हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना गया है। भक्त इस अवसर पर व्रत रखते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक कर बेलपत्र, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से महादेव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होने और जीवन की परेशानियों से राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त होता है। दांपत्य जीवन में सुख-शांति और कार्यों में सफलता की कामना से भी इस दिन शिव आराधना की जाती है।
मासिक शिवरात्रि: भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय, सभी समस्याओं से मिलेगा छुटकारा
मासिक शिवरात्रि पर पूजा के साथ कुछ विशेष उपाय करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इन उपायों से जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। आइए इन उपायों के बारे में जानते हैं।
पढ़ाई में आ रही परेशानी के लिए
विद्यार्थियों को शिक्षा से जुड़ी बाधाओं से राहत के लिए स्नान के बाद शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। इसके बाद शिवलिंग पर चंदन अर्पित करें।
किसी समस्या का समाधान पाने के लिए
यदि कोई परेशानी लंबे समय से बनी हुई है, तो जल में थोड़ा दूध मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके बाद 11 बेलपत्र लें और प्रत्येक पर चंदन से 'ॐ' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। धूप-दीप से भगवान शिव की पूजा करें।
संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए
बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं तो मासिक शिवरात्रि पर अपनी संतान के हाथों किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काले कंबल का दान करवाएं। इसे सेवा और दान की भावना से करना चाहिए।
गुस्सा शांत करने के लिए
बार-बार क्रोध आने की स्थिति में शिव मंदिर जाकर जौ से बनी रोटी का भोग भगवान शिव को लगाएं। रोटी संभव न हो तो जौ के दाने भी अर्पित किए जा सकते हैं।
सफलता में आ रही बाधाओं के लिए
मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव के सामने बैठकर इस मंत्र का 11 बार जाप करें-
'शवे भक्तिः शिवे भक्तिः शिवे भक्तिर्भवे भवे। अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम।।'
आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए
आर्थिक परेशानियों से राहत की कामना रखने वाले लोग तीन मुखी रुद्राक्ष की पूजा करके उसे धारण कर सकते हैं। इसे माला या ब्रेसलेट के रूप में भी पहना जा सकता है।
कारोबार में उन्नति के लिए
व्यापार में तरक्की की कामना से मासिक शिवरात्रि पर किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को पानी पीने का पात्र दान करने की परंपरा है। सामर्थ्य हो तो 10 लोगों को पात्र दान करें। ऐसा संभव न हो तो एक पात्र श्रद्धापूर्वक दान करके आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।
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