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अमेरिका में भारतवंशियों का दबदबा: जॉर्जिया के पहले सिख विधायक बने ज्योत; रंजीव को मिशिगन में बड़ी जिम्मेदारी
Fri, 06 Nov 2026 07:54 AM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, न्यूयॉर्क
पीटीआई, न्यूयॉर्क
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 06 Nov 2026 07:54 AM IST
सार
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में भारतवंशियों ने कई राज्यों और बड़े शहरों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। ज्योत सिंह, रंजीव पुरी और नित्या रमन क्या-क्या जिम्मेदारी मिली है, अमेरिकी राजनीति में भारतवंशियों की कितनी बढ़ी भागीदारी? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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अमेरिका में भारतवंशियों का दबदबा:
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के दो नेताओं ने इतिहास रचा है। ज्योत सिंह जॉर्जिया हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुने गए हैं। वह जॉर्जिया की असेंबली में पहुंचने वाले पहले सिख बन गए हैं। वहीं, रंजीव पुरी मिशिगन हाउस के स्पीकर चुने गए हैं। वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी हैं।
ज्योत सिंह ने तीन नवंबर को हुए चुनाव में जॉर्जिया हाउस डिस्ट्रिक्ट-97 का प्रतिनिधित्व करने के लिए जीत हासिल की। येल विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर चुके सिंह राज्य की जनरल असेंबली में पहुंचने वाले पहले सिख और पहले भारतीय-अमेरिकी बन गए हैं। चुनाव में जीत के बाद सिंह ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्होंने कहा, हमने यहां हाउस डिस्ट्रिक्ट-97 में अपने समुदाय के लिए इतिहास रच दिया है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार ज्योत सिंह को चुनाव में 13,820 वोट मिले। उन्होंने कुल 68 प्रतिशत वोट हासिल किए। वहीं, उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी यासीन मोगाजी को 6,509 वोट मिले। उन्हें 32 प्रतिशत वोट मिले। इससे पहले ज्योत सिंह ने इसी साल मई में जॉर्जिया हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के डिस्ट्रिक्ट-97 के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में जैक्स लॉरेंट को हराया था।
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मिशिगन हाउस के पहले भारतवंशी स्पीकर बने रंजीव पुरी
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता रंजीव पुरी मिशिगन हाउस के स्पीकर चुने गए हैं। वह इस अहम पद पर पहुंचने वाले पहले भारतवंशी बन गए हैं। रंजीव पुरी ने गुरुवार को फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, आज मिशिगन हाउस के मेरे सहयोगियों की ओर से स्पीकर चुना जाना मेरे लिए विनम्रता और सम्मान की बात है।
रंजीव पुरी 2020 में मिशिगन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुने जाने वाले पहले सिख-अमेरिकी बने थे। उनका जन्म पंजाब से अमेरिका गए प्रवासी माता-पिता के घर हुआ था। साल 2025 में उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाले 110 सदस्यीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी का नेता नियुक्त किया गया था।
पुरी ने कहा, जब मेरे माता-पिता इस देश में आए थे, तब उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका बेटा एक दिन इतिहास रचेगा, बाधाओं को तोड़ेगा और मिशिगन हाउस का नेतृत्व करेगा। यही अमेरिका का वादा है।
पुरी ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के 2008 और 2012 के चुनाव प्रचार अभियानों में भी काम किया था। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की डिग्री हासिल की। फिर वह मिशिगन लौट आए। यहां उन्होंने ऑटोमोबाइल उद्योग में काम किया।
नित्या रमन ने लॉस एंजिलिस में रचा इतिहास
भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट नित्या रमन लॉस एंजिलिस की मेयर चुनी गई हैं। इसके साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया है। वह अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर की पहली दक्षिण एशियाई मेयर बन गई हैं।
नित्या रमन 45 साल की हैं। वह पहले लॉस एंजिलिस सिटी काउंसिल की सदस्य थीं। उन्होंने तीन नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव में मौजूदा मेयर 73 वर्षीय करेन बास को हराया। इस जीत के साथ अमेरिका के दो सबसे बड़े शहरों न्यूयॉर्क और लॉस एंजिलिस की कमान अब भारतीय मूल के मेयरों के हाथ में होगी। दोनों ही डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट हैं।
नित्या रमन ने क्या कहा?
रमन ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्होंने कहा, लॉस एंजिलिस, आपकी अगली मेयर बनना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है। उन हजारों लोगों का धन्यवाद, जिन्होंने घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया, संदेश भेजे, फोन किए और अपने पड़ोसियों को इस बड़े, खूबसूरत और खुशहाल शहर के वादे पर भरोसा करने के लिए मनाया। इस शहर को हम अपना घर कहते हैं।
रमन ने अपनी पूर्ववर्ती करेन बास को भी सम्मान दिया। उन्होंने लॉस एंजिलिस की पहली महिला मेयर के तौर पर कई दशकों तक सार्वजनिक सेवा करने के लिए उनकी सराहना की।
ये भी पढ़ें: जंग के बीच ईरान के संपर्क में था अमेरिका?: 100 से ज्यादा लोगों को भेजा तेहरान, कैसे हुआ मामले का खुलासा?
