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लुधियाना में नगर निगम हाउस की बैठक में हुई हाथापाई
गुरु नानक देव भवन में सोमवार को आयोजित नगर निगम के जनरल हाउस की बैठक शुरुआत से ही रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। जीरो ऑवर की मांग और एजेंडों पर चर्चा को लेकर पार्षदों और सत्तापक्ष के बीच उपजा गतिरोध देखते ही देखते इस कदर बढ़ा कि सदन में हाथापाई, कुर्सियों की खींचतान और तीखी नोकझोंक के बीच अफसरशाही भी सदन छोड़कर बाहर आ गई। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस बल को बुलाना पड़ा और एक पार्षद को विरोधस्वरूप जमीन पर धरना देकर बैठना पड़ा।
बैठक की शुरुआत में ही विपक्ष और कई पार्षदों ने मांग उठाई कि नियमानुसार पहले जीरो ऑवर के तहत वार्डों के मुद्दे सुने जाएं और पार्षदों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाए, जबकि मेयर का रुख था कि पहले तय एजेंडे पढ़े जाएं। इसी बात पर बहस छिड़ गई और कांग्रेसी पार्षद गौरव भट्टी, गौरवजीत गोरा, अरुण शर्मा, शाम सुंदर मल्होत्रा व रोहित सिक्का समेत कई पार्षद विरोध पर उतर आए। इसी गहमागहमी के बीच विधायक दलजीत सिंह भोला ग्रेवाल की एक टिप्पणी से माहौल और गरमा गया। जब पार्षद भट्टी विधायक की ओर बढ़े तो आप पार्षद अश्वनी शर्मा गोबी बीच में आ गए और दोनों के बीच तीखी धक्का-मुक्की हो गई। बीच-बचाव की कोशिश में पार्षद कमल अरोड़ा का घुटना छिलने से पजामा फट गया, जबकि हंगामे के बीच तबीयत बिगड़ने पर पार्षद गौरवजीत गोरा को घर लौटना पड़ा। बढ़ते तनाव को देख मेयर ने नियमों का उल्लंघन करने वालों को सदन से बाहर करने के निर्देश दिए, जिसके बाद पुलिस ने गौरवजीत गोरा और अनिल भारद्वाज को बाहर का रास्ता दिखाया।
सदन के भीतर यह हंगामा थमा भी नहीं था कि सफाई व्यवस्था और 1208 आउटसोर्स कर्मचारियों की फिजिकल वेरिफिकेशन के मुद्दे ने आग में घी का काम कर दिया। पार्षदों ने सवाल उठाया कि कर्मचारियों की वार्डवार और नाम सहित सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। भाजपा पार्षद पूनम रतड़ा ने बेंजामिन रोड का नाम बदलने के साथ-साथ कर्मचारियों की संख्या में फेरबदल का कड़ा विरोध किया और कहा कि उनके वार्ड में पहले 34 कर्मचारियों की सूची थी जो अब बढ़कर 56 हो गई है, ऐसे में शेष 22 का ब्योरा कहां है। वहीं, पार्षद भवनीत कौर ने अपने क्षेत्र में कागजों में 10 कर्मचारी दर्ज होने और जमीनी स्तर पर एक भी नुमाइंदा न मिलने का आरोप लगाया। जब उन्होंने और आप पार्षद निधि गुप्ता ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर तीखी शब्दावली का इस्तेमाल किया, तो जोनल कमिश्नर जसदेव सिंह सेखों और चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर नीशू घई समेत तमाम अधिकारी भड़क उठे। अधिकारियों ने पार्षदों के लहजे पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मीटिंग का बायकॉट कर दिया और सदन से बाहर आकर रोष प्रकट किया।0
अधिकारियों के सदन छोड़कर बाहर जाने पर पार्षदों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पार्षदों ने इसे निर्वाचित सदन की तौहीन करार देते हुए तीखा विरोध जताया और अधिकारियों के तत्काल निलंबन की मांग की। आप पार्षद वर्षा रामपाल और निधि गुप्ता ने अफसरशाही के हावी होने का आरोप लगाते हुए सदन के फर्श पर ही धरना शुरू कर दिया। पार्षदों का कहना था कि नगर निगम के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के सवालों के बीच अधिकारी सदन छोड़कर भाग खड़े हों। हंगामे के बीच ही मैकेनिकल स्वीपिंग, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और छह कॉलोनियों के सीवर कनेक्शन के प्रस्तावों पर भी जमकर विरोध के स्वर गूंजे। शाम सुंदर मल्होत्रा और अरुण शर्मा ने ग्लाडा की छह कॉलोनियों के सीवर कनेक्शन निगम के प्लांट से जोड़ने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए चेतावनी दी कि इससे पहले से ओवरफ्लो चल रहे प्लांट पूरी तरह फेल हो जाएंगे और यह सब केवल चुनिंदा कालोनाइजरों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। भाजपा जिला प्रधान सुनील मोदगिल ने भी दो करोड़ रुपये का वेतन उठने के बावजूद धरातल पर कर्मचारियों के न दिखने का हवाला देते हुए फिजिकल वेरिफिकेशन होने तक मैकेनिकल स्वीपिंग के प्रस्ताव को लंबित रखने की मांग उठाई। हालांकि, तमाम विरोधों के बावजूद सत्तापक्ष के पार्षदों ने एकजुट होकर 40 मतों के समर्थन से सॉलिड वेस्ट और कर्मचारियों से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। अंत में, बैठक समाप्त होने के बाद जोनल कमिश्नर, अश्वनी सहोता और नीशू घई ने मेयर से मुलाकात कर पार्षदों द्वारा अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर रोष जताया, जिस पर मेयर ने सभी पक्षों को शांत कराते हुए मंगलवार को जोन-डी कार्यालय में विशेष बैठक बुलाकर मामले को सुलझाने का भरोसा दिया।
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