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एमपी में निवेश की नई उम्मीद: ग्लोबल AIM-2026 में शामिल होंगे सीएम, दुनिया के बड़े निवेशकों से करेंगे मुलाकात
Sun, 06 Sep 2026 02:56 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sun, 06 Sep 2026 02:56 PM IST
सार
मुख्यमंत्री मोहन यादव के दुबई दौरे से मध्यप्रदेश में निवेश और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद है। AIM-2026 में वे दुनिया के बड़े निवेशकों और कंपनियों से मुलाकात कर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने और प्रदेश के उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तलाशने की कोशिशों के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव 6 से 9 सितंबर तक दुबई के दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में होने वाली एआईएम कांग्रेस-2026 (Annual Investment Meeting) में शामिल होंगे। इसके साथ ही वे ‘इन्वेस्ट एमपी-2026’ के तहत दुनिया के बड़े निवेशकों और कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एआईएम कांग्रेस में दुनिया के अलग-अलग देशों की सरकारों के साथ बड़े निवेशक, कंपनियां, सोवरिन वेल्थ फंड और फैमिली ऑफिस एक मंच पर जुटते हैं। इस बार 180 से ज्यादा देशों के करीब 20 हजार प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में मध्यप्रदेश को अपनी औद्योगिक, कृषि और पर्यटन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने रखने का मौका मिलेगा।
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एआईएम कांग्रेस दुनिया के सबसे बड़े निवेश मंचों में से एक है। इसका आयोजन दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के संरक्षण में होता है। इस बार यह 7–9 सितंबर को दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में हो रहा है। पिछली बार इसमें 181 देशों के लगभग 15,800 प्रतिनिधि, 9 राष्ट्राध्यक्ष और 74 मंत्री शामिल हुए थे और 47 एमओयू हुए थे। इस बार 180 से ज्यादा देशों के करीब 20,000 प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद है। यहां सरकारें, बड़े निवेशक, सोवरिन वेल्थ फंड्स और कंपनियां एक मंच पर आकर निवेश के मौकों पर चर्चा करती हैं।
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बड़े निवेशकों-कंपनियों से सीधे होगी मुलाकात
मुख्यमंत्री मोहन यादव यह यात्रा एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष एवं यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी के आमंत्रण पर कर रहे हैं। यह यात्रा भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) 2027 की तैयारी की शुरुआत भी है। सीएम यहां बड़े निवेशकों और कंपनियों से सीधे मिलेंगे। एक ही जगह पर दुनिया भर के निवेशक मौजूद होंगे, इसलिए यह मध्यप्रदेश के लिए बड़ा और किफायती अवसर है।
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निवेश आकर्षित करने पर फोकस
बता दें, मुख्यमंत्री की यात्रा निवेश पर केंद्रित है। इसमें आमंत्रण-आधारित ‘टाइकून्स’ कार्यक्रम है, जिसमें करीब 500 सोवरिन वेल्थ फंड्स, फैमिरी ऑफिस और बड़े कारोबारी शामिल होंगे। साथ ही डीपी वर्ल्ड, वीएफएस ग्लोबल, ईएमएएआर, चोयथराम, शराफ ग्रुप केजीके जैसी कंपनियों के साथ अलग-अलग बैठकें और ‘इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश’ सत्र होंगे। मध्यप्रदेश की क्षमता के मुकाबले उसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान अभी कम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी, मध्यप्रदेश पवेलियन, ओडीओपी प्रदर्शन और मीडिया संवाद से राज्य एक ‘ग्लोबल निवेश गंतव्य’ के रूप में सामने आएगा। इससे जीआईएस-2027 की तैयारी को भी मजबूती मिलेगी।
दुबई में खाने-पीने की चीजों की कमी और मध्यप्रदेश की ताकत
दुबई अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा खाना बाहर से मंगाता है। साल 2024 में यूएई ने करीब 16.2 बिलियन डॉलर का खाद्य आयात किया, जो 2023 से 13.7% ज्यादा है। वहां की लगभग 89% आबादी प्रवासी है, जिसमें बड़ी संख्या में भारतीय हैं, इसलिए भारतीय अनाज, दाल और प्रोसेस्ड फूड की मांग लगातार बढ़ रही है। मध्यप्रदेश इस मांग को पूरा कर सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार मध्यप्रदेश दाल में देश में पहले, अनाज में दूसरे (13.04% हिस्सा), मक्का में पहले और गेहूं में दूसरे (20.78% हिस्सा) नंबर पर है। ‘सोया प्रदेश’ के नाम से मशहूर यह राज्य देश का करीब 60% सोयाबीन पैदा करता है। कार्यक्रम में लूलू ग्रुप के यूसुफ़ अली एमए के साथ बैठक इसी मौके को असली सौदों में बदलने का जरिया है।
मध्यप्रदेश के किसानों को फायदा
