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क्रूड ऑयल महंगा: दवाओं के कच्चे माल के दाम दोगुना, उद्योगपति बोले- घाटा उठाकर पुराने ऑर्डर कर रहे पूरे
Sun, 01 Nov 2026 09:33 AM IST
Ankesh Dogra
ओमपाल सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, बद्दी (सोलन)।
ओमपाल सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, बद्दी (सोलन)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 01 Nov 2026 09:33 AM IST
सार
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दवाओं के कच्चे माल, प्लास्टिक बोतलों, ढक्कनों और पैकेजिंग सामग्री के दाम में भारी उछाल आया है। पढ़ें पूरी खबर...
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क्रूड ऑयल का भाव 5,500 से बढ़कर 9,500 रुपये प्रति बैरल हुआ।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
कच्चे तेल के दाम बढ़ने से दवाओं के कच्चे माल की कीमतें दोगुना हो गई हैं। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे उद्योगों पर पड़ा है। जिन उद्योगों ने पहले से ऑर्डर ले रखे हैं, उन्हें पूरा करने के लिए घाटा उठाना पड़ रहा है। पिछले वर्ष दिसंबर में क्रूड ऑयल के दाम 5,500 रुपये प्रति बैरल थे, जो इस वर्ष बढ़कर 9,500 रुपये प्रति बैरल हो गए हैं। तेल के दाम बढ़ने से दवा उद्योग प्रभावित हुआ है। प्लास्टिक दाने, बोतलें, ढक्कन, पीवीसी प्रिंटिंग फिल्म और एल्युमिनियम फॉइल के साथ-साथ डीजल-पेट्रोल के दाम भी बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर दवाओं के कच्चे माल की कीमतों पर पड़ा है।
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प्रदेश में करीब 500 दवा उद्योग हैं। कच्चे माल के दाम दोगुना होने से डीपीसीओ (ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर) के दायरे में नहीं आने वाली दवाओं की कीमतें बाजार में बढ़नी शुरू हो गई हैं। खाली बोतलों की कीमत पहले 125 रुपये प्रति किलो थी, जो अब 215 रुपये प्रति किलो हो गई है। ढक्कन की कीमत पहले 40 पैसे थी, जो अब 70 पैसे हो गई है। इसी तरह पीवीसी प्रिंटिंग फिल्म की कीमत 400 रुपये से बढ़कर 650 रुपये प्रति किलो और एल्युमिनियम फॉइल की कीमत 380 रुपये से बढ़कर 550 रुपये प्रति किलो हो गई है।
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भारतीय उद्योग संघ के प्रदेश अध्यक्ष चिरंजीव ठाकुर और बद्दी के दवाई के उत्पादक सुरेश कुमार गर्ग ने बताया कि पहले दवाई का जो एक पत्ता 35 रुपये आता था वह अब बढ़कर 50 रुपये हो गया है। जिन दवा उद्योगों ने पहले ही ऑर्डर ले रखे हैं, उनके लिए अब उन्हें पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
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पैरासिटामोल का कच्चा माल 250 से 500 रुपये किलो पहुंचा
पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत पहले 250 रुपये किलो थी, जो अब 500 रुपये हो गई है। निमोस्लाइड का कच्चा माल पहले 550 रुपये प्रति किलो था, जो अब 1,000 रुपये हो गया है। प्रोपलीन ग्लाइकोल की कीमत 125 से बढ़कर 255 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। चीनी की कीमत पहले 4,000 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो अब बढ़कर 6,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है।
डीपीसीओ के दायरे में आने वाली दवाओं की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण होता है। इन दवाओं की कीमतें सरकार की ओर से निर्धारित की जाती है। अन्य दवाओं के दाम बाजार की मांग और परिस्थितियों के अनुसार घटते-बढ़ते रहते हैं। -डॉ. मनीष कपूर, राज्य औषधि नियंत्रक
पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत पहले 250 रुपये किलो थी, जो अब 500 रुपये हो गई है। निमोस्लाइड का कच्चा माल पहले 550 रुपये प्रति किलो था, जो अब 1,000 रुपये हो गया है। प्रोपलीन ग्लाइकोल की कीमत 125 से बढ़कर 255 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। चीनी की कीमत पहले 4,000 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो अब बढ़कर 6,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है।
डीपीसीओ के दायरे में आने वाली दवाओं की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण होता है। इन दवाओं की कीमतें सरकार की ओर से निर्धारित की जाती है। अन्य दवाओं के दाम बाजार की मांग और परिस्थितियों के अनुसार घटते-बढ़ते रहते हैं। -डॉ. मनीष कपूर, राज्य औषधि नियंत्रक