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Sitapur News: 785 गांवों में बिजली आपूर्ति ठप
Mon, 05 Oct 2026 12:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 05 Oct 2026 12:07 AM IST
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सीतापुर। आंधी और बारिश से बिगड़ी बिजली आपूर्ति एक सप्ताह बाद भी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी है। रविवार को जिले के 785 गांवों में बिजली आपूर्ति ठप रही। बिजली न आने से ग्रामीणों के घरों में सबमर्सिबल बंद हैं। मोबाइल चार्ज करने के लिए लोगों को बाजार का सहारा लेना पड़ रहा है। आटा चक्की समेत कई छोटे उद्योग-धंधे भी बंद हैं। इससे लोगों की दिनचर्या के साथ कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। शिकायतों के बाद भी कई गांवों में आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है।
एक सप्ताह पहले आंधी और बारिश के दौरान करीब पांच हजार गांवों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी। दो हजार से अधिक बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि करीब 100 ट्रांसफार्मर खंभों से टूटकर जमीन पर गिर गए थे। विभाग ने मरम्मत शुरू कराई, लेकिन कई स्थानों पर जलभराव के कारण काम प्रभावित हुआ। पानी भरा होने से खंभे लगाने और तार बिछाने में दिक्कत आई। पानी कम होने के बाद काम तेज किया गया, लेकिन अब भी 785 गांवों में लोगों के लिए बिजली संकट बना हुआ है।
ग्रामीण राकेश और उमेश ने बताया कि बिजली बहाल कराने के लिए वे तीन बार उपकेंद्र जा चुके हैं। हर बार आश्वासन मिलता है। आंधी के दाैरान उनके क्षेत्र में करीब 20 खंभे गिरे हैं, जिन्हें अब तक नहीं लगाया जा सका है।
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मोहित ने बताया कि सबमर्सिबल बंद होने से पड़ोस में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप से पानी भरना पड़ रहा है। उपेंद्र ने बताया कि बिजली न आने से मजबूरी में जनरेटर खरीदा है। इससे पानी भरने और इन्वर्टर चार्ज करने का काम चल रहा है, लेकिन अतिरिक्त खर्च हो रहा है। रामलखन ने बताया कि आटा चक्की बंद है। अब गेहूं पिसवाने के लिए करीब पांच किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। आशीष के मुताबिक घर के पांच मोबाइल में चार बिजली न होने से डिस्चार्ज पड़े हैं।
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एक सप्ताह पहले आंधी और बारिश के दौरान करीब पांच हजार गांवों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी। दो हजार से अधिक बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि करीब 100 ट्रांसफार्मर खंभों से टूटकर जमीन पर गिर गए थे। विभाग ने मरम्मत शुरू कराई, लेकिन कई स्थानों पर जलभराव के कारण काम प्रभावित हुआ। पानी भरा होने से खंभे लगाने और तार बिछाने में दिक्कत आई। पानी कम होने के बाद काम तेज किया गया, लेकिन अब भी 785 गांवों में लोगों के लिए बिजली संकट बना हुआ है।
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ग्रामीण राकेश और उमेश ने बताया कि बिजली बहाल कराने के लिए वे तीन बार उपकेंद्र जा चुके हैं। हर बार आश्वासन मिलता है। आंधी के दाैरान उनके क्षेत्र में करीब 20 खंभे गिरे हैं, जिन्हें अब तक नहीं लगाया जा सका है।
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मोहित ने बताया कि सबमर्सिबल बंद होने से पड़ोस में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप से पानी भरना पड़ रहा है। उपेंद्र ने बताया कि बिजली न आने से मजबूरी में जनरेटर खरीदा है। इससे पानी भरने और इन्वर्टर चार्ज करने का काम चल रहा है, लेकिन अतिरिक्त खर्च हो रहा है। रामलखन ने बताया कि आटा चक्की बंद है। अब गेहूं पिसवाने के लिए करीब पांच किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। आशीष के मुताबिक घर के पांच मोबाइल में चार बिजली न होने से डिस्चार्ज पड़े हैं।