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एक्सप्लेनर: मध्यावधि चुनाव के बाद मजबूत डेमोक्रेट्स-कमजोर ट्रंप ने कसी कमर, अमेरिका-दुनिया पर क्या होगा असर?
Fri, 06 Nov 2026 01:01 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 06 Nov 2026 01:01 PM IST
सार
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में हार के बाद क्या ट्रंप शक्तिहीन राष्ट्रपति बन गए हैं या अब वे संसद के कामों पर रोड़ा लगाकर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए और खतरनाक होंगे? जानिए वीटो पावर, ईरान युद्ध और 2028 की रिपब्लिकन राजनीति में ट्रंप की क्या भूमिका होगी।
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अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बाद अब आगे क्या?
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) के नतीजे आ चुके हैं। अब तक जो परिणाम आए हैं, उनके हिसाब से डेमोक्रेटिक पार्टी ने संसद के दोनों सदनों, निचले सदन- प्रतिनिधि सभा और उच्च सदन- सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है। यानी विधायिका में डेमोक्रेटिक पार्टी अब रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ मजबूत हो गई। दूसरी तरफ कई राज्यों के गवर्नर और विधानसभा चुनाव में भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन को हराकर अपना शासन स्थापित किया है। अगर समग्र तौर पर देखा जाए तो अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप-रिपब्लिकन पार्टी की नीतियों के खिलाफ आवाज और डेमोक्रेटिक पार्टी की लहर के गवाह रहे।
यूं तो इन चुनावों में राष्ट्रपति की कुर्सी दांव पर नहीं थी, लेकिन इस पद के साथ मिलने वाली कई शक्तियां अब कम हो सकती हैं। दरअसल, राष्ट्रपति भले ही देश का सबसे बड़े नेता और सरकार के प्रमुख हैं, लेकिन अंततः वे सरकार की कार्यपालिका शाखा से आते हैं और इस शाखा के अधिकतर फैसले बिना संसद (विधायिका) की मंजूरी के पूरे नहीं हो सकते। ऐसे में प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत गंवाना डोनाल्ड ट्रंप के लिए कई बंदिशें लेकर आएगा।
जहां एक तरफ डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप की ताकतों को सीमित करने की तैयारी कर ली है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति भी अलग-अलग तरीकों से अपनी शक्तियों को इस्तेमाल करने का मास्टरप्लान तैयार कर चुके हैं।
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यूं तो इन चुनावों में राष्ट्रपति की कुर्सी दांव पर नहीं थी, लेकिन इस पद के साथ मिलने वाली कई शक्तियां अब कम हो सकती हैं। दरअसल, राष्ट्रपति भले ही देश का सबसे बड़े नेता और सरकार के प्रमुख हैं, लेकिन अंततः वे सरकार की कार्यपालिका शाखा से आते हैं और इस शाखा के अधिकतर फैसले बिना संसद (विधायिका) की मंजूरी के पूरे नहीं हो सकते। ऐसे में प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत गंवाना डोनाल्ड ट्रंप के लिए कई बंदिशें लेकर आएगा।
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जहां एक तरफ डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप की ताकतों को सीमित करने की तैयारी कर ली है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति भी अलग-अलग तरीकों से अपनी शक्तियों को इस्तेमाल करने का मास्टरप्लान तैयार कर चुके हैं।
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आइये जानते हैं कि अमेरिका की सियासत में हुए बदलाव के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी किस तरह संसद में अपने संख्याबल का प्रयोग करने वाली है? ट्रंप कैसे अब भी डेमोक्रेटिक पार्टी पर भारी पड़ रहे हैं और क्यों डेमोक्रेट्स बहुमत होने के बावजूद कुछ मुद्दों पर लाचार रह सकते हैं?
अमेरिका में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और 100 सदस्यीय सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हुए। अब तक आए नतीजों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में 245 सीट जीतकर बहुमत के आंकड़े (218) को पार कर लिया है। दूसरी तरफ सीनेट में भी डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत के आंकड़े (51) को पार कर चुकी है। अब तक हुई मतगणना के बाद डेमोक्रेट्स को उच्च सदन में 54 सीटें मिलने का अनुमान है।
अमेरिका में अब तक क्या रहे संसद की सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे?
