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एक्सक्लूसिव: पटाखों से जला था पैर, किसे पसंद है सोन पापड़ी? 'तारक मेहता..' की कास्ट ने सुनाए दिवाली के किस्से
सार
- दिवाली आते ही परिवार के साथ बिताए पल याद आने लगते हैं।
- शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के कलाकारों के पास भी इस त्योहार से जुड़े कई दिलचस्प किस्से हैं।
- अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान कलाकारों ने बदलते वक्त के साथ त्योहार मनाने के अंदाज पर भी बात की।
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तारक मेहता की कास्ट ने सुनाए दिवाली के किस्से
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमर उजाला ने पॉपुलर टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के कलाकारों से दिवाली के मौके पर खास बातचीत की। इस दौरान किसी ने पटाखों से जुड़ा अनुभव साझा किया, तो किसी को बचपन में भाई-बहन के साथ दिवाली मनाना याद आया।
फुलझड़ी को तलवार बनाकर करते थे लड़ाई
टप्पू सेना के टप्पू उर्फ नीतीश भलूनी कहते हैं, 'मैं बचपन में बहुत शरारती था। हम दोस्त फुलझड़ी को तलवार की तरह इस्तेमाल करके लड़ते थे। एक बार खेलते-खेलते मेरे दोस्त ने मुझे फुलझड़ी से मार दिया। उस वक्त परिवार के लोग भी वहां मौजूद थे। उसके बाद हमारी जो पिटाई हुई, वह मैं बता नहीं सकता।' बच्चों को सलाह देते हुए वह कहते हैं, 'शरारत जरूर करो, लेकिन इतना उत्साहित मत हो जाना कि खुद को चोट पहुंचा लो। परिवार और दोस्तों के साथ दिवाली का आनंद लो।'
नीतीश के घर में दिवाली पर हिमाचल के खास पकवान भी बनते हैं। वह बताते हैं, 'मैं मूल रूप से हिमाचल से हूं। वहां दिवाली पर पोल्डू और साकड़िया जैसे पकवान बनाए जाते हैं। बच्चे इन्हें खाने और त्योहार पर मस्ती करने के लिए बहुत एक्साइटेड रहते हैं।'
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फुलझड़ी को तलवार बनाकर करते थे लड़ाई
टप्पू सेना के टप्पू उर्फ नीतीश भलूनी कहते हैं, 'मैं बचपन में बहुत शरारती था। हम दोस्त फुलझड़ी को तलवार की तरह इस्तेमाल करके लड़ते थे। एक बार खेलते-खेलते मेरे दोस्त ने मुझे फुलझड़ी से मार दिया। उस वक्त परिवार के लोग भी वहां मौजूद थे। उसके बाद हमारी जो पिटाई हुई, वह मैं बता नहीं सकता।' बच्चों को सलाह देते हुए वह कहते हैं, 'शरारत जरूर करो, लेकिन इतना उत्साहित मत हो जाना कि खुद को चोट पहुंचा लो। परिवार और दोस्तों के साथ दिवाली का आनंद लो।'
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नीतीश के घर में दिवाली पर हिमाचल के खास पकवान भी बनते हैं। वह बताते हैं, 'मैं मूल रूप से हिमाचल से हूं। वहां दिवाली पर पोल्डू और साकड़िया जैसे पकवान बनाए जाते हैं। बच्चे इन्हें खाने और त्योहार पर मस्ती करने के लिए बहुत एक्साइटेड रहते हैं।'
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तारक मेहता की कास्ट ने सुनाए दिवाली के किस्से
- फोटो : अमर उजाला
पिंकू-गोगी, सोनू और गोली ने शेयर किए किस्से
पिंकू उर्फ अजर कहते हैं, 'दिवाली मुझे बहुत पसंद है। इस त्योहार पर हर तरफ रोशनी होती है और मुझे लाइट्स बहुत पसंद हैं। दिवाली सबके जीवन में पॉजिटिविटी और खुशियां लेकर आती है। घरों में मिठाइयां आती हैं और लोग एक-दूसरे से मिलते हैं। इसलिए यह त्योहार मेरे लिए खास है।'
