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सीट का समीकरण: 2022 में महज 836 वोट से हुआ था जसराना का फैसला; जानें कैसा है इसका पूरा चुनावी इतिहास
Sat, 05 Sep 2026 04:25 PM IST
अमन तिवारी
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 05 Sep 2026 04:25 PM IST
सार
फिरोजाबाद की जसराना विधानसभा सीट का पहला चुनाव 1952 में हुआ था। 2022 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर फैसला महज 836 वोट से हुआ, तब सपा ने भाजपा को सिर्फ 836 वोटों से हराया। आइए, इस सीट के पूरे सियासी गणित को समझते हैं...
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जसराना सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में हमारी खास सीरीज 'सीट का समीकरण' में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास...
पहले जानते हैं जसराना विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला फिरोजाबाद है। जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं। इनमें- फिरोजाबाद, टूंडला, शिकोहाबाद, जसराना और सिरसागंज शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की आज कड़ी में हम फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट की बात करेंगे। फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट 1952 में ही अस्तित्व में आ गई थी। जसराना विधानसभा के पहले विधायक विशन दयाल थे। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
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पहले जानते हैं जसराना विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला फिरोजाबाद है। जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं। इनमें- फिरोजाबाद, टूंडला, शिकोहाबाद, जसराना और सिरसागंज शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की आज कड़ी में हम फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट की बात करेंगे। फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट 1952 में ही अस्तित्व में आ गई थी। जसराना विधानसभा के पहले विधायक विशन दयाल थे। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
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जसराना विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
जसराना विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में सबसे बड़ी और निर्णायक हिस्सेदारी यादव मतदाताओं की है, जिनकी संख्या इस क्षेत्र में सबसे अधिक है। इसके बाद लोधी और राजपूत समाज के मतदाताओं की एक बड़ी आबादी है, जो चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं दलित (मुख्यतः जाटव) समाज के साथ-साथ मुस्लिम, शाक्य/कुशवाहा, ब्राह्मण और वैश्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या भी प्रभाव डालने लायक है।
जसराना विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1952 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विष्णु दयाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के भारत सिंह को 3,041 वोटों के अंतर से हराया।
जसराना विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में सबसे बड़ी और निर्णायक हिस्सेदारी यादव मतदाताओं की है, जिनकी संख्या इस क्षेत्र में सबसे अधिक है। इसके बाद लोधी और राजपूत समाज के मतदाताओं की एक बड़ी आबादी है, जो चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं दलित (मुख्यतः जाटव) समाज के साथ-साथ मुस्लिम, शाक्य/कुशवाहा, ब्राह्मण और वैश्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या भी प्रभाव डालने लायक है।
जसराना विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1952 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विष्णु दयाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के भारत सिंह को 3,041 वोटों के अंतर से हराया।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1957: पहली बार जीती कांग्रेस
इस विधानसभा चुनाव में भी फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट पर पहली बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के राम स्वरूप विजयी हुए। उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के बिष्णु दयाल को हराया।
1962: स्वतंत्र पार्टी को मिली जीत
जसराना विधानसभा सीट पर 1962 स्वतंत्र पार्टी ने अपनी पहली जीत दर्ज की। चुनाव में बलबीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार राम चंद्र सिंह को 3,598 वोटों के अंतर से हराया। बलबीर सिंह को 14,272 वोट मिले, जबकि राम चंद्र सिंह को 10,674 वोट मिले।
1967: कांग्रेस की हुई वापसी
1962 के बाद राज्य में 1967 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में रघुनाथ सिंह वर्मा विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार जे. सिंह को 1,512 वोटों के अंतर से हराया।
इस विधानसभा चुनाव में भी फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट पर पहली बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के राम स्वरूप विजयी हुए। उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के बिष्णु दयाल को हराया।
1962: स्वतंत्र पार्टी को मिली जीत
जसराना विधानसभा सीट पर 1962 स्वतंत्र पार्टी ने अपनी पहली जीत दर्ज की। चुनाव में बलबीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार राम चंद्र सिंह को 3,598 वोटों के अंतर से हराया। बलबीर सिंह को 14,272 वोट मिले, जबकि राम चंद्र सिंह को 10,674 वोट मिले।
1967: कांग्रेस की हुई वापसी
1962 के बाद राज्य में 1967 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में रघुनाथ सिंह वर्मा विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार जे. सिंह को 1,512 वोटों के अंतर से हराया।