अमेरिका में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और 100 सदस्यीय सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हुए। अब तक आए नतीजों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में 245 सीट जीतकर बहुमत के आंकड़े (218) को पार कर लिया है। दूसरी तरफ सीनेट में भी डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत के आंकड़े (51) को पार कर चुकी है। अब तक हुई मतगणना के बाद डेमोक्रेट्स को उच्च सदन में 54 सीटें मिलने का अनुमान है।
अमेरिका मध्यावधि चुनाव के अब तक के नतीजे।
- फोटो : अमर उजाला
अब जानें- संसद के दोनों सदनों में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स की तैयारी क्या?
संसद के दोनों सदनों (प्रतिनिधि सभा और सीनेट) में बहुमत हासिल करने के बाद, डेमोक्रेट्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नियंत्रित करने और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए जमीन तैयार करने के मकसद से एक बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है।
1. सियासी योजनाओं में क्या बदलाव कराने का मकसद
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: अगर नतीजे बने रहते हैं तो प्रतिनिधि सभा के स्पीकर हकीम जेफ्रीज की पहली प्राथमिकता रिपब्लिकन पार्टी की ओर से आम लोगों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधा- मेडिकेड में की गई कटौती को बहाल करना और अफोर्डेबल केयर एक्ट (ओबामाकेयर) की सब्सिडी को फिर से लागू करना होगी। इसके साथ ही वे दवाओं की कीमतों को सीमित करने का प्रयास करेंगे।
टैरिफ और व्यापार शुल्क रद्द करना: डेमोक्रेट्स ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापार शुल्कों, खासकर कनाडा पर लगे लेवी को वापस लेने के लिए एंड ट्रंप्स टैरिफ टैक्स एक्ट (End Trump’s Tariff Tax Act) जैसा कानून लाने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि उनका तर्क है कि इन शुल्कों ने घरेलू लागत बढ़ाई है।
ईरान युद्ध पर नियंत्रण: डेमोक्रेट्स एक ऐसा प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं, जिससे ट्रंप को या तो ईरान में युद्ध समाप्त करना पड़े या फिर कांग्रेस से अनिवार्य मंजूरी लेनी पड़े। इसके अलावा, युद्ध की फंडिंग को हताहतों और हथियारों के खुलासे की शर्तों से जोड़ने की तैयारी है।
बजट का इस्तेमाल: 11 दिसंबर को सरकारी फंडिंग की मियाद खत्म हो रही है। डेमोक्रेट्स शट डाउन टालने के लिए फरवरी या मार्च तक अस्थायी (स्टॉपगैप) फंडिंग पर सहमत होकर बाद में पूर्ण बजट चर्चाओं के दौरान अपनी प्राथमिकताओं पर रियायतें हासिल करने की कोशिश करेंगे।
हाउस ओवरसाइट कमेटी के भावी अध्यक्ष रॉबर्ट गार्सिया और ज्यूडिशियरी कमेटी के जेमी रस्किन के नेतृत्व में डेमोक्रेट्स बड़े पैमाने पर समन और सुनवाई की तैयारी कर रहे हैं।
वित्तीय फायदे और हितों के टकराव वाले मामले: डोनाल्ड ट्रंप के बेटे ट्रंप जूनियर की निवेश फर्म (1789 कैपिटल) द्वारा समर्थित कंपनी को अमेरिकी रक्षा मंत्रालय- पेंटागन की तरफ से मिले 62 करोड़ डॉलर के कर्ज और ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर के प्राइवेट इक्विटी फंड में खाड़ी देशों के अरबों डॉलर के निवेश की जांच की जाएगी।
