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कानपुर: दिवंगत बेटी को न्याय दिलाने के लिए भटक रहा पिता, न्यायालय भवन की 6वी मंजिल से कूदकर दी थी जान

Sun, 18 Oct 2026 10:01 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Sun, 18 Oct 2026 10:01 PM IST
सार

पिछले साल न्यायालय भवन की छठवीं मंजिल से कूदकर नेहा ने खुदकुशी कर ली थी। 
पेशकार ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी। 

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Kanpur: Father, seeking justice for his deceased daughter
नेहा को श्रद्धांजलि देते परिजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में स्टेनोग्राफर के पद पर कार्यरत रहीं नेहा परोची ने पिछले साल 18 अक्तूबर को न्यायालय भवन की छठवीं मंजिल से कूदकर खुदकुशी कर ली थी। पुलिस की विवेचना चल रही है। नेहा की मौत किन कारणों से हुई इसका पता आज तक नहीं चल सका है। न्यायालय में काम करने वाली अपनी दिवंगत बेटी को न्याय दिलाने के लिए पिता आज भी न्यायालय के चक्कर काट रहा है।
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घाटमपुर के कोटरा मकरंदपुर निवासी नेहा के पिता गोविंद प्रसाद ने सीजेएम कोर्ट के आदेश के खिलाफ पिछले दिनों जिला जज की अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल की। इसमें तत्कालीन सिविल जज सीनियर डिवीजन अमर प्रताप चौधरी, पेशकार राकेश कुमार कमल व चपरासी विपिन कुमार दीक्षित को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश देने की मांग की गई है। आरोप है कि तीनों लोग नेहा को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे। इसकी जानकारी उसने घरवालों को दी थी। इसी से परेशान होकर उसने खुदकुशी कर ली थी।
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वहीं, नेहा के निधन को रविवार को एक साल पूरा हो गया। नेहा के पिता गोविंद प्रसाद अन्य परिजन के साथ कचहरी पहुंचे। न्यायालय भवन के पिछले दरवाजे पर जहां नेहा की गिरकर जान गई थी वहीं पर नेहा का चित्र रखकर श्रद्धांजलि दी। पुष्प अर्पित कर मोमबत्ती जला दो मिनट का मौन रखा। बेटी को न्याय दिलाने के लिए लड़ते रहने का संकल्प दोहराया।
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जिस पेशकार पर आरोप, वही बन गया वादी
जानकारी मिलने पर नेहा के पिता उर्सला अस्पताल पहुंचे थे। उनकी मौजूदगी के बावजूद पेशकार ने बिना उनकी जानकारी के कोतवाली में अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज करा दी। पिता गोविंद का कहना है कि वह पीड़ित हैं इसलिए उन्हें वादी बनाना चाहिए जबकि जिस पेशकार पर आरोप है उसी को वादी बनाकर जांच की जा रही है। गोविंद की मांग है कि मृतका के पिता व प्राकृतिक संरक्षक होने के नाते उन्हें वादी बनाकर दूसरी रिपोर्ट दर्ज की जानी चाहिए। इस संबंध में उन्होंने सीजेएम कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दिया था लेकिन सीजेएम कोर्ट ने 30 जुलाई को प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। इसी आदेश के खिलाफ गोविंद ने जिला जज की अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल की है।

 

एक रिपोर्ट दर्ज तो दूसरी का औचित्य नहीं
सीजेएम कोर्ट ने आदेश में कहा था कि रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज है। विवेचना जारी है। जब घटना की एक रिपोर्ट दर्ज है तो दूसरी रिपोर्ट दर्ज कराने का औचित्य नहीं है। पिता विवेचना में सहयोग करें और अगर विवेचना से संतुष्ट नहीं हैं तो उच्चाधिकारियों से मिलकर पक्ष रखें।
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