1969: कांग्रेस ने दोहराई जीत
इसके बाद 1969 के विधानसभा चुनाव हुए, इस चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर कांग्रेस के रघुनाथ सिंह वर्मा लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल के जैदन सिंह को 1,373 वोटों के अंतर से हराया।
1974: 12 साल बाद फिर जीते बलवीर सिंह
1974 के चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल (BKD) के बलवीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के विष्णु दयाल को 3,018 वोटों के अंतर से हराया।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
इसके बाद 1969 के विधानसभा चुनाव हुए, इस चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर कांग्रेस के रघुनाथ सिंह वर्मा लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल के जैदन सिंह को 1,373 वोटों के अंतर से हराया।
1974: 12 साल बाद फिर जीते बलवीर सिंह
1974 के चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल (BKD) के बलवीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के विष्णु दयाल को 3,018 वोटों के अंतर से हराया।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
1977: तीसरी बार जीते बलवीर, इस बार जनता पार्टी के टिकट पर
इस विधानसभा चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर जनता पार्टी ने पहली बार जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार बलवीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के विष्णु दयाल को 11,437 वोटों के अंतर से हराया।
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
इस विधानसभा चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर जनता पार्टी ने पहली बार जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार बलवीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के विष्णु दयाल को 11,437 वोटों के अंतर से हराया।
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1980: 28 साल बाद फिर विष्णु दयाल
इस चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंदिरा) के विष्णु दयाल वर्मा विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के बलवीर सिंह यादव को 8,020 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विष्णु दयाल वर्मा को 32,973 वोट मिले, जबकि बलवीर सिंह यादव को 24,953 वोट मिले।
1985: बलवीर की चौथी जीत, चौथी पार्टी
1985 के विधानसभा चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर पहली बार लोक दल ने जीत दर्ज की। चुनाव में लोकदल के उम्मीदवार बलवीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के विष्णु दयाल वर्मा को 933 वोटों के अंतर से हराया। बलवीर सिंह की जसराना में ये चौथी जीत थी। हर जीत उन्होंने अलग-अलग दल से चुनाव लड़कर दर्ज की। पहली बार 1962 में स्वतंत्र पार्टी से, दूसरी बार 1974 में भारतीय क्रांति दल से, तीसरी बार 1977 में जनता पार्टी से और चौथी बार 1985 में लोकदल से।
1989: 20 साल बाद जीते रघुनाथ
1989 के विधानसभा चुनाव में फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट से कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में रघुनाथ सिंह वर्मा विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार जयदान सिंह को 2,475 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रघुनाथ सिंह वर्मा पटेल को 34,334 वोट मिले, जबकि जयदान सिंह को 31,859 वोट मिले। रघुनाथ सिंह वर्मा की जरसाना में ये तीसरी जीत थी। वे इससे पहले 1967 और 1969 में लगातार दो बार जीत दर्ज कर चुके थे।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में जसराना विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
इस चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंदिरा) के विष्णु दयाल वर्मा विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के बलवीर सिंह यादव को 8,020 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विष्णु दयाल वर्मा को 32,973 वोट मिले, जबकि बलवीर सिंह यादव को 24,953 वोट मिले।
1985: बलवीर की चौथी जीत, चौथी पार्टी
1985 के विधानसभा चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर पहली बार लोक दल ने जीत दर्ज की। चुनाव में लोकदल के उम्मीदवार बलवीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के विष्णु दयाल वर्मा को 933 वोटों के अंतर से हराया। बलवीर सिंह की जसराना में ये चौथी जीत थी। हर जीत उन्होंने अलग-अलग दल से चुनाव लड़कर दर्ज की। पहली बार 1962 में स्वतंत्र पार्टी से, दूसरी बार 1974 में भारतीय क्रांति दल से, तीसरी बार 1977 में जनता पार्टी से और चौथी बार 1985 में लोकदल से।
1989: 20 साल बाद जीते रघुनाथ
1989 के विधानसभा चुनाव में फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट से कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में रघुनाथ सिंह वर्मा विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार जयदान सिंह को 2,475 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रघुनाथ सिंह वर्मा पटेल को 34,334 वोट मिले, जबकि जयदान सिंह को 31,859 वोट मिले। रघुनाथ सिंह वर्मा की जरसाना में ये तीसरी जीत थी। वे इससे पहले 1967 और 1969 में लगातार दो बार जीत दर्ज कर चुके थे।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में जसराना विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
1991: पहली बार जीती जनता दल
इस चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर जनता दल (JD) के जयदान सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के बलवीर सिंह को 10,996 वोटों से हराया।
