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हाईकोर्ट: न्यायिक जांच आयोग के समक्ष रखें याचिका में उठाए गए मुद्दे, सागर शराब कांड संबंधित याचिका का निराकरण
Wed, 23 Sep 2026 05:38 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 05:38 PM IST
सार
सागर जहरीली शराब कांड की निष्पक्ष जांच की मांग वाली जनहित याचिका का हाईकोर्ट ने निराकरण कर दिया। सरकार ने बताया कि घटना की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश वीपीएस चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित किया गया है। आयोग को तीन महीने में रिपोर्ट देनी है। याचिकाकर्ता आयोग के समक्ष पक्ष रख सकेगा।
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मप्र हाईकोर्ट
विस्तार
सागर जिले में जहरीली शराब के कारण हुई लोगों की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि घटना के कारणों की जांच के लिए आयोग का गठन कर हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को जांच का दायित्व दिया गया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने उठाए गए मुद्दे को जांच आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका का निराकरण कर दिया।
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दमोह निवासी याचिकाकर्ता वैभव सिंह की तरफ से दायर याचिका में निष्पक्ष जांच व दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाही गई थी। याचिका में कहा गया था सागर जहरीले शराब कांड में लगभग तीन दर्जन व्यक्तियों की मौत हो गई है तथा कई लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ तहसील में शराब माफियों को नेटवर्क सक्रिय है। घटना से पहले संदिग्ध शराब के स्टॉक को कथित रूप से क्लीन चिट दिए जाने और पूर्व में प्राप्त शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने के संबंध में जांच आवश्यक है। जांच प्रक्रिया को किसी भी संभावित प्रशासनिक प्रभाव से मुक्त रखना आवश्यक है। याचिका में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सागर के स्थानांतरित की अंतरिम राहत चाही गई थी।
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याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से अभी तक की कार्यवाही के संबंध में ब्यौरा पेश करते हुए बताया जिला व पुलिस प्रशासन के द्वारा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। सरकार ने घटना को गंभीरता से लेते हुए न्यायिक आयोग का गठन किया है। बताया गया कि घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया गया है। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश व्हीपीएस चौहान को जांच का दायित्व सौंपा गया है। जांच के लिए तीन माह की समय सीमा निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता अपना पक्ष व शिकायत न्यायिक आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया।
