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पंचकूला में स्कूली छात्रा से मारपीट: दो शिक्षक निलंबित, क्या बोले शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा?
Sat, 31 Oct 2026 09:47 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sat, 31 Oct 2026 09:47 PM IST
सार
शिक्षा विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी 24 घंटे में और जिला प्रशासन की पांच सदस्यीय कमेटी सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी। जांच में स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने के साथ सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की भी पड़ताल होगी।
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निलंबित
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
पंचकूला के सरकारी स्कूल में छह वर्षीय बच्ची पर आठ वर्षीय बच्चे के हमले के मामले में हरियाणा सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बच्ची की कक्षा इंचार्ज सिमरनजीत और हमला करने वाले बच्चे की कक्षा इंचार्ज पूजा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के निर्देश पर घटना की जांच के लिए दो कमेटियां गठित की गई हैं।
शिक्षा विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी 24 घंटे में और जिला प्रशासन की पांच सदस्यीय कमेटी सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी। जांच में स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने के साथ सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की भी पड़ताल होगी। सरकार पीजीआई चंडीगढ़ में उपचाराधीन बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी। परिवार की सहायता के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी भी नियुक्त किया गया है।
मौलिक शिक्षा निदेशक मनिता मलिक के आदेश पर दोनों अध्यापिकाओं को निलंबित किया गया है। वहीं, माध्यमिक शिक्षा की प्रधानाचार्य होने के नाते उनके खिलाफ जांच और कार्रवाई के लिए निदेशक जितेंद्र दहिया को पत्र भेजा गया है।
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बाल संरक्षण आयोग ने भी मांगी रिपोर्ट, बच्ची की हालत खतरे से बाहर
हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर पंचकूला के जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने 28 अक्तूबर की घटना की परिस्थितियों, स्कूल में निगरानी व्यवस्था, तत्काल उठाए गए कदमों, सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रोस्टर का ब्योरा मांगा है। आयोग की अध्यक्ष त्रिप्ति हरिपाल श्योराण ने शनिवार को पीजीआई पहुंचकर बच्ची के परिजनों से मुलाकात की। बच्ची के चेहरे और नाक में फ्रैक्चर सहित गंभीर चोटें आई हैं। उसकी जान को फिलहाल खतरा नहीं है। आयोग ने शारीरिक उपचार के साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।
स्कूल के अंदर बच्चों के बीच हुई दुखद घटना संज्ञान में आते ही अधिकारियों को निदेशालय स्तर पर समिति बनाकर तत्काल जांच और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। लापरवाही करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। -महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री
सीसीटीवी फुटेज से तय होगी जवाबदेही
निदेशालय स्तर पर गठित कमेटी की अध्यक्षता उप निदेशक एवं एचसीएस अधिकारी शिल्पी पात्र करेंगी। इसमें सहायक निदेशक अनिल दलाल और उप जिला अटॉर्नी (विधिक) सदस्य होंगे। कमेटी सीसीटीवी कैमरों, स्कूल में निगरानी व्यवस्था, स्टाफ की तैनाती, शिक्षकों और प्रधानाचार्य की भूमिका तथा स्कूल कमेटियों की ऑडिट रिपोर्ट की जांच करेगी।
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शिक्षा विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी 24 घंटे में और जिला प्रशासन की पांच सदस्यीय कमेटी सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी। जांच में स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने के साथ सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की भी पड़ताल होगी। सरकार पीजीआई चंडीगढ़ में उपचाराधीन बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी। परिवार की सहायता के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी भी नियुक्त किया गया है।
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मौलिक शिक्षा निदेशक मनिता मलिक के आदेश पर दोनों अध्यापिकाओं को निलंबित किया गया है। वहीं, माध्यमिक शिक्षा की प्रधानाचार्य होने के नाते उनके खिलाफ जांच और कार्रवाई के लिए निदेशक जितेंद्र दहिया को पत्र भेजा गया है।