गोगी उर्फ समय को शो की शूटिंग के दौरान हुआ एक हादसा याद है। वह बताते हैं, 'एक बार दिवाली की शूटिंग के दौरान पटाखे जलाते हुए मेरा पैर बुरी तरह जल गया था। उसके बाद से पटाखों को लेकर डर बैठ गया और मैंने उन्हें जलाना छोड़ दिया। हालांकि, दिवाली बहुत खूबसूरत त्योहार है। हमें खुशियां मनाने के लिए एक मौका चाहिए और दिवाली ऐसा ही मौका है।'
सोनू उर्फ खुशी माली कहती हैं, 'मुझे सोन पापड़ी पसंद है। पता नहीं लोग इसे इतना ट्रोल क्यों करते हैं। कोई ऑफर करे तो मैं जरूर खाऊंगी। वैसे, मैं मीठा ज्यादा नहीं खाती। हमारे ग्रुप में मिठाई खाने वाला एक ही इंसान है और वह गोली है, जो मेरे हिस्से की मिठाई भी खा जाता है।'
वही गोली उर्फ धर्मित तूरखिया जोड़ते है, 'मुझे मिठाई खाना बहुत पसंद है। जब भी किसी के घर मेहमान बनकर जाते हैं, वहां मिठाइयां जरूर होती हैं। दिवाली पर हम खूब मस्ती करते हैं। हम पटाखे जलाते हैं, मिठाइयां खाते हैं और खूब एन्जॉय करते हैं।'
पिंकू उर्फ अजर कहते हैं, 'दिवाली मुझे बहुत पसंद है। इस त्योहार पर हर तरफ रोशनी होती है और मुझे लाइट्स बहुत पसंद हैं। दिवाली सबके जीवन में पॉजिटिविटी और खुशियां लेकर आती है। घरों में मिठाइयां आती हैं और लोग एक-दूसरे से मिलते हैं। इसलिए यह त्योहार मेरे लिए खास है।'
गोगी उर्फ समय को शो की शूटिंग के दौरान हुआ एक हादसा याद है। वह बताते हैं, 'एक बार दिवाली की शूटिंग के दौरान पटाखे जलाते हुए मेरा पैर बुरी तरह जल गया था। उसके बाद से पटाखों को लेकर डर बैठ गया और मैंने उन्हें जलाना छोड़ दिया। हालांकि, दिवाली बहुत खूबसूरत त्योहार है। हमें खुशियां मनाने के लिए एक मौका चाहिए और दिवाली ऐसा ही मौका है।'
सोनू उर्फ खुशी माली कहती हैं, 'मुझे सोन पापड़ी पसंद है। पता नहीं लोग इसे इतना ट्रोल क्यों करते हैं। कोई ऑफर करे तो मैं जरूर खाऊंगी। वैसे, मैं मीठा ज्यादा नहीं खाती। हमारे ग्रुप में मिठाई खाने वाला एक ही इंसान है और वह गोली है, जो मेरे हिस्से की मिठाई भी खा जाता है।'
वही गोली उर्फ धर्मित तूरखिया जोड़ते है, 'मुझे मिठाई खाना बहुत पसंद है। जब भी किसी के घर मेहमान बनकर जाते हैं, वहां मिठाइयां जरूर होती हैं। दिवाली पर हम खूब मस्ती करते हैं। हम पटाखे जलाते हैं, मिठाइयां खाते हैं और खूब एन्जॉय करते हैं।'
तारक मेहता की कास्ट ने सुनाए दिवाली के किस्से
- फोटो : अमर उजाला
18 साल से सेट पर मना रही हैं दिवाली
माधवी का किरदार निभाने वाली सोनालिका जोशी के लिए भी दिवाली खास है। वह कहती हैं, 'दीयों का अपना महत्व है। उनसे पॉजिटिव एनर्जी मिलते हैं। धनतेरस से लेकर लक्ष्मी पूजन तक, इन दिनों का अपना शुभ महत्व है। मैं पिछले 18 साल से शो के सेट पर दिवाली मना रही हूं। पहले यहां शूटिंग करती हूं और फिर घर जाकर परिवार के साथ सेलिब्रेट करती हूं। अब तीन दिन की छुट्टी मिल जाती है, तो त्योहार मनाने का मौका अच्छा मिल जाता है।'
भाई के साथ सुबह छह बजे पटाखे फोड़ने का इंतजार
सोनालिका को बचपन की दिवाली भी याद आती है। वह बताती हैं, 'मैं और मेरा भाई पटाखों को लेकर बहुत एक्साइटेड रहते थे। इंतजार रहता था कि दिवाली कब आएगी और सुबह 6 बजे पटाखे कब जलाएंगे। मैं थोड़ी टॉमबॉय जैसी थी। टिकली वाले पटाखे और दिवाली की बंदूक में रोल डालकर चलाना मुझे बहुत पसंद था।'
वहीं, मंदार चंदवाडकर यानी भिड़े को दिवाली की छुट्टियों का होमवर्क याद है। वह कहते हैं, 'हमारे जमाने में दिवाली की छुट्टियों में पूरी एक किताब भरकर लिखनी होती थी। अलग-अलग ड्राइंग बनानी होती थीं और चीजें चिपकानी होती थीं। पटाखे जलाने के बाद कई बार उनमें बचा बारूद निकालकर कुछ नया बनाने की कोशिश भी करते थे।'
