बलरामपुर जिले के चलगली थाना क्षेत्र में करीब 10 एकड़ (4 हेक्टेयर) शासकीय वन भूमि पर फर्जी वन अधिकार पट्टे के जरिए कब्जा करने के प्रयास का पुलिस और वन विभाग ने खुलासा किया है। मामले में पुलिस ने जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
वन परिक्षेत्र बलरामपुर के मणिकपुर सर्किल अंतर्गत बीट मुरका (कक्ष क्रमांक P-3493) में शिवलाल नामक व्यक्ति द्वारा झोपड़ी बनाकर शासकीय वन भूमि पर कब्जा किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना पर वनपाल अनिल कुजूर और वन अमला मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की।
पूछताछ के दौरान शिवलाल ने अपने, अपनी पत्नी रामपतिया और पुत्र रामकुमार के नाम पर कुल 4 हेक्टेयर (करीब 10 एकड़) भूमि का वन अधिकार पट्टा प्रस्तुत किया। पट्टा संदिग्ध लगने पर इसकी जांच सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से कलेक्टर भू-अभिलेख अंबिकापुर की दायरा पंजी से कराई गई। जांच में सामने आया कि संबंधित पट्टा कार्यालय से जारी ही नहीं किया गया था और पूरी तरह फर्जी था।
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पूछताछ में शिवलाल ने बताया कि उसने यह फर्जी पट्टा वर्ष 2025 में कोटड़की निवासी रामसकल उर्फ सकलू को 15 हजार रुपये नकद देकर बनवाया था। जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि वाड्रफनगर चौकी क्षेत्र के ग्राम बरतीकला निवासी शंकरनाथ पाण्डेय और कुंजन रजक फर्जी पट्टे लाकर देते थे और पैसे लेकर उनका वितरण कराते थे।
वन विभाग की रिपोर्ट पर थाना चलगली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया। साक्ष्य जुटाने और फर्जी पट्टों की जब्ती के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में शिवलाल, पिता स्व. कांशी, निवासी ग्राम केरता/चैनपुर, थाना चलगली; रामकुमार, पिता शिवलाल, निवासी ग्राम केरता/चैनपुर, थाना चलगली; रामशकल उर्फ सकलू, पिता स्व. रामवृक्ष, निवासी ग्राम कोटड़की, थाना चलगली; शंकरनाथ पाण्डेय, उम्र 35 वर्ष, पिता बैजनाथ पाण्डेय, निवासी ग्राम बरतीकला, चौकी वाड्रफनगर और कुंजन रजक, पिता रतन प्रसाद रजक, निवासी ग्राम बरतीकला, चौकी वाड्रफनगर शामिल हैं। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।