आस्था, परंपरा और धार्मिक उल्लास के बीच रविवार को खरगोन का 58वां ऐतिहासिक शिवडोला राजसी ठाठ-बाट के साथ नगर भ्रमण पर निकला। अधिष्ठाता भगवान श्री सिद्धनाथ महादेव की राजसी पालकी जैसे ही भावसार मोहल्ला स्थित सिद्धनाथ महादेव मंदिर से बाहर निकली, पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय शिव शंभू’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया। देर रात तक शिवडोला शहर के प्रमुख मार्गों से होकर पुनः सिद्धनाथ महादेव मंदिर पहुंचेगा।
शिवडोले की शुरुआत से पहले सुबह मंदिर में भगवान सिद्धनाथ महादेव का विशेष अभिषेक और पूजन किया गया। इसके बाद भव्य धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भगवान का श्रृंगार किया गया। शिवडोला नगर भ्रमण पर निकलने से पहले मुख्य झांकी की महाआरती की गई। इस दौरान विधायक बालकृष्ण पाटीदार, कलेक्टर गुरु प्रसाद, एसपी रवींद्र वर्मा, शिवडोला समिति के अध्यक्ष नवनीत भंडारी सहित सकल हिंदू समाज के सदस्य मौजूद रहे।
महादेव की राजसी पालकी
महाआरती के बाद भगवान सिद्धनाथ महादेव की राजसी पालकी मंदिर परिसर से बाहर निकली। पालकी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से ही मार्ग पर मौजूद थे। भगवान की पालकी बाहर आते ही मध्यप्रदेश पुलिस बैंड की टीम ने सलामी दी। बैंड की धुनों और शंखनाद के बीच निकली भगवान की सवारी ने धार्मिक वातावरण को और भव्य बना दिया।
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27 धार्मिक और पौराणिक झांकियां शामिल
मध्यप्रदेश के सबसे बड़े माने जाने वाले शिवडोले में इस बार धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विविधता की भी विशेष झलक देखने को मिल रही है। मुख्य राजसी रथ सहित 27 धार्मिक और पौराणिक झांकियां शिवडोले में हैं। इनके साथ लोकनृत्य दल, अखाड़े, ढोल-ताशा दल, नगाड़ा दल, भजन मंडलियां और घुड़सवार भी यात्रा की शोभा बढ़ा रहे हैं। झांकियों में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों के साथ महाकाल, अंबे माता, श्रीकृष्ण-सत्यभामा, नरकासुर और संत सिंगाजी सहित कई धार्मिक एवं पौराणिक प्रसंगों को प्रस्तुत किया जा रहा है। वहीं गौरिल्ला नृत्य, शिव-पार्वती-अघोरी नृत्य, आदिवासी लोकनृत्य, मयूर नृत्य, गणगौर, कालबेलिया और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
जगह-जगह हुआ स्वागत
शिवडोला मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर 80 से अधिक सेवा मंचों के माध्यम से श्रद्धालुओं का स्वागत किया जा रहा है। सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और विभिन्न समाजों की ओर से प्रसाद, फल, खिचड़ी, भजिया, शरबत, छाछ और अन्य खाद्य सामग्री के साथ शीतल पेयजल की व्यवस्था की गई है। शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर भगवान की सवारी के स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा, आतिशबाजी और धार्मिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। गुरु नानकदेव चौराहा क्षेत्र में शिव-शक्ति मिलन सहित विशेष आयोजन किए जाने हैं।
खरगोन का शिवडोला केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि शहर की वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और सामाजिक परंपरा का प्रतीक है। रविवार को जैसे-जैसे भगवान सिद्धनाथ महादेव की राजसी सवारी शहर के मुख्य मार्गों से आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की भीड़ और उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। देर रात भगवान की सवारी पुनः सिद्धनाथ महादेव मंदिर पहुंचेगी, जहां 58वें शिवडोले का धार्मिक आयोजन संपन्न होगा।