माधवी का किरदार निभाने वाली सोनालिका जोशी के लिए भी दिवाली खास है। वह कहती हैं, 'दीयों का अपना महत्व है। उनसे पॉजिटिव एनर्जी मिलते हैं। धनतेरस से लेकर लक्ष्मी पूजन तक, इन दिनों का अपना शुभ महत्व है। मैं पिछले 18 साल से शो के सेट पर दिवाली मना रही हूं। पहले यहां शूटिंग करती हूं और फिर घर जाकर परिवार के साथ सेलिब्रेट करती हूं। अब तीन दिन की छुट्टी मिल जाती है, तो त्योहार मनाने का मौका अच्छा मिल जाता है।'
भाई के साथ सुबह छह बजे पटाखे फोड़ने का इंतजार
सोनालिका को बचपन की दिवाली भी याद आती है। वह बताती हैं, 'मैं और मेरा भाई पटाखों को लेकर बहुत एक्साइटेड रहते थे। इंतजार रहता था कि दिवाली कब आएगी और सुबह 6 बजे पटाखे कब जलाएंगे। मैं थोड़ी टॉमबॉय जैसी थी। टिकली वाले पटाखे और दिवाली की बंदूक में रोल डालकर चलाना मुझे बहुत पसंद था।'
वहीं, मंदार चंदवाडकर यानी भिड़े को दिवाली की छुट्टियों का होमवर्क याद है। वह कहते हैं, 'हमारे जमाने में दिवाली की छुट्टियों में पूरी एक किताब भरकर लिखनी होती थी। अलग-अलग ड्राइंग बनानी होती थीं और चीजें चिपकानी होती थीं। पटाखे जलाने के बाद कई बार उनमें बचा बारूद निकालकर कुछ नया बनाने की कोशिश भी करते थे।'
तारक मेहता की कास्ट ने सुनाए दिवाली के किस्से
- फोटो : अमर उजाला
बदल गई है दिवाली मनाने की परंपरा
मंदार के मुताबिक, पहले और आज की दिवाली में काफी फर्क आ गया है। वह कहते हैं, 'पहले तिल के तेल के दीये जलाए जाते थे और घर के बड़े-बुजुर्ग पारंपरिक तरीके से सजावट करते थे। अब इलेक्ट्रॉनिक दीये आ गए हैं। पहले शंकरपाळी, चिवड़ा और सेव जैसी चीजें घर में बनती थीं, अब बाजार में सब मिल जाता है। हालांकि, दिवाली आज भी रोशनी का त्योहार है। हर तरफ सजावट देखकर अलग ही सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है।'
ये भी पढ़ें- रामायण: 'हर छोटी चीज मायने रखती है', इंद्र का रोल निभाने पर कुणाल ने जताया आभार; शूटिंग याद कर कही दिल की बात
सोशल मीडिया पर त्योहार मनाने के चलन पर मंदार कहते हैं, 'हर किसी का त्योहार मनाने का अपना तरीका है। किसी को अपनी खुशियां सोशल मीडिया पर शेयर करना अच्छा लगता है, तो किसी को बिना दिखाए त्योहार मनाने में मजा आता है। किसी को रिश्तेदारों के साथ वक्त बिताना पसंद है, तो किसी को दोस्तों के साथ। इसमें सही या गलत कुछ नहीं है। आप जिस तरह खुश रह सकते हैं, उसी तरह त्योहार मनाइए।'
मंदार के मुताबिक, पहले और आज की दिवाली में काफी फर्क आ गया है। वह कहते हैं, 'पहले तिल के तेल के दीये जलाए जाते थे और घर के बड़े-बुजुर्ग पारंपरिक तरीके से सजावट करते थे। अब इलेक्ट्रॉनिक दीये आ गए हैं। पहले शंकरपाळी, चिवड़ा और सेव जैसी चीजें घर में बनती थीं, अब बाजार में सब मिल जाता है। हालांकि, दिवाली आज भी रोशनी का त्योहार है। हर तरफ सजावट देखकर अलग ही सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है।'
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सोशल मीडिया पर त्योहार मनाने के चलन पर मंदार कहते हैं, 'हर किसी का त्योहार मनाने का अपना तरीका है। किसी को अपनी खुशियां सोशल मीडिया पर शेयर करना अच्छा लगता है, तो किसी को बिना दिखाए त्योहार मनाने में मजा आता है। किसी को रिश्तेदारों के साथ वक्त बिताना पसंद है, तो किसी को दोस्तों के साथ। इसमें सही या गलत कुछ नहीं है। आप जिस तरह खुश रह सकते हैं, उसी तरह त्योहार मनाइए।'