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Pithori Amavasya 2026: कब है पिठोरी अमावस्या? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व

Tue, 25 Aug 2026 12:25 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 25 Aug 2026 12:25 PM IST
सार

Pithori Amavasya Vrat: पिठोरी अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन माताएं संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना के लिए व्रत और पूजा करती हैं। आइए जानते हैं 2026 में पिठोरी अमावस्या कब है, शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।

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Pithori Amavasya 2026 Date Know the Auspicious Muhurat Rituals and Religious Significance
pithori amavasya 2026 - फोटो : amar ujala

Pithori Amavasya: संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से माताएं कई तरह के व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करती हैं। पिठोरी अमावस्या भी ऐसा ही एक पर्व है, जिसे संतान के कल्याण और परिवार की सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन 64 देवियों की पूजा करने की परंपरा है। आइए जानते हैं पिठोरी अमावस्या 2026 की तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व, नियम और पौराणिक कथा।

 

Pithori Amavasya 2026 Date Know the Auspicious Muhurat Rituals and Religious Significance
पिठोरी अमावस्या - फोटो : अमर उजाला

पिठोरी अमावस्या कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, पिठोरी अमावस्या भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। 2026 में पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन माताएं संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना से व्रत रखकर 64 देवियों की पूजा करती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग नामों से भी जाना जाता है। महाराष्ट्र और कुछ अन्य क्षेत्रों में इससे जुड़ी लोक परंपराएं विशेष रूप से प्रचलित हैं।

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पिठोरी अमावस्या शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock

पिठोरी अमावस्या शुभ मुहूर्त

  • पिठोरी अमावस्या की तारीख: 10 सितंबर 2026, गुरुवार
  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 9 सितंबर 2026 की रात 11:20 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 10 सितंबर 2026 की रात 9:45 बजे
  • पूजा के लिए शुभ समय: सुबह 6:07 बजे से 9:18 बजे तक
  • पितृ तर्पण और दान का समय: दोपहर 11:45 बजे से 1:30 बजे तक
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पिठोरी अमावस्या व्रत क्या है? - फोटो : adobe stock

पिठोरी अमावस्या व्रत क्या है?
पिठोरी अमावस्या भाद्रपद कृष्ण अमावस्या के दिन रखा जाने वाला व्रत है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन माताएं अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से व्रत करती हैं। इस पर्व में आटे से 64 देवियों की प्रतिमाएं बनाने और उनकी पूजा करने की परंपरा विशेष मानी जाती है। 'पिठोरी' नाम को आटे से जुड़ी इस परंपरा से जोड़ा जाता है। पूजा में माता दुर्गा और अन्य देवी स्वरूपों का स्मरण किया जाता है।

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पिठोरी अमावस्या का धार्मिक महत्व - फोटो : अमर उजाला

पिठोरी अमावस्या का धार्मिक महत्व
पिठोरी अमावस्या को मातृशक्ति और संतान के बीच प्रेम एवं आस्था का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक देवी-देवताओं की पूजा और व्रत करने से संतान के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। अमावस्या तिथि होने के कारण इस दिन पितरों के लिए तर्पण, दान और प्रार्थना करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इसे परिवार की सुख-शांति और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर माना गया है। हालांकि, संतान की आयु या स्वास्थ्य से जुड़े फल धार्मिक आस्था और मान्यताओं का हिस्सा हैं; इन्हें निश्चित चिकित्सकीय परिणाम के रूप में नहीं लेना चाहिए।

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