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Ghazipur News: टीबी वार्ड में मरीजों को दवा देना के लिए दो घंटे ब्लड सैंपल लेने के लिए चार घंटे करिए इंतजार
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शहर के गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के टीबी वार्ड में मरीज के बेड पर पड़ा ब्लड का क्वा
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स्टाफ नर्स और स्वास्थ्यकर्मी के लिए दूसरे वार्ड का लगाना पड़ता है चक्कर, शिफ्ट बदलने का हवाला देकर लौट जाते हैं जिम्मेदार
संवाद न्यूज एजेंसी गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 200 बेड वाले पुरुष अस्पताल के टीबी वार्ड में भर्ती मरीजों को स्वास्थ्यकर्मियों की तलाश के लिए भी जूझना पड़ रहा है। इसकी वजह दस बेड के टीबी वार्ड में किसी स्वास्थ्यकर्मी की नियमित तैनाती नहीं होना है। इससे मरीजों को दवा देने से लेकर जांच के लिए ब्लड सैंपल निकलवाने तक दूसरे वार्ड के कर्मचारियों का इंतजार करना पड़ता है। तीमारदारों के अनुसार सूचना देने के बावजूद स्वास्थ्यकर्मी एक से दो घंटे बाद पहुंचते हैं। ब्लड सैंपल के लिए चार से पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ता है।
पुरुष अस्पताल के प्रथम तल पर वृद्धा वार्ड और दूसरे तल पर टीबी व मेडिकल वार्ड बना है। मेडिकल वार्ड के मरीजों के अनुसार नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अलग कक्ष है और ड्यूटी भी लगती है लेकिन मरीज की सूचना पर कई बार तत्काल बेड तक नहीं पहुंचते। 10 से 20 मिनट बाद पहुंचने की बात कही गई। वहीं, सलाइन की बोतल खत्म होने पर भी मरीजों को दूसरी शिफ्ट के कर्मचारियों का इंतजार करना पड़ता है।
टीबी वार्ड में मरीजों को दिक्कत होने पर दूसरे वार्ड से स्टाफ नर्स और स्वास्थ्यकर्मियों को बुलाना पड़ता है। सूचना देने के एक से दो घंटे बाद स्वास्थ्यकर्मी वार्ड में पहुंचते हैं। संजय, तीमारदार, सुखडेहरा पति रामबचन वार्ड में भर्ती हैं। ब्लड सैंपल निकलवाने के लिए जानकारी देने के बाद भी सुबह 11 बजे से इंतजार करना पड़ा। दोपहर दो बजे के बाद स्वास्थ्यकर्मी ब्लड निकालने पहुंचे। खेतनी, तीमारदार, अलीपुर सैदपुर भितरी
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वार्ड में भर्ती मरीज को परेशानी होने पर नर्स और स्वास्थ्यकर्मी को बुलाया जाता है तो कई बार वह आधे घंटे बाद पहुंचते हैं। बार-बार जाने पर कर्मियों के कोप का भाजन भी होना पड़ता है। हरीनाथ राम, तीमारदार, करमहरी मां टीबी वार्ड में भर्ती हैं। किसी परेशानी पर सामने स्थित मेडिकल वार्ड से नर्स और स्वास्थ्यकर्मियों को बुलाना पड़ता है। दवा भी तीमारदारों को ही देनी पड़ती है। अजीत, कटया लहंग
केस एक दर्द से छटपटाते रहे मरीज, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
तीन सितंबर की भोर करीब पांच बजे मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिकल वार्ड में उपचार के दौरान आशीष कुमार राय उर्फ सोनू राय (40) की मौत हो गई थी। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही, समय पर मरीज को न देखने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया था। परिजनों के अनुसार मरीज पूरी रात दर्द से छटपटाता रहा लेकिन उसकी गंभीर स्थिति देखने कोई जिम्मेदार चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी नहीं पहुंचा था। केस दो
ऊषा देवी की मौत पर निलंबित किए गए थे वार्ड बॉय और दो नर्स दो मार्च को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान ऊषा देवी की मौत हो गई थी। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद प्राचार्य ने वार्ड बॉय और दो नर्सों को निलंबित कर दिया था।
केस तीन
