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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Major Decision: Himachal High Court stays recovery of contract employees' salaries

बड़ा फैसला: अनुबंध कर्मचारियों के वेतन की रिकवरी पर हिमाचल हाईकोर्ट की रोक, कहा- अतिरिक्त राशि वसूल नहीं सकते

Wed, 23 Sep 2026 09:56 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 23 Sep 2026 09:56 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध कर्मचारियों के वेतन संशोधन और अतिरिक्त भुगतान की रिकवरी से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कर्मचारियों को दिए अतिरिक्त वेतन की रिकवरी पर रोक लगा दी है। 

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Major Decision: Himachal High Court stays recovery of contract employees' salaries
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध कर्मचारियों के वेतन संशोधन और अतिरिक्त भुगतान की रिकवरी से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कर्मचारियों को दिए अतिरिक्त वेतन की रिकवरी पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि यदि प्रशासनिक गलती या टाइपिंग की त्रुटि के कारण किसी कर्मचारी को तय नियमों से अधिक वेतनमान दे दिया गया है, तो प्रदेश सरकार को उस गलती को सुधारने और नियमों के तहत आगे से वेतनमान घटाने का पूरा अधिकार है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें कर्मचारियों की कोई धोखाधड़ी या गलती नहीं थी, इसलिए उनसे अतिरिक्त राशि की वसूली नहीं की जा सकती। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने यह आदेश ज्योति शर्मा और अन्य की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए दिया। मामले के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2013 के विज्ञापन के तहत एडवोकेट जनरल कार्यालय में जूनियर स्केल स्टेनो (अनुबंध आधार) के पद के लिए आवेदन किया था। विज्ञापन और वर्ष 2014 के नियुक्ति पत्र में उनका वेतनमान 10,300-34,800+3,200 ग्रेड पे के साथ 13,500 प्रति माह तय किया गया था।

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विभाग को एक साल बाद पता चली गलती
लगभग एक साल बाद विभाग को अपनी गलती का पता चला। विभाग ने पाया कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों और पूर्व शुद्धिपत्र के अनुसार इस पद का सही वेतनमान 5,910-20,200 रुपये + 2,800 रुपये ग्रेड पे के साथ 8,710 रुपये प्रति माह था। विभाग ने 6 नवंबर 2015 को शुद्धिपत्र जारी कर वेतन 13,500 रुपये से घटाकर 8,710 रुपये कर दिया। इसके बाद 28 नवंबर 2015 को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूर्व में किए गए अतिरिक्त भुगतान की रिकवरी का आदेश दिया गया। इसके खिलाफ कर्मचारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

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हाटी मामले में 13 अक्तूबर को होगी अंतिम सुनवाई
वहीं प्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को सिरमौर जिले के ट्रांसगिरी क्षेत्र के हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश भूपेश शर्मा की अदालत ने इस मामले को अंतिम सुनवाई व विचार-विमर्श के लिए 13 अक्तूबर 2026 को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से दायर संशोधन आवेदन को स्वीकार कर लिया है। यह आवेदन हालिया घटनाक्रमों को देखते हुए याचिका की मुख्य प्रार्थना में संशोधन के लिए दायर किया गया था। याचिका का मुख्य आधार संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 में किए गए संशोधन को चुनौती देना ही बना रहेगा। अदालत ने माना कि संशोधन से याचिका के मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं आएगा, इसलिए नए जवाब दायर करने की आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने संशोधित याचिका को आधिकारिक रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश दिया है।

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