रमन ने आगे कहा, मैं हर दिन सिटी हॉल जाऊंगी। वहां काम करके आपका भरोसा जीतूंगी और इस शहर पर आपका भरोसा फिर से कायम करूंगी। यह काम अभी से शुरू हो रहा है। ताकि हम ऐसे घर बना सकें, जिन्हें लोग खरीद सकें। ऐसे पार्क बना सकें, जहां हमारे बच्चे खेल सकें। ऐसी परिवहन व्यवस्था बना सकें, जो लोगों को उनकी जरूरत की जगह तक पहुंचा सके। ऐसा शहर बना सकें, जो यहां काम करने वाले लोगों और उनके परिवारों के लिए सुरक्षित हो। साथ ही ऐसी नगर सरकार बना सकें, जो वास्तव में अपने वादों को पूरा करने में सक्षम हो।
कहां से पढ़ाई की?
केरल में जन्मीं रमन लॉस एंजिलिस सिटी काउंसिल के डिस्ट्रिक्ट-4 की सदस्य हैं। उन्होंने शहरी नियोजन की पढ़ाई की है। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से स्नातकोत्तर की डिग्री ली।
रमन उन कई भारतीय मूल के अमेरिकी उम्मीदवारों में शामिल हैं, जिन्होंने अमेरिका में मध्यावधि चुनाव में जीत हासिल की है। ये चुनाव मंगलवार को संपन्न हुए। इनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया। पूरे अमेरिका में डेमोक्रेट्स को बड़ी जीत मिली। उन्होंने कई सीटों और पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में भी जीत दर्ज की।
'इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट'ने क्या कहा?
भारतीय मूल के अमेरिकी लोगों के संगठन 'इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट' ने लॉस एंजिलिस के मेयर पद के आम चुनाव में जीत के लिए रमन को बधाई दी। यह संगठन सामुदायिक भागीदारी, नागरिक साझेदारी और उम्मीदवारों को समर्थन देकर दक्षिण एशियाई और भारतीय-अमेरिकी समुदायों को सशक्त बनाने का काम करता है।
संगठन ने कहा कि रमन देश के दूसरे सबसे बड़े शहर की पहली दक्षिण एशियाई-अमेरिकी मेयर बनेंगी। उनकी जीत कैलिफोर्निया में दक्षिण एशियाई-अमेरिकियों की बढ़ती राजनीतिक ताकत को दिखाती है। कैलिफोर्निया में दक्षिण एशियाई मूल के 10 लाख से अधिक लोग रहते हैं। यह देश में इस समुदाय की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है।
इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने एक बयान में कहा कि रमन ने किराया कम करने, तेजी से घर बनाने और शहर की सेवाओं को लॉस एंजिलिस के लोगों के लिए बेहतर बनाने के मुद्दों पर चुनाव लड़ा। मतदाताओं ने उन्हें इन वादों को पूरा करने की जिम्मेदारी दी है। पटेल ने कहा, उनकी जीत के साथ दक्षिण एशियाई-अमेरिकी अब अमेरिका के दो सबसे बड़े शहरों का नेतृत्व करेंगे।
मध्यावधि चुनाव में भारतवंशियों को कितनी सफलता मिली?
अमेरिका में करीब 55 लाख की आबादी वाले भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने मध्यावधि चुनाव में बड़ी राजनीतिक सफलता हासिल की है। इस समुदाय के कई उम्मीदवारों ने देशभर में अलग-अलग पदों के लिए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। फ्लोरिडा की पिया दांडिया और एरिजोना के अमीश शाह अमेरिकी कांग्रेस के नए भारतवंशी सदस्य होंगे। वे प्रतिनिधि अमी बेरा, प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल, प्रतिनिधि रो खन्ना और प्रतिनिधि सुहास सुब्रमण्यम के साथ कैपिटल हिल में शामिल होंगे।
किन अन्य भारतवंशी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की?
मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के कई अन्य उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की है।
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ज्योत सिंह ने तीन नवंबर को हुए चुनाव में जॉर्जिया हाउस डिस्ट्रिक्ट-97 का प्रतिनिधित्व करने के लिए जीत हासिल की। येल विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर चुके सिंह राज्य की जनरल असेंबली में पहुंचने वाले पहले सिख और पहले भारतीय-अमेरिकी बन गए हैं। चुनाव में जीत के बाद सिंह ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्होंने कहा, हमने यहां हाउस डिस्ट्रिक्ट-97 में अपने समुदाय के लिए इतिहास रच दिया है।
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डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार ज्योत सिंह को चुनाव में 13,820 वोट मिले। उन्होंने कुल 68 प्रतिशत वोट हासिल किए। वहीं, उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी यासीन मोगाजी को 6,509 वोट मिले। उन्हें 32 प्रतिशत वोट मिले। इससे पहले ज्योत सिंह ने इसी साल मई में जॉर्जिया हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के डिस्ट्रिक्ट-97 के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में जैक्स लॉरेंट को हराया था।
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मिशिगन हाउस के पहले भारतवंशी स्पीकर बने रंजीव पुरी
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता रंजीव पुरी मिशिगन हाउस के स्पीकर चुने गए हैं। वह इस अहम पद पर पहुंचने वाले पहले भारतवंशी बन गए हैं। रंजीव पुरी ने गुरुवार को फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, आज मिशिगन हाउस के मेरे सहयोगियों की ओर से स्पीकर चुना जाना मेरे लिए विनम्रता और सम्मान की बात है।
रंजीव पुरी 2020 में मिशिगन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुने जाने वाले पहले सिख-अमेरिकी बने थे। उनका जन्म पंजाब से अमेरिका गए प्रवासी माता-पिता के घर हुआ था। साल 2025 में उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाले 110 सदस्यीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी का नेता नियुक्त किया गया था।
पुरी ने कहा, जब मेरे माता-पिता इस देश में आए थे, तब उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका बेटा एक दिन इतिहास रचेगा, बाधाओं को तोड़ेगा और मिशिगन हाउस का नेतृत्व करेगा। यही अमेरिका का वादा है।
पुरी ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के 2008 और 2012 के चुनाव प्रचार अभियानों में भी काम किया था। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की डिग्री हासिल की। फिर वह मिशिगन लौट आए। यहां उन्होंने ऑटोमोबाइल उद्योग में काम किया।
नित्या रमन ने लॉस एंजिलिस में रचा इतिहास
भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट नित्या रमन लॉस एंजिलिस की मेयर चुनी गई हैं। इसके साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया है। वह अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर की पहली दक्षिण एशियाई मेयर बन गई हैं।
नित्या रमन 45 साल की हैं। वह पहले लॉस एंजिलिस सिटी काउंसिल की सदस्य थीं। उन्होंने तीन नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव में मौजूदा मेयर 73 वर्षीय करेन बास को हराया। इस जीत के साथ अमेरिका के दो सबसे बड़े शहरों न्यूयॉर्क और लॉस एंजिलिस की कमान अब भारतीय मूल के मेयरों के हाथ में होगी। दोनों ही डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट हैं।
नित्या रमन ने क्या कहा?
रमन ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्होंने कहा, लॉस एंजिलिस, आपकी अगली मेयर बनना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है। उन हजारों लोगों का धन्यवाद, जिन्होंने घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया, संदेश भेजे, फोन किए और अपने पड़ोसियों को इस बड़े, खूबसूरत और खुशहाल शहर के वादे पर भरोसा करने के लिए मनाया। इस शहर को हम अपना घर कहते हैं।
रमन ने अपनी पूर्ववर्ती करेन बास को भी सम्मान दिया। उन्होंने लॉस एंजिलिस की पहली महिला मेयर के तौर पर कई दशकों तक सार्वजनिक सेवा करने के लिए उनकी सराहना की।
ये भी पढ़ें: जंग के बीच ईरान के संपर्क में था अमेरिका?: 100 से ज्यादा लोगों को भेजा तेहरान, कैसे हुआ मामले का खुलासा?
रमन ने आगे कहा, मैं हर दिन सिटी हॉल जाऊंगी। वहां काम करके आपका भरोसा जीतूंगी और इस शहर पर आपका भरोसा फिर से कायम करूंगी। यह काम अभी से शुरू हो रहा है। ताकि हम ऐसे घर बना सकें, जिन्हें लोग खरीद सकें। ऐसे पार्क बना सकें, जहां हमारे बच्चे खेल सकें। ऐसी परिवहन व्यवस्था बना सकें, जो लोगों को उनकी जरूरत की जगह तक पहुंचा सके। ऐसा शहर बना सकें, जो यहां काम करने वाले लोगों और उनके परिवारों के लिए सुरक्षित हो। साथ ही ऐसी नगर सरकार बना सकें, जो वास्तव में अपने वादों को पूरा करने में सक्षम हो।
कहां से पढ़ाई की?