बजट का इस्तेमाल: 11 दिसंबर को सरकारी फंडिंग की मियाद खत्म हो रही है। डेमोक्रेट्स शट डाउन टालने के लिए फरवरी या मार्च तक अस्थायी (स्टॉपगैप) फंडिंग पर सहमत होकर बाद में पूर्ण बजट चर्चाओं के दौरान अपनी प्राथमिकताओं पर रियायतें हासिल करने की कोशिश करेंगे।
2. ट्रंप प्रशासन और उनके करीबियों की आक्रामक जांच
हाउस ओवरसाइट कमेटी के भावी अध्यक्ष रॉबर्ट गार्सिया और ज्यूडिशियरी कमेटी के जेमी रस्किन के नेतृत्व में डेमोक्रेट्स बड़े पैमाने पर समन और सुनवाई की तैयारी कर रहे हैं।
वित्तीय फायदे और हितों के टकराव वाले मामले: डोनाल्ड ट्रंप के बेटे ट्रंप जूनियर की निवेश फर्म (1789 कैपिटल) द्वारा समर्थित कंपनी को अमेरिकी रक्षा मंत्रालय- पेंटागन की तरफ से मिले 62 करोड़ डॉलर के कर्ज और ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर के प्राइवेट इक्विटी फंड में खाड़ी देशों के अरबों डॉलर के निवेश की जांच की जाएगी।
अन्य जांच के दायरे: डेमोक्रेटिक पार्टी ट्रंप के क्रिप्टोकरेंसी सौदे, ट्रंप की निजी सोशल मीडिया कंपनी ट्रूथ सोशल पर शेयर बाजार में हलचल पैदा करने वाली पोस्ट्स, इसके बाद उनके समर्थकों की ओर से शेयर बाजार में खरीद-बिक्री की कवायद, कतर की ओर से दिया गया लग्जरी विमान और चंदे के बदले दी गई कथित टैरिफ छूट की पड़ताल करने पर भी ध्यान दे रही है।
इसके अलावा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए चलाए गए अभियान से पहले एलन मस्क के ग्रोक एआई चैटबॉट के इस्तेमाल के रिकॉर्ड की भी मांग की जाएगी।
इसके अलावा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए चलाए गए अभियान से पहले एलन मस्क के ग्रोक एआई चैटबॉट के इस्तेमाल के रिकॉर्ड की भी मांग की जाएगी।
3. ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की रणनीति
- डेमोक्रेट्स सीधे ट्रंप पर तीसरा महाभियोग चलाने से बच रहे हैं, क्योंकि सीनेट में उन्हें पद से हटाने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाना असंभव है। इसके बजाय, पार्टी कैबिनेट अधिकारियों पर महाभियोग चलाने पर सहमत हो रही है।
- इसमें सबसे प्रमुख निशाना रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ हैं, जिन पर कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान में सैन्य अभियान चलाने और गैर-न्यायिक हत्याओं के आरोप हैं। आगे स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर को भी निशाना बनाया जा सकता है।
4. न्यायिक और प्रशासनिक नियुक्तियों को रोकने की तैयारी
मध्यावधि चुनाव का ट्रंप की ताकत पर असर।
- फोटो : अमर उजाला
5. सरकारी सुधार और 2028 का चुनावी रोडमैप
- डेमोक्रेटिक पार्टी सांसदों के शेयर बाजार में ट्रेडिंग पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। साथ ही सरकारी ठेके हासिल करने वालों की तरफ से सत्तासीन दल को दान देने वालों (जैसे- एलन मस्क) पर भी रोक लगाने की तैयारी है।
- यूं तो ट्रंप के पास वीटो शक्ति है और डेमोक्रेट्स के पास इसे पलटने के लिए दो-तिहाई बहुमत नहीं है, लेकिन डेमोक्रेट्स की रणनीति लोकप्रिय विधेयकों को पारित कर ट्रंप को बार-बार वीटो करने के लिए मजबूर करना है, ताकि जनता के सामने रिपब्लिकन बाधाओं को उजागर कर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में बढ़त बनाई जा सके।
डेमोक्रेट्स की इन तैयारियों से निपटने की ट्रंप-रिपब्लिकन पार्टी की क्या योजना?