यह सबसे अहम बात है। दुबई जैसा पक्का निर्यात बाजार मिलने से मध्यप्रदेश के किसानों को उनकी फसल के बेहतर दाम मिलेंगे। साथ ही कोल्ड चेन, ग्रेडिंग और फूड प्रोसेसिंग में निवेश आएगा। इस बड़े बाजार का थोड़ा हिस्सा भी मिल जाए तो इसका सीधा फायदा राज्य के लाखों किसानों को होगा। दुबई शहरी और रियल-एस्टेट विकास में दुनिया का उदाहरण है। तीसरे दिन इमार के साथ बैठक और बुर्ज ख़लीफ़ा का दौरा इसी मकसद से है। मध्यप्रदेश के बड़े शहर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर, तेजी से बढ़ रहे हैं और इन्हें एफडीआई, अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर पार्टनर और अंतरराष्ट्रीय पहचान की जरूरत है। इससे इन शहरों में स्मार्ट सिटी, टाउनशिप और कमर्शियल निवेश के रास्ते खुलेंगे।
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एआईएम कांग्रेस दुनिया के सबसे बड़े निवेश मंचों में से एक है। इसका आयोजन दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के संरक्षण में होता है। इस बार यह 7–9 सितंबर को दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में हो रहा है। पिछली बार इसमें 181 देशों के लगभग 15,800 प्रतिनिधि, 9 राष्ट्राध्यक्ष और 74 मंत्री शामिल हुए थे और 47 एमओयू हुए थे। इस बार 180 से ज्यादा देशों के करीब 20,000 प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद है। यहां सरकारें, बड़े निवेशक, सोवरिन वेल्थ फंड्स और कंपनियां एक मंच पर आकर निवेश के मौकों पर चर्चा करती हैं।
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बड़े निवेशकों-कंपनियों से सीधे होगी मुलाकात
मुख्यमंत्री मोहन यादव यह यात्रा एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष एवं यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी के आमंत्रण पर कर रहे हैं। यह यात्रा भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) 2027 की तैयारी की शुरुआत भी है। सीएम यहां बड़े निवेशकों और कंपनियों से सीधे मिलेंगे। एक ही जगह पर दुनिया भर के निवेशक मौजूद होंगे, इसलिए यह मध्यप्रदेश के लिए बड़ा और किफायती अवसर है।
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निवेश आकर्षित करने पर फोकस
बता दें, मुख्यमंत्री की यात्रा निवेश पर केंद्रित है। इसमें आमंत्रण-आधारित ‘टाइकून्स’ कार्यक्रम है, जिसमें करीब 500 सोवरिन वेल्थ फंड्स, फैमिरी ऑफिस और बड़े कारोबारी शामिल होंगे। साथ ही डीपी वर्ल्ड, वीएफएस ग्लोबल, ईएमएएआर, चोयथराम, शराफ ग्रुप केजीके जैसी कंपनियों के साथ अलग-अलग बैठकें और ‘इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश’ सत्र होंगे। मध्यप्रदेश की क्षमता के मुकाबले उसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान अभी कम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी, मध्यप्रदेश पवेलियन, ओडीओपी प्रदर्शन और मीडिया संवाद से राज्य एक ‘ग्लोबल निवेश गंतव्य’ के रूप में सामने आएगा। इससे जीआईएस-2027 की तैयारी को भी मजबूती मिलेगी।
दुबई में खाने-पीने की चीजों की कमी और मध्यप्रदेश की ताकत
दुबई अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा खाना बाहर से मंगाता है। साल 2024 में यूएई ने करीब 16.2 बिलियन डॉलर का खाद्य आयात किया, जो 2023 से 13.7% ज्यादा है। वहां की लगभग 89% आबादी प्रवासी है, जिसमें बड़ी संख्या में भारतीय हैं, इसलिए भारतीय अनाज, दाल और प्रोसेस्ड फूड की मांग लगातार बढ़ रही है। मध्यप्रदेश इस मांग को पूरा कर सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार मध्यप्रदेश दाल में देश में पहले, अनाज में दूसरे (13.04% हिस्सा), मक्का में पहले और गेहूं में दूसरे (20.78% हिस्सा) नंबर पर है। ‘सोया प्रदेश’ के नाम से मशहूर यह राज्य देश का करीब 60% सोयाबीन पैदा करता है। कार्यक्रम में लूलू ग्रुप के यूसुफ़ अली एमए के साथ बैठक इसी मौके को असली सौदों में बदलने का जरिया है।
मध्यप्रदेश के किसानों को फायदा
यह सबसे अहम बात है। दुबई जैसा पक्का निर्यात बाजार मिलने से मध्यप्रदेश के किसानों को उनकी फसल के बेहतर दाम मिलेंगे। साथ ही कोल्ड चेन, ग्रेडिंग और फूड प्रोसेसिंग में निवेश आएगा। इस बड़े बाजार का थोड़ा हिस्सा भी मिल जाए तो इसका सीधा फायदा राज्य के लाखों किसानों को होगा। दुबई शहरी और रियल-एस्टेट विकास में दुनिया का उदाहरण है। तीसरे दिन इमार के साथ बैठक और बुर्ज ख़लीफ़ा का दौरा इसी मकसद से है। मध्यप्रदेश के बड़े शहर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर, तेजी से बढ़ रहे हैं और इन्हें एफडीआई, अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर पार्टनर और अंतरराष्ट्रीय पहचान की जरूरत है। इससे इन शहरों में स्मार्ट सिटी, टाउनशिप और कमर्शियल निवेश के रास्ते खुलेंगे।