आशा संगिनी को इमरजेंसी में नहीं मिला तत्काल उपचार 26 अगस्त को आशा संगिनी रिजवाना खातून को सीने में दर्द होने पर परिजन मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आपातकक्ष में लेकर पहुंचे थे। उन्होंने तत्काल चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने का आरोप लगाया था। आशा संगिनी और उनके पति ने इमरजेंसी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 200 बेड वाले पुरुष अस्पताल के टीबी वार्ड में भर्ती मरीजों को स्वास्थ्यकर्मियों की तलाश के लिए भी जूझना पड़ रहा है। इसकी वजह दस बेड के टीबी वार्ड में किसी स्वास्थ्यकर्मी की नियमित तैनाती नहीं होना है। इससे मरीजों को दवा देने से लेकर जांच के लिए ब्लड सैंपल निकलवाने तक दूसरे वार्ड के कर्मचारियों का इंतजार करना पड़ता है। तीमारदारों के अनुसार सूचना देने के बावजूद स्वास्थ्यकर्मी एक से दो घंटे बाद पहुंचते हैं। ब्लड सैंपल के लिए चार से पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ता है।
पुरुष अस्पताल के प्रथम तल पर वृद्धा वार्ड और दूसरे तल पर टीबी व मेडिकल वार्ड बना है। मेडिकल वार्ड के मरीजों के अनुसार नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अलग कक्ष है और ड्यूटी भी लगती है लेकिन मरीज की सूचना पर कई बार तत्काल बेड तक नहीं पहुंचते। 10 से 20 मिनट बाद पहुंचने की बात कही गई। वहीं, सलाइन की बोतल खत्म होने पर भी मरीजों को दूसरी शिफ्ट के कर्मचारियों का इंतजार करना पड़ता है।
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टीबी वार्ड में मरीजों को दिक्कत होने पर दूसरे वार्ड से स्टाफ नर्स और स्वास्थ्यकर्मियों को बुलाना पड़ता है। सूचना देने के एक से दो घंटे बाद स्वास्थ्यकर्मी वार्ड में पहुंचते हैं। संजय, तीमारदार, सुखडेहरा पति रामबचन वार्ड में भर्ती हैं। ब्लड सैंपल निकलवाने के लिए जानकारी देने के बाद भी सुबह 11 बजे से इंतजार करना पड़ा। दोपहर दो बजे के बाद स्वास्थ्यकर्मी ब्लड निकालने पहुंचे। खेतनी, तीमारदार, अलीपुर सैदपुर भितरी
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वार्ड में भर्ती मरीज को परेशानी होने पर नर्स और स्वास्थ्यकर्मी को बुलाया जाता है तो कई बार वह आधे घंटे बाद पहुंचते हैं। बार-बार जाने पर कर्मियों के कोप का भाजन भी होना पड़ता है। हरीनाथ राम, तीमारदार, करमहरी मां टीबी वार्ड में भर्ती हैं। किसी परेशानी पर सामने स्थित मेडिकल वार्ड से नर्स और स्वास्थ्यकर्मियों को बुलाना पड़ता है। दवा भी तीमारदारों को ही देनी पड़ती है। अजीत, कटया लहंग
केस एक दर्द से छटपटाते रहे मरीज, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
तीन सितंबर की भोर करीब पांच बजे मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिकल वार्ड में उपचार के दौरान आशीष कुमार राय उर्फ सोनू राय (40) की मौत हो गई थी। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही, समय पर मरीज को न देखने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया था। परिजनों के अनुसार मरीज पूरी रात दर्द से छटपटाता रहा लेकिन उसकी गंभीर स्थिति देखने कोई जिम्मेदार चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी नहीं पहुंचा था। केस दो
ऊषा देवी की मौत पर निलंबित किए गए थे वार्ड बॉय और दो नर्स दो मार्च को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान ऊषा देवी की मौत हो गई थी। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद प्राचार्य ने वार्ड बॉय और दो नर्सों को निलंबित कर दिया था।
केस तीन
आशा संगिनी को इमरजेंसी में नहीं मिला तत्काल उपचार 26 अगस्त को आशा संगिनी रिजवाना खातून को सीने में दर्द होने पर परिजन मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आपातकक्ष में लेकर पहुंचे थे। उन्होंने तत्काल चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने का आरोप लगाया था। आशा संगिनी और उनके पति ने इमरजेंसी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे।

शहर के गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के टीबी वार्ड में मरीज के बेड पर पड़ा ब्लड का क्वा