संसद के दोनों सदनों में बहुमत खोने के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी ने डेमोक्रेट्स के विधायी एजेंडे और जांच अभियानों को बेअसर करने के लिए एक आक्रामक प्रशासनिक रणनीति बनाई है।
ये भी पढ़ें: अमेरिकी चुनाव नतीजे: ट्रंप की शक्तियों पर अंकुश से नई दिल्ली को कुछ राहत मिली, क्या भारत के लिए कुछ बदलेगा?
1. वीटो पावर का आक्रामक इस्तेमाल (मिस्टर वीटो का दावा)
कानूनी नाकेबंदी पर जोर: डेमोक्रेट्स के पास वीटो को पलटने के लिए न तो प्रतिनिधि सभा और न ही सीनेट में जरूरी दो-तिहाई बहुमत (प्रतिनिधि सभा में 290 और सीनेट में 67 सीटें) है। इसके चलते ट्रंप ने खुद को मिस्टर वीटो घोषित किया है और स्पष्ट किया है कि डेमोक्रेट्स की ओर से पारित ऐसे किसी भी विधेयक को वे सीधे वीटो कर देंगे जो उनके एजेंडे के उलट होगा।दबाव की रणनीति: ट्रंप प्रशासन का मानना है कि वे लोकप्रिय विधेयकों पर बार-बार वीटो की धमकी देकर या प्रशासन की नीतिगत चेतावनियों के जरिए डेमोक्रेट्स को कानून में संशोधन करने या अंततः समझौते की मेज पर आने के लिए मजबूर करेंगे।
पॉकेट वीटो: संसद (कांग्रेस) के स्थगन के समय ट्रंप बिना हस्ताक्षर किए विधेयकों को रद्द करने वाले पॉकेट वीटो का उपयोग कर सकते हैं, जिसे कांग्रेस द्वारा दोबारा मतदान से भी नहीं पलटा जा सकता।
2. कार्यकारी आदेशों के जरिए एकतरफा शासन
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
3. जांच और समन से कानूनी बचाव
अतिरिक्त वकीलों की तैनाती: द टाइम की रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेट्स के जांच के लिए जारी होने वाले समन और संभावित महाभियोग का मुकाबला करने के लिए व्हाइट हाउस काउंसिल के दफ्तर ने विशेष रूप से 15 अतिरिक्त वकीलों की भर्ती कर ली है।दस्तावेजों को रोकना की तैयारी: प्रशासन जांच समितियों के सामने गोपनीय संचार और कार्यकारी विशेषाधिकार का हवाला देकर जानकारी दबाने की योजना बना रहा है। प्रशासन के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे डेमोक्रेटिक जांचों को रोकने के लिए संघीय सरकार की पूरी प्रशासनिक ताकत का इस्तेमाल करेंगे।
अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा और माफी: ट्रंप के स्टाफ सदस्यों और सहयोगियों के लिए कानूनी बीमा, निजी वकील और राष्ट्रपति की ओर से अग्रिम क्षमादान देने के विकल्पों पर व्हाइट हाउस के वकील विल शार्फ के साथ चर्चा की गई है।
कैबिनेट का बचाव: रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के संभावित महाभियोग के खिलाफ ट्रंप ने उन्हें लड़ने का निर्देश दिया है और उन्हें एक महान योद्धा बताते हुए हटाने से इनकार किया है।
4. लेम-डक सत्र में न्यायिक नियुक्तियों और बजट की सुरक्षा
न्यायाधीशों की तुरंत पुष्टि: चुनाव के बाद अब नई संसद में सदस्यों का कार्यकाल 3 जनवरी से शुरू होगा। हालांकि, इससे पहले कि दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हो जाए, उससे पहले नवंबर और दिसंबर के बचे हुए समय में रिपब्लिकन निचली अदालतों में ज्यादा से ज्यादा रूढ़िवादी संघीय न्यायाधीशों की पुष्टि कराने में जुटे हैं।आव्रजन फंड की पहले ही सुरक्षा: रिपब्लिकन पार्टी ने ट्रंप के बचे हुए कार्यकाल के लिए आव्रजन प्रवर्तन और डिपोर्टेशन अभियानों के बजट को पहले ही कानूनी रूप से सुरक्षित कर दिया है, ताकि डेमोक्रेट्स उसे रोक न सकें।
विदेश नीति संसद के प्रभाव से दूर, इस पर क्या करेंगे ट्रंप?
