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Rewari News: राहत... लुवास भेजे गए 30 सैंपलों की रिपोर्ट निगेटिव, लंपी का खतरा बरकरार
Sun, 06 Sep 2026 11:18 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:18 PM IST
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सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश में दिखाई दे रहे संक्रमण के लक्षण। संवाद
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रेवाड़ी। जिले में गोवंशों में लंपी संक्रमण का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब तक 30 से अधिक गांवों तक संक्रमण पहुंच चुका है और 250 गोवंश इसकी चपेट में आ चुके हैं। राहत की बात यह है कि जिले में अब लंपी का कोई एक्टिव केस नहीं है। पिछले सप्ताह लुवास की टीम की ओर से लिए गए 30 सैंपलों की रिपोर्ट भी निगेटिव आई है।
कई गांवों में गोवंश के शरीर पर गांठें, बुखार, सुस्ती और चारा खाने में कमी जैसे लक्षण सामने आने की बात पशुपालक कह रहे हैं। किसानों का आरोप है कि गांवों में संदिग्ध पशुओं की संख्या विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। कई पशुपालक निजी पशु चिकित्सकों से अपने पशुओं का उपचार करा रहे हैं।
पशुपालन विभाग ने संक्रमण की रोकथाम के लिए अपनी टीमों को अलर्ट किया है। विभाग के 51 पशु अस्पतालों की टीमें गांव-गांव पहुंचकर संदिग्ध पशुओं की जांच और उपचार कर रही हैं।
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जिले में अभी भी 50 से अधिक राजस्थानी चरवाहों के झुंड घूम रहे हैं। इनमें कुछ पशुओं में लंपी जैसे लक्षण दिखाई देने की सूचना है। इसके अलावा शहर और गांवों में घूमने वाले बेसहारा गोवंश में भी लक्षण मिलने से संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है।
सहारनवास, रेवाड़ी शहरी क्षेत्र, खोरी, टूमना, बावल, डहीना, नीमोठ, ततारपुर, गोठड़ा, कंवाली, नांगलमूंदी, कृष्णा नगर और गुजरवास समेत कई क्षेत्रों में समस्या अधिक बताई जा रही है। विभाग के अनुसार जुलाई और अगस्त के दौरान लिए गए सैंपलों में 250 पशुओं में लंपी संक्रमण की पुष्टि हुई थी। अब सभी संक्रमित पशु रिकवर हो चुके हैं।
पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी
विभाग ने गोशाला संचालकों और पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी कर संक्रमित या संदिग्ध पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने, पशुशाला की साफ-सफाई करने और मक्खी-मच्छरों से बचाव के उपाय करने की सलाह दी है। जिले में 50 हजार से अधिक पशुओं का टीकाकरण हो चुका है और 55 हजार पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य सोमवार तक पूरा होने की उम्मीद है।
किसान बोले-जांच का दायरा बढ़ाया जाए
डहीना निवासी पशुपालक राजेंद्र यादव व बिजेंद्र कुमार, कंवाली निवासी यशपाल खोला, नीमोठ निवासी विकास कुमार और गुजरवास निवासी रामअवतार ने बताया कि उनके पशुओं में शरीर पर गांठें और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं। उनका कहना है कि गांवों में अन्य पशुओं में भी ऐसे लक्षण नजर आ रहे हैं। किसानों ने विभाग से प्रत्येक संदिग्ध पशु की नियमित जांच कराने की मांग की है।
वर्जन:
पशुओं की त्वचा पर गांठें, बुखार, आंख या नाक से पानी आने या कमजोरी जैसे लक्षण नजर आने पर पशुपालकों को पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। संदिग्ध पशु को अलग रखकर उसकी आवाजाही रोकें। बाहर से आने वाले पशुओं के झुंडों की निगरानी रखी जा रही है। जिले के सभी 250 मामले रिकवर हो चुके हैं और 30 सैंपलों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। 50 हजार से अधिक पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। - डॉ. विनोद कुमार यादव, उप निदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, रेवाड़ी
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कई गांवों में गोवंश के शरीर पर गांठें, बुखार, सुस्ती और चारा खाने में कमी जैसे लक्षण सामने आने की बात पशुपालक कह रहे हैं। किसानों का आरोप है कि गांवों में संदिग्ध पशुओं की संख्या विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। कई पशुपालक निजी पशु चिकित्सकों से अपने पशुओं का उपचार करा रहे हैं।
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पशुपालन विभाग ने संक्रमण की रोकथाम के लिए अपनी टीमों को अलर्ट किया है। विभाग के 51 पशु अस्पतालों की टीमें गांव-गांव पहुंचकर संदिग्ध पशुओं की जांच और उपचार कर रही हैं।
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जिले में अभी भी 50 से अधिक राजस्थानी चरवाहों के झुंड घूम रहे हैं। इनमें कुछ पशुओं में लंपी जैसे लक्षण दिखाई देने की सूचना है। इसके अलावा शहर और गांवों में घूमने वाले बेसहारा गोवंश में भी लक्षण मिलने से संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है।
सहारनवास, रेवाड़ी शहरी क्षेत्र, खोरी, टूमना, बावल, डहीना, नीमोठ, ततारपुर, गोठड़ा, कंवाली, नांगलमूंदी, कृष्णा नगर और गुजरवास समेत कई क्षेत्रों में समस्या अधिक बताई जा रही है। विभाग के अनुसार जुलाई और अगस्त के दौरान लिए गए सैंपलों में 250 पशुओं में लंपी संक्रमण की पुष्टि हुई थी। अब सभी संक्रमित पशु रिकवर हो चुके हैं।
पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी
विभाग ने गोशाला संचालकों और पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी कर संक्रमित या संदिग्ध पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने, पशुशाला की साफ-सफाई करने और मक्खी-मच्छरों से बचाव के उपाय करने की सलाह दी है। जिले में 50 हजार से अधिक पशुओं का टीकाकरण हो चुका है और 55 हजार पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य सोमवार तक पूरा होने की उम्मीद है।
किसान बोले-जांच का दायरा बढ़ाया जाए
डहीना निवासी पशुपालक राजेंद्र यादव व बिजेंद्र कुमार, कंवाली निवासी यशपाल खोला, नीमोठ निवासी विकास कुमार और गुजरवास निवासी रामअवतार ने बताया कि उनके पशुओं में शरीर पर गांठें और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं। उनका कहना है कि गांवों में अन्य पशुओं में भी ऐसे लक्षण नजर आ रहे हैं। किसानों ने विभाग से प्रत्येक संदिग्ध पशु की नियमित जांच कराने की मांग की है।
वर्जन:
पशुओं की त्वचा पर गांठें, बुखार, आंख या नाक से पानी आने या कमजोरी जैसे लक्षण नजर आने पर पशुपालकों को पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। संदिग्ध पशु को अलग रखकर उसकी आवाजाही रोकें। बाहर से आने वाले पशुओं के झुंडों की निगरानी रखी जा रही है। जिले के सभी 250 मामले रिकवर हो चुके हैं और 30 सैंपलों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। 50 हजार से अधिक पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। - डॉ. विनोद कुमार यादव, उप निदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, रेवाड़ी

सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश में दिखाई दे रहे संक्रमण के लक्षण। संवाद