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बाल संरक्षण आयोग ने भी मांगी रिपोर्ट, बच्ची की हालत खतरे से बाहर
हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर पंचकूला के जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने 28 अक्तूबर की घटना की परिस्थितियों, स्कूल में निगरानी व्यवस्था, तत्काल उठाए गए कदमों, सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रोस्टर का ब्योरा मांगा है। आयोग की अध्यक्ष त्रिप्ति हरिपाल श्योराण ने शनिवार को पीजीआई पहुंचकर बच्ची के परिजनों से मुलाकात की। बच्ची के चेहरे और नाक में फ्रैक्चर सहित गंभीर चोटें आई हैं। उसकी जान को फिलहाल खतरा नहीं है। आयोग ने शारीरिक उपचार के साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।
स्कूल के अंदर बच्चों के बीच हुई दुखद घटना संज्ञान में आते ही अधिकारियों को निदेशालय स्तर पर समिति बनाकर तत्काल जांच और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। लापरवाही करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। -महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री
सीसीटीवी फुटेज से तय होगी जवाबदेही
निदेशालय स्तर पर गठित कमेटी की अध्यक्षता उप निदेशक एवं एचसीएस अधिकारी शिल्पी पात्र करेंगी। इसमें सहायक निदेशक अनिल दलाल और उप जिला अटॉर्नी (विधिक) सदस्य होंगे। कमेटी सीसीटीवी कैमरों, स्कूल में निगरानी व्यवस्था, स्टाफ की तैनाती, शिक्षकों और प्रधानाचार्य की भूमिका तथा स्कूल कमेटियों की ऑडिट रिपोर्ट की जांच करेगी।
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एडीसी पंचकूला की अध्यक्षता वाली दूसरी कमेटी में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, पुलिस आयुक्त की ओर से नामित पुलिस अधिकारी और विशेष शिक्षक या बाल मनोवैज्ञानिक शामिल होंगे। यह कमेटी घटना की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच करेगी। साथ ही पता लगाएगी कि घटना के समय शिक्षक और सहायक ड्यूटी पर थे या नहीं और बच्ची को प्राथमिक उपचार देने व अस्पताल पहुंचाने में कितनी देर हुई। स्कूल सुरक्षा दिशा-निर्देशों (2021) और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के पालन की भी पड़ताल होगी।
नौ साल पुरानी सुरक्षा नीति की होगी समीक्षा
घटना के बाद शिक्षा विभाग रविवार को प्रदेश के स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों की समीक्षा करेगा। जरूरत के अनुसार इनमें संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात वर्षीय प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या के बाद प्रदेश सरकार ने 15 सितंबर 2017 को स्कूल सुरक्षा विनियम जारी किए थे। इनमें सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा समितियों, कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन, बच्चों की निगरानी और सुरक्षित परिवहन के प्रावधान शामिल थे।
उधर, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य महासचिव राजेश शर्मा ने बच्चों में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति पर विशेषज्ञों से मनोवैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग की। उन्होंने मोबाइल, डिजिटल सामग्री और पारिवारिक वातावरण के बच्चों के व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा करने की भी बात कही।
नौ साल पुरानी सुरक्षा नीति की होगी समीक्षा
घटना के बाद शिक्षा विभाग रविवार को प्रदेश के स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों की समीक्षा करेगा। जरूरत के अनुसार इनमें संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात वर्षीय प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या के बाद प्रदेश सरकार ने 15 सितंबर 2017 को स्कूल सुरक्षा विनियम जारी किए थे। इनमें सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा समितियों, कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन, बच्चों की निगरानी और सुरक्षित परिवहन के प्रावधान शामिल थे।
उधर, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य महासचिव राजेश शर्मा ने बच्चों में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति पर विशेषज्ञों से मनोवैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग की। उन्होंने मोबाइल, डिजिटल सामग्री और पारिवारिक वातावरण के बच्चों के व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा करने की भी बात कही।