संसद के दोनों सदनों में बहुमत खोने के बाद घरेलू नीतियों पर गतिरोध का सामना कर रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना मुख्य ध्यान विदेश नीति और वैश्विक मंच पर केंद्रित करने की तैयारी में हैं। द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सांविधानिक व्यवस्था में विदेश नीति और सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ के रूप में राष्ट्रपति के पास व्यापक एकतरफा अधिकार होते हैं, जिन्हें संसद आसानी से नहीं रोक सकती।ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में फिर क्यों असफल हुई राष्ट्रपति की पार्टी, बीते चार चुनाव का इतिहास क्या?
1. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक सम्मेलनों में सक्रियता बढ़ाने की तैयारी
- ट्रंप अपने बचे हुए कार्यकाल में अपनी ऐतिहासिक विरासत को चमकाने और नोबेल शांति पुरस्कार हासिल करने की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के तहत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सीधे उतर सकते हैं।
- मध्यावधि चुनाव समाप्त होने के बाद, मतदाताओं की घरेलू चिंताओं से आजाद होकर ट्रंप आने वाले हफ्तों में तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लेने की योजना बना रहे हैं।
2. रूस, चीन और यूक्रेन युद्ध पर सीधी मध्यस्थता
- चीन के शेनझेन में इस महीने के अंत में राष्ट्रपति ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के समकक्ष शी जिनपिंग के बीच एक उच्चस्तरीय त्रिपक्षीय बैठक की योजना पर काम चल रहा है। संसद ट्रंप को विदेशी नेताओं के साथ सीधे बातचीत करने से नहीं रोक सकती।
- गौरतलब है कि ट्रंप ने पद संभालते ही एक दिन में यूक्रेन युद्ध समाप्त करने का वादा किया था, जो अब तक अधूरा रहा है। अमेरिका की मध्यस्थता में यूक्रेन और रूस के बीच शांति वार्ता इसी हफ्ते संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में फिर से शुरू हो रही है, जिसमें ट्रंप की सीधी भूमिका हो सकती है।
3. ईरान युद्ध को निर्णायक अंत तक पहुंचाना
- आठ महीने से चल रहा ईरान युद्ध ट्रंप के लिए भारी राजनीतिक बोझ साबित हुआ है और मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन हार का बड़ा कारण बना। चुनाव खत्म होते ही ट्रंप ने इस युद्ध को फिर से तेज करने के संकेत दिए हैं। - उनके शीर्ष सलाहकार ईरान पर नए हवाई हमलों की योजना पर विचार कर रहे हैं ताकि इस संघर्ष को एक निर्णायक अंत तक पहुंचाया जा सके।
- डेमोक्रेट्स 'वॉर पावर्स रेजोल्यूशन' और बजट शर्तों के जरिए युद्ध को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप पहले भी गैर-बाध्यकारी प्रस्तावों को नजरअंदाज कर चुके हैं और वे बिना संसदीय मंजूरी के हवाई हमलों के आदेश जारी रख सकते हैं।
4. एकतरफा आयात शुल्क और आर्थिक प्रतिबंध
- ट्रंप को व्यापार शुल्क लगाने या बदलने और अन्य देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत नहीं होती।
- डेमोक्रेट्स भले ही कनाडा और अन्य सहयोगियों पर लगे टैरिफ को रद्द करने के लिए कानून लाएं, लेकिन ट्रंप अपनी कार्यकारी शक्तियों और आपात प्रावधानों का इस्तेमाल करके अपनी आक्रामक व्यापार नीति जारी रखने के संकेत दे रहे हैं।
विदेश नीति पर भी रहेंगी कुछ बंदिशें।
- फोटो : अमर उजाला
नियमों के मुताबिक, सीनेट (उच्च सदन) की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति की तरफ से की गई कोई भी संधि लागू नहीं हो सकती। इसके अलावा, अमेरिकी संविधान के तहत युद्ध की औपचारिक घोषणा करने का अधिकार केवल कांग्रेस (संसद) के पास है।
तुरंत समर्थन न देने की रणनीति: ट्रंप किसी एक उम्मीदवार के नाम का तुरंत एलान करने से बच रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि जैसे ही वे किसी को अपना आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित करेंगे, पार्टी में उनका अपना प्रभाव घट जाएगा और वे पूरी तरह लेम-डक साबित हो जाएंगे। उनका कहना है कि वे 2028 की प्राइमरी दौड़ की शुरुआत देखना चाहते हैं।
अब रिपब्लिकन पार्टी की भविष्य की राजनीति में क्या होगी ट्रंप की भूमिका?