1993: सपा ने पहली बार जीती जसराना सीट
इसके बाद 1993 के विधानसभा चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में रामवीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुंवर पाल सिंह को 9,156 वोटों के अंतर से हराया।
1996: सपा ने दोहराई जीत
वहीं, 1996 के विधानसभा चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के रामवीर सिंह ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा की अनीता देवी को 11,587 वोटों के अंतर से हराया।
इस चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर जनता दल (JD) के जयदान सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के बलवीर सिंह को 10,996 वोटों से हराया।
1993: सपा ने पहली बार जीती जसराना सीट
इसके बाद 1993 के विधानसभा चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में रामवीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुंवर पाल सिंह को 9,156 वोटों के अंतर से हराया।
1996: सपा ने दोहराई जीत
वहीं, 1996 के विधानसभा चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के रामवीर सिंह ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा की अनीता देवी को 11,587 वोटों के अंतर से हराया।
2002: सपा और रामवीर सिंह ने लगाई जीत की हैट्रिक
1996 के बाद राज्य में 2002 में चुनाव हुए। 2002 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जसराना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के रामवीर सिंह लगातार तीसरी बार विजयी हुए। उन्होंने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के नरेश प्रसाद को 19,862 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रामवीर सिंह को 48,925 वोट मिले, जबकि नरेश प्रसाद को 29,063 वोट मिले।
2007: 1952 के बाद पहली बार निर्दलीय ने जीता चुनाव
2007 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जसराना विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार राम प्रकाश यादव विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के रामवीर सिंह को 7,813 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम प्रकाश यादव को 40,649 वोट मिले, जबकि रामवीर सिंह को 32,836 वोट मिले।
1996 के बाद राज्य में 2002 में चुनाव हुए। 2002 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जसराना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के रामवीर सिंह लगातार तीसरी बार विजयी हुए। उन्होंने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के नरेश प्रसाद को 19,862 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रामवीर सिंह को 48,925 वोट मिले, जबकि नरेश प्रसाद को 29,063 वोट मिले।
2007: 1952 के बाद पहली बार निर्दलीय ने जीता चुनाव
2007 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जसराना विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार राम प्रकाश यादव विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के रामवीर सिंह को 7,813 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम प्रकाश यादव को 40,649 वोट मिले, जबकि रामवीर सिंह को 32,836 वोट मिले।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
2012: पांच साल बाद सपा ने की वापसी
2012 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के रामवीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राम गोपाल को 28,636 वोटों के भारी अंतर से हराया। चुनाव में रामवीर सिंह को 1,04,440 वोट मिले, जबकि राम गोपाल को 75,804 वोट मिले। रामवीर सिंह की जसरान सीट पर ये चौथी जीत थी।
2017: जसराना में पहली बार जीती भाजपा
2012 के बाद राज्य में 2017 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रामगोपाल पप्पू लोधी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के शिव प्रताप सिंह को हराया। चुनाव में रामगोपाल पप्पू लोधी को 1,03,316 वोट मिले, जबकि शिव प्रताप सिंह को 82,886 वोटों से संतोष करना पड़ा।
2022: सपा ने मारी बाजी
इस चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर वापसी करते हुए जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के सचिन यादव विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मानवेंद्र प्रताप सिंह को 836 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सचिन यादव को 1,08,289 वोट मिले, जबकि मानवेंद्र प्रताप सिंह को 1,07,453 वोट मिले।
2012 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के रामवीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राम गोपाल को 28,636 वोटों के भारी अंतर से हराया। चुनाव में रामवीर सिंह को 1,04,440 वोट मिले, जबकि राम गोपाल को 75,804 वोट मिले। रामवीर सिंह की जसरान सीट पर ये चौथी जीत थी।
2017: जसराना में पहली बार जीती भाजपा
2012 के बाद राज्य में 2017 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में जसराना विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रामगोपाल पप्पू लोधी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के शिव प्रताप सिंह को हराया। चुनाव में रामगोपाल पप्पू लोधी को 1,03,316 वोट मिले, जबकि शिव प्रताप सिंह को 82,886 वोटों से संतोष करना पड़ा।
2022: सपा ने मारी बाजी
इस चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर वापसी करते हुए जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के सचिन यादव विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मानवेंद्र प्रताप सिंह को 836 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सचिन यादव को 1,08,289 वोट मिले, जबकि मानवेंद्र प्रताप सिंह को 1,07,453 वोट मिले।