हमारी दिनचर्या कैसी है, हम किस तरह का भोजन करते हैं? इसका सेहत पर सीधा असर होता है। खान-पान और लाइफस्टाइल का सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि हमारे ब्रेन और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर होता है। रात में देर तक जागना, ऑफिस में लगातार बैठे रहना, शारीरिक व्यायाम कम करना, मोबाइल-लैपटॉप पर हमेशा व्यस्त रहना, ये सभी आदतें देर-सबेर हमारे लिए समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
ब्रेन हेल्थ: दिमाग की सेहत बिगाड़ रही हैं रोज की ये गलतियां, सोचने-समझने और बातचीत में भी हो सकती है परेशानी
नींद की कमी, लगातार तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और अत्यधिक स्क्रीन टाइम जैसी आदतें दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। कहीं आप भी तो ये गलतियां नहीं कर रहे हैं?
नींद की कमी का असर
नींद शरीर के साथ दिमाग के लिए भी जरूरी है। रोजाना रात में अच्छी नींद न मिलने से आपको ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, चीजों को समझने और याद रखने में परेशानी हो सकती है। अगर देर रात तक मोबाइल या दूसरी स्क्रीन देखने की आदत के कारण नींद का समय लगातार बिगड़ रहा है, तो यह समस्या और बढ़ सकती है।
- इसी तरह दिनभर बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि बहुत कम होना भी ब्रेन हेल्थ के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
- नियमित शारीरिक गतिविधि पूरे शरीर में रक्त प्रवाह को बेहतर रखने में मदद करती है और दिमाग तक भी रक्त पहुंचता है।
- रोज थोड़ी देर तेज चलना, सीढ़ियां चढ़ना या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना भी फायदेमंद हो सकता है।
तनाव का असर
तनाव कुछ समय के लिए शरीर का सामान्य प्रतिक्रिया हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव शरीर और दिमाग दोनों को प्रभावित कर सकता है।
- लगातार स्ट्रेस बने रहने के कारण नींद खराब होने, सिरदर्द और मानसिक थकान जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
- लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ा रहता है जो इंफ्लेमेशन से लेकर कई अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है जो ब्रेन के लिए नुकसानदायक मानी जाती हैं।
कब हो जाएं सावधान
अगर कभी-कभार किसी का नाम याद न आए या सामान रखकर भूल जाएं तो इसे तुरंत बीमारी नहीं माना जाता। लेकिन ध्यान केंद्रित करने में लगातार परेशानी होना, काम पूरा करने में पहले से ज्यादा समय लगना, बातचीत के दौरान सही शब्द न मिलना या रोजमर्रा के कामों में बार-बार गलती होना संकेत है कि आपको अलर्ट हो जाना चाहिए।
- ब्रेन फॉग जैसी समस्याओं में भी याददाश्त, शब्द खोजने और योजना बनाने में दिक्कत होने लगती है।
- अगर ऐसी समस्याएं लगातार बनी रहें और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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