1. किंगमेकर की भूमिका में बने रहेंगे ट्रंप
उत्तराधिकारी पर चर्चा के लिए तैयार: जहां अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में वे अपने उत्तराधिकारी की चर्चा को तुरंत खारिज कर देते थे, वहीं ट्रंप अब 2028 के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। द टाइम ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकारों के हवाले से बताया कि इस पर औपचारिक और गंभीर बातचीत जनवरी से शुरू होगी।तुरंत समर्थन न देने की रणनीति: ट्रंप किसी एक उम्मीदवार के नाम का तुरंत एलान करने से बच रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि जैसे ही वे किसी को अपना आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित करेंगे, पार्टी में उनका अपना प्रभाव घट जाएगा और वे पूरी तरह लेम-डक साबित हो जाएंगे। उनका कहना है कि वे 2028 की प्राइमरी दौड़ की शुरुआत देखना चाहते हैं।
2. वेंस बनाम रूबियो की रेस में दखल नहीं
- 2024 के चुनाव में वेंस को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनते समय ट्रंप की सोच यही थी कि वे भविष्य में 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' की मशाल आगे बढ़ाएंगे। प्रेडिक्शन मार्केट्स में भी वेंस 2028 के नामांकन के लिए सबसे आगे चल रहे हैं।
- ट्रंप के करीबी सलाहकारों के मुताबिक ट्रंप की सूची में केवल वेंस नहीं हैं; विदेश मंत्री मार्को रुबियो का नाम भी मजबूती से सामने आ रहा है। रुबियो के समर्थक चाहते हैं कि ट्रंप जल्द फैसला लें, ताकि रुबियो को जनता के बीच खुद को स्थापित करने का समय मिल सके।
- इसके अलावा फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसेंटिस, जो कि 2024 के चुनाव में ट्रंप के सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी थे, वे भी 2028 के चुनाव के लिए राष्ट्रपति पद के संभावित दावेदारों में शामिल हैं।
3. पार्टी के भीतर उभरती दरारें और दूरी बनाने की कोशिशें
10 साल में पहली बार ट्रंप की नीतियों पर पार्टी के भीतर से ही खुलकर असहमति जताई जा रही है। हार के तुरंत बाद जेडी वेंस ने ट्रंप की नीतियों से दूरी बनाते हुए मध्यावधि चुनाव में हार का सीधा कारण ईरान युद्ध को बताया। डोनाल्ड ट्रंप के बेटे- डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने भी वेंस के इस रुख का समर्थन किया। खुद ट्रंप ने भी माना कि यह बात काफी हद तक सच है।
पार्टी के भावी उम्मीदवार मेक अमेरिका ग्रेट अगेन के मुख्य मतदाताओं को नाराज किए बिना ट्रंप के अलोकप्रिय फैसलों से दूरी बनाकर 2028 के लिए स्वतंत्र और मध्यमार्गी मतदाताओं का विश्वास दोबारा जीतने की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, ट्रंप संसद में अपने वीटो और कार्यकारी अधिकारों के जरिए खुद को शासन के केंद्र में रखेंगे और 2028 की प्राइमरी में पार्टी के उम्मीदवार का चयन अपनी शर्तों पर तय करने की पूरी कोशिश करेंगे।