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Hindi News ›   India News ›   Major Shift: ABVP captures SFI stronghold after 40 years, winning all seats at Kerala's Tripunithura College.

बड़ा बदलाव: 40 साल बाद एसएफआई के गढ़ में एबीवीपी का कब्जा, केरल के त्रिपुनिथुरा कॉलेज की सभी सीटें जीतीं

Tue, 22 Sep 2026 10:38 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Tue, 22 Sep 2026 10:38 AM IST
सार

केरल के त्रिपुनिथुरा कॉलेज में एबीवीपी ने छात्रसंघ चुनाव में सभी प्रमुख सीटों पर जीत दर्ज की। इसके साथ ही कॉलेज में करीब 40 साल से चले आ रहे एसएफआई के दबदबे का अंत हो गया। एबीवीपी ने इस जीत को छात्रहित और संगठन के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।

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Major Shift: ABVP captures SFI stronghold after 40 years, winning all seats at Kerala's Tripunithura College.
एबीवीपी ने जीत दर्ज की - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भाजपा की वैचारिक जनक संस्था आरएसएस की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने त्रिपुनिथुरा सरकारी संस्कृत कॉलेज के संघ पर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से नियंत्रण हासिल कर लिया है। एबीवीपी ने कॉलेज संघ चुनावों में सभी सीटें जीतकर यह उपलब्धि दर्ज की है। इस परिणाम के साथ केरल में एसएफआई के गढ़ माने जाने वाले इस कॉलेज में वर्षों से चले आ रहे एसएफआई का दबदबा खत्म हो गया है।

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चार दशकों के दबदबा का किया अंत
एसएफआई कई वर्षों से कॉलेज यूनियन का संचालन कर रही थी, लेकिन इस बार एबीवीपी ने चुनाव में शानदार जीत हासिल करते हुए सभी छह प्रमुख पदों पर कब्जा कर लिया। यह जीत क्षेत्र में एक और राजनीतिक बदलाव के तुरंत बाद आई है। हाल ही में भाजपा ने त्रिपुनिथुरा नगरपालिका का कार्यभार संभाला है, जिससे स्थानीय निकाय में 45 वर्षों के वामपंथी शासन का अंत हुआ है। एबीवीपी ने अब कैंपस में भी इसी तरह की सफलता हासिल की है। एक ऐसे कॉलेज में जो चार दशकों से अधिक समय तक वामपंथी नियंत्रण में रहा था।
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एबीवीपी ने एसएफआई पर क्या आरोप लगाए? 
एबीवीपी ने इस नतीजे को एसएफआई की छात्र-विरोधी नीतियों को नकारने जैसा बताया। संगठन के एक प्रतिनिधि ने कहा कि इस कॉलेज में मिली जीत से केरल के कैंपस में मौजूद एबीवीपी की दूसरी यूनिट्स को भी काफी बढ़ावा मिलेगा।
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प्रतिनिधि ने एसएफआई के नेतृत्व वाली पिछली यूनियनों पर संस्कृत को बढ़ावा न देने का आरोप भी लगाया। छात्रों से इकट्ठा किए गए फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि एसएफआई के कार्यकाल के दौरान छात्रों के लिए पर्याप्त कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए।

किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी? 
स्निग्धा एम हरि अध्यक्ष चुनी गईं। वहीं, आदित्य टीए उपाध्यक्ष बने। विग्नेश भट्ट महासचिव, विग्नेश डी पत्रिका संपादक और अंजली टी कला क्लब की सचिव चुनी गईं। निवेद्या केएन ने विश्वविद्यालय संघ पार्षद का पद जीता, जबकि शिवानी आर और अवनी सीबी क्रमशः द्वितीय स्नातक प्रतिनिधि और द्वितीय स्नातकोत्तर प्रतिनिधि चुनी गईं।

इस जीत के क्या मायने है? 
एबीवीपी के लिए, त्रिपुनिथुरा में उस कॉलेज में शानदार जीत हासिल करना, जहां वर्षों से एसएफआई का दबदबा रहा था। एक बड़ी संगठनात्मक सफलता मानी जा रही है। इस परिणाम से केरल के कैंपस में छात्र समूहों के बीच राजनीतिक स्थान के लिए चल रही व्यापक प्रतिस्पर्धा में एबीवीपी को नई गति भी मिली है।
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