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एमपी: म्यूल अकाउंट से एटीएम तक पहुंच रही साइबर ठगी की रकम, हाईकोर्ट ने RBI को दिए अहम सुझाव

Tue, 08 Sep 2026 10:16 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 08 Sep 2026 10:16 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने साइबर ठगी की रकम म्यूल खातों से एटीएम द्वारा निकाले जाने पर चिंता जताई। कोर्ट ने RBI को बड़ी या संदिग्ध निकासी में बायोमेट्रिक, चेहरा पहचानने वाली तकनीक और अतिरिक्त प्रमाणीकरण पर विचार करने का सुझाव दिया।

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Efforts should be made to identify those who withdraw money obtained through cyber fraud.
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साइबर ठगी की रकम को म्यूल या किराये पर उपलब्ध कराए गए बैंक खातों के जरिए इधर-उधर करने और बाद में एटीएम से नकद निकाले जाने के मामले को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से बड़ी या संदिग्ध रकम एटीएम से निकालते समय व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार करने का आग्रह किया है। कोर्ट ने बायोमेट्रिक, चेहरा पहचानने वाली तकनीक या किसी अन्य विश्वसनीय पहचान माध्यम के इस्तेमाल पर विचार करने का सुझाव दिया है।

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जबलपुर निवासी चैताली मित्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि इन लोगों ने साइबर ठगी से जुड़ी रकम के लेन-देन के लिए अपने बैंक खाते किराये पर उपलब्ध कराए थे। जांच एजेंसी मुख्य आरोपी तक पहुंचने के करीब है और जांच पूरी करने के लिए समय मांगा गया है।

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कोर्ट ने कहा कि साइबर ठगी की रकम कई बैंक खातों से गुजरने के बाद म्यूल अकाउंट तक पहुंचती है और इसके बाद एटीएम से नकद निकाल ली जाती है। नकद निकासी के बाद मनी ट्रेल कमजोर पड़ जाती है और जांच एजेंसी के पास कई बार सीसीटीवी फुटेज ही सीमित साक्ष्य के रूप में बचता है।

हाईकोर्ट ने यह भी विचार करने का सुझाव दिया कि यदि खाताधारक किसी दूसरे व्यक्ति को रकम निकालने की अनुमति देता है तो इसका डिजिटल या दस्तावेजी रिकॉर्ड रखने और अतिरिक्त प्रमाणीकरण की व्यवस्था संभव है या नहीं।

जांच अधिकारियों ने बताया कि मुख्य आरोपित टेलीग्राम के जरिए लोगों से संपर्क कर उनके बैंक खाते किराये पर लेते थे। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता वीएस चौधरी और प्रियंका मिश्रा ने पक्ष रखा।

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