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चार्जशीट में देरी पर हाईकोर्ट सख्त: ईओडब्ल्यू डीजी को तलब, कोर्ट ने पूछा- इतने लंबे समय तक सोते रहे अधिकारी?

Tue, 08 Sep 2026 08:00 AM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 08 Sep 2026 08:00 AM IST
सार

अभियोजन की स्वीकृति मिलने के पांच साल बाद भी ईओडब्ल्यू द्वारा चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की युगलपीठ ने  ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल उपेंद्र जैन को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। 
 

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EOW DG Summoned High Court Expresses Anger Over Delayed Charge Sheet; Demands Explanation
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : Amar Ujala

विस्तार
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अभियोजन की स्वीकृति मिलने के पांच साल बाद भी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत नहीं किए जाने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की युगलपीठ ने दायर याचिका की सुनवाई करते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के डायरेक्टर जनरल उपेंद्र जैन को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि संबंधित अधिकारी इतने लंबे समय तक सोते रहे। अपील पर अगली सुनवाई 11 सितंबर को निर्धारित की गई है।
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छात्रों को साइकिल वितरण के लिए खातों में राशि आई थी
रायसेन जिले की बरेली तहसील में पदस्थ सहायक शिक्षक सीमा धाकड़ और उमराव धाकड़ ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को निरस्त किए जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2013 में छात्रों को साइकिल वितरण के लिए उनके खातों में राशि आई थी। संबंधित प्राचार्य ने उनके खातों से राशि निकालकर लाभार्थियों को साइकिल खरीदने के लिए नकद प्रदान कर दी थी। ईओडब्ल्यू ने प्रकरण की जांच करने के बाद उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया।
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दो दिसंबर 2021 को अभियोजन की स्वीकृति दी गई थी
प्रकरण में अन्य सह-आरोपियों का विचारण 8 अगस्त 2023 को समाप्त हो चुका है। याचिकाकर्ताओं के खिलाफ 2 दिसंबर 2021 को अभियोजन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई थी। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने अभी तक प्रकरण में आरोप पत्र तक दाखिल नहीं किया है। याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि इतनी लंबी देरी प्रथम दृष्टया जांच अधिकारी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाती है और भ्रष्टाचार की आशंका पैदा करती है। युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए जांच एजेंसी के डीजी को व्यक्तिगत हलफनामे में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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हाईकोर्ट ने डीजी द्वारा पेश हलफनामे पर असंतोष जताते हुए सवाल किया कि वर्ष 2021 में अभियोजन की स्वीकृति मिलने के बावजूद चार्जशीट दाखिल करने में वर्षों की देरी क्यों हुई। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि जांच अधिकारी प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय केवल पत्राचार क्यों करते रहे। कवरिंग लेटर और सैंक्शन लेटर की तारीखों में अंतर को लेकर चार्जशीट दाखिल नहीं करने के कानूनी आधार पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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