 से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। जांच के दौरान सामने आया कि जनवरी और फरवरी 2026 में उपभोक्ताओं के पोस मशीन पर फिंगर लगाने के बावजूद गेहूं नहीं दिया गया। वहीं मार्च और अप्रैल माह का गेहूं भी वितरित नहीं किया गया। इस बारे में लेम्प्स व्यवस्थापक राजेश गुर्जर ने स्टॉक व अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। विभाग की ओर से जारी नोटिस का भी जवाब नहीं दिया।
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1539 क्विंटल में से 913 क्विंटल का हिसाब नहीं
रिपोर्ट के अनुसार तीनों केंद्रों पर वितरक को आवंटित, वितरण, स्टॉक और शेष रहे गेहूं की जानकारी लेने पर सामने आया कि कुल 1539.77 क्विंटल गेहूं होना था, किंतु कुल 912.99 क्विंटल का गबन पाया गया। इस पर लेम्प्स व्यवस्थापक प्रभुलाल चौधरी एवं अन्य के खिलाफ बीएनएस एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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तीन उचित मूल्य दुकानों की जिम्मेदारी थी
पुलिस के अनुसार प्रवर्तन निरीक्षक कालूराम निनामा ने रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में बताया कि ग्राम पंचायत बड़वी के गांव बड़वी, उपला घंटाला एवं निचला घंटाला की तीन उचित मूल्य दुकानों का जिम्मा लेम्प्स व्यवस्थापक संभालते हैं। तीनों दुकानों के लिए विभाग की ओर से पोस मशीन और कोड आवंटित हुए हैं। गेहूं का वितरण बायोमैट्रिक सत्यापन के आधार पर किया जाता है।
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जांच में सामने आई गेहूं वितरण में गड़बड़ी
रिपोर्ट के अनुसार प्रवर्तन निरीक्षक गौरव सुथार ने तीनों दुकानों को आवंटित पोस कोड के आधार पर स्टॉक और वितरण की जांच की। इसमें सामने आया कि तीनों क्षेत्रों के पात्र उपभोक्ताओं के लिए सितंबर 2016 से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। जांच के दौरान सामने आया कि जनवरी और फरवरी 2026 में उपभोक्ताओं के पोस मशीन पर फिंगर लगाने के बावजूद गेहूं नहीं दिया गया। वहीं मार्च और अप्रैल माह का गेहूं भी वितरित नहीं किया गया। इस बारे में लेम्प्स व्यवस्थापक राजेश गुर्जर ने स्टॉक व अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। विभाग की ओर से जारी नोटिस का भी जवाब नहीं दिया।
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1539 क्विंटल में से 913 क्विंटल का हिसाब नहीं
रिपोर्ट के अनुसार तीनों केंद्रों पर वितरक को आवंटित, वितरण, स्टॉक और शेष रहे गेहूं की जानकारी लेने पर सामने आया कि कुल 1539.77 क्विंटल गेहूं होना था, किंतु कुल 912.99 क्विंटल का गबन पाया गया। इस पर लेम्प्स व्यवस्थापक प्रभुलाल चौधरी एवं अन्य के खिलाफ बीएनएस एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।