मस्जिद ध्वस्त: सहारनपुर-मुजफ्फरनगर में लगे दंगे से जुड़े होर्डिंग्स, अतुल प्रधान और सांसद हरेंद्र मलिक नजरबंद
कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गरमाता नजर आ रहा है। रविवार को शहर के बड़े अस्पताल पुल पर विवादित पोस्टर लगाए गए, जिन्हें पुलिस ने तुरंत उतरवा दिया।
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सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के 5 सितंबर को ध्वस्तीकरण के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। सोमवार को सपा समेत अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल के सहारनपुर पहुंचने से पहले पुलिस ने कई नेताओं को रोक दिया। सरधना विधायक अतुल प्रधान को हाउस अरेस्ट किया गया है, जबकि मुजफ्फरनगर के सपा सांसद हरेंद्र मलिक को भी उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल के दौरे से पहले शहर में विवादित पोस्टर
सहारनपुर में सोमवार को विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से एक दिन पहले रविवार सुबह बड़े अस्पताल पुल पर विवादित पोस्टर लगाए गए थे। पोस्टर पर लिखा था, ‘ना भूले थे, ना भूले हैं, ना भूलेंगे, मुजफ्फरनगर दंगा।’ पोस्टर के निचले हिस्से में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर भी लगाई गई थी।
पोस्टर लगते ही पुलिस ने इन्हें हटवा दिया। अब पोस्टर लगाने वाले की तलाश की जा रही है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज समेत अन्य साक्ष्य खंगाल रही है।
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अतुल प्रधान को हाउस अरेस्ट किया गया
सहारनपुर मस्जिद प्रकरण को लेकर सपा के 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सहारनपुर जा रहे सरधना विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य मौके की स्थिति का जायजा लेना और पूरे मामले की जानकारी जुटाना था।
हरेंद्र मलिक भी नजरबंद
मुजफ्फरनगर के सपा सांसद हरेंद्र मलिक को भी सोमवार को उनके प्रेमपुरी स्थित आवास पर नजरबंद किया गया। उन्हें सहारनपुर जाने वाले पार्टी के 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल होना था।
यह प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण प्रकरण की जांच करने और मंडलायुक्त से मुलाकात करने के लिए जा रहा था। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मौके की स्थिति देखने के साथ मामले से जुड़ी जानकारी जुटाने वाले थे।
सहारनपुर जाने से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद पहले ही विपक्षी नेताओं की ओर से प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अब सपा प्रतिनिधिमंडल के सहारनपुर पहुंचने से पहले अतुल प्रधान और हरेंद्र मलिक को रोके जाने के बाद राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है। पुलिस की कार्रवाई और नेताओं को नजरबंद किए जाने को लेकर विपक्ष की ओर से प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है।
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके साथ ही पोस्टर लगाने वाले की पहचान के लिए अन्य साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पोस्टर किसने लगाए और इनके पीछे किसकी भूमिका है।
सोमवार को विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल का दौरा
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद सोमवार को सपा समेत अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल के सहारनपुर पहुंचने की बात कही गई है। इससे पहले विवादित पोस्टर लगाए जाने के बाद शहर में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
मुजफ्फरनगर जिले में भी दंगे के 13 साल शहर में जगह-जगह होर्डिंग लगाए गए हैं। होर्डिंग पर लिखा गया है कि न भूले थे, न भूले हैं...न भूलेंगे। शहर में रोडवेज बस स्टैंड समेत अन्य प्रमुख स्थानों पर सामग्री चस्पा की गई है। पुलिस सीसीटीवी के माध्यम से आरोपियों की तलाश कर रही है।
मस्जिद प्रकरण को लेकर अधिकारियों से मिलने वाले सपा के प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया है। प्रतिनिधि मंडल में पश्चिमी यूपी के कई बड़े नेता शामिल हैं, जिसमें सांसद इकरा हसन, सांसद हरेंद्र मलिक, राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसेन, पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान, विधायक अतुल प्रधान, विधायक आशु मलिक और विधायक उमर अली खान समेत अन्य नेताओं को पुलिस ने उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया।
किसी भी नेता को उनके आवास या कार्यालय से बाहर नहीं निकलने दिया गया। सहारनपुर देहात विधायक आशु मलिक ने कहा कि यह सरकार की मनमानी है। इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता की आवाज को दबाने का काम किया जा रहा है।