केरल में जन्मीं रमन लॉस एंजिलिस सिटी काउंसिल के डिस्ट्रिक्ट-4 की सदस्य हैं। उन्होंने शहरी नियोजन की पढ़ाई की है। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से स्नातकोत्तर की डिग्री ली।
रमन उन कई भारतीय मूल के अमेरिकी उम्मीदवारों में शामिल हैं, जिन्होंने अमेरिका में मध्यावधि चुनाव में जीत हासिल की है। ये चुनाव मंगलवार को संपन्न हुए। इनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया। पूरे अमेरिका में डेमोक्रेट्स को बड़ी जीत मिली। उन्होंने कई सीटों और पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में भी जीत दर्ज की।
'इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट'ने क्या कहा?
भारतीय मूल के अमेरिकी लोगों के संगठन 'इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट' ने लॉस एंजिलिस के मेयर पद के आम चुनाव में जीत के लिए रमन को बधाई दी। यह संगठन सामुदायिक भागीदारी, नागरिक साझेदारी और उम्मीदवारों को समर्थन देकर दक्षिण एशियाई और भारतीय-अमेरिकी समुदायों को सशक्त बनाने का काम करता है।
संगठन ने कहा कि रमन देश के दूसरे सबसे बड़े शहर की पहली दक्षिण एशियाई-अमेरिकी मेयर बनेंगी। उनकी जीत कैलिफोर्निया में दक्षिण एशियाई-अमेरिकियों की बढ़ती राजनीतिक ताकत को दिखाती है। कैलिफोर्निया में दक्षिण एशियाई मूल के 10 लाख से अधिक लोग रहते हैं। यह देश में इस समुदाय की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है।
इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने एक बयान में कहा कि रमन ने किराया कम करने, तेजी से घर बनाने और शहर की सेवाओं को लॉस एंजिलिस के लोगों के लिए बेहतर बनाने के मुद्दों पर चुनाव लड़ा। मतदाताओं ने उन्हें इन वादों को पूरा करने की जिम्मेदारी दी है। पटेल ने कहा, उनकी जीत के साथ दक्षिण एशियाई-अमेरिकी अब अमेरिका के दो सबसे बड़े शहरों का नेतृत्व करेंगे।
मध्यावधि चुनाव में भारतवंशियों को कितनी सफलता मिली?
अमेरिका में करीब 55 लाख की आबादी वाले भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने मध्यावधि चुनाव में बड़ी राजनीतिक सफलता हासिल की है। इस समुदाय के कई उम्मीदवारों ने देशभर में अलग-अलग पदों के लिए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। फ्लोरिडा की पिया दांडिया और एरिजोना के अमीश शाह अमेरिकी कांग्रेस के नए भारतवंशी सदस्य होंगे। वे प्रतिनिधि अमी बेरा, प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल, प्रतिनिधि रो खन्ना और प्रतिनिधि सुहास सुब्रमण्यम के साथ कैपिटल हिल में शामिल होंगे।
किन अन्य भारतवंशी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की?
मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के कई अन्य उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की है।
- मनोज चौरसिया न्यू हैम्पशायर स्टेट हाउस के लिए दोबारा चुने गए हैं।
- दर्शना पटेल ने कैलिफोर्निया स्टेट असेंबली में फिर से जीत दर्ज की है।
- रंजीव पुरी मिशिगन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए दोबारा चुने गए हैं।
- डेमोक्रेट्स के फिर से सदन पर नियंत्रण हासिल करने के बाद रंजीव पुरी को मिशिगन का अगला स्पीकर बनाए जाने की उम्मीद है। ऐसा होने पर वह अमेरिका के किसी राज्य के सदन के पहले भारतीय-अमेरिकी स्पीकर बन जाएंगे।
- डॉ. कृष्ण सुब्रह्मण्यन ने मिनेसोटा स्टेट सीनेट का चुनाव जीता है।
- अरुणा मिलर मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में फिर से चुनी गई हैं।
- लिसा कौल ने न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट का चुनाव जीता है। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा उम्मीदवार को हराया और न्यूयॉर्क में एक सीट डेमोक्रेट्स के खाते में डाल दी।
- नबीला सैयद ने इलिनॉय स्टेट सीनेट के डिस्ट्रिक्ट-26 से जीत हासिल की है।
- अमर मुकुंदा ने मैरीलैंड स्टेट सीनेट का चुनाव जीता है।
- सबा हैदर इलिनॉय स्टेट हाउस के लिए चुनी गई हैं।
- जोश कौल विस्कॉन्सिन के अटॉर्नी जनरल के रूप में फिर से चुने गए हैं।
- पूजा सेठी ने टेक्सास हाउस के डिस्ट्रिक्ट-47 का चुनाव जीता है। वह टेक्सास की विधायिका में पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बन गई हैं।
- ज्योत सिंह जॉर्जिया स्टेट हाउस के डिस्ट्रिक्ट-97 से चुने गए हैं। वह जॉर्जिया स्टेट लेजिस्लेचर के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी और पहले सिख-अमेरिकी हैं।