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Mandi News: भर्ती व्यवस्था बदलने पर विद्यार्थी परिषद ने सरकार को घेरा
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तरनवीर बोले, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से समझौता मंजूर नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी इकाई ने प्रदेश सरकार की आलोचना की है। इकाई अध्यक्ष तरनवीर सिंह ने कहा कि सरकार पारदर्शिता के नाम पर विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वायत्तता कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति केवल लिखित परीक्षा के आधार पर नहीं हो सकती। शिक्षक के चयन में शैक्षणिक योग्यता, शोध, प्रकाशन, विषय ज्ञान और अनुभव भी महत्वपूर्ण हैं। यूजीसी की व्यवस्था में विषय विशेषज्ञों वाली चयन समिति का प्रावधान है।
तरनवीर ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में एचपीयू, सरदार पटेल विश्वविद्यालय और कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालयों में शिक्षक भर्ती में 80 प्रतिशत अंक अकादमिक योग्यता और 20 प्रतिशत साक्षात्कार के आधार पर हैं। आवेदन और अकादमिक अंकों की प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी है। ऐसे में पूरी भर्ती व्यवस्था बदलने की जरूरत क्यों पड़ी, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। सरकार ओडिशा और पंजाब में सामने आए अनुभवों से सीख ले। विश्वविद्यालय सरकारी विभाग नहीं हैं। परिषद विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से समझौता स्वीकार नहीं करेगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी इकाई ने प्रदेश सरकार की आलोचना की है। इकाई अध्यक्ष तरनवीर सिंह ने कहा कि सरकार पारदर्शिता के नाम पर विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वायत्तता कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति केवल लिखित परीक्षा के आधार पर नहीं हो सकती। शिक्षक के चयन में शैक्षणिक योग्यता, शोध, प्रकाशन, विषय ज्ञान और अनुभव भी महत्वपूर्ण हैं। यूजीसी की व्यवस्था में विषय विशेषज्ञों वाली चयन समिति का प्रावधान है।
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तरनवीर ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में एचपीयू, सरदार पटेल विश्वविद्यालय और कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालयों में शिक्षक भर्ती में 80 प्रतिशत अंक अकादमिक योग्यता और 20 प्रतिशत साक्षात्कार के आधार पर हैं। आवेदन और अकादमिक अंकों की प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी है। ऐसे में पूरी भर्ती व्यवस्था बदलने की जरूरत क्यों पड़ी, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। सरकार ओडिशा और पंजाब में सामने आए अनुभवों से सीख ले। विश्वविद्यालय सरकारी विभाग नहीं हैं। परिषद विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से समझौता स्वीकार नहीं करेगी।
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