फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Panchak in October 2026 Dates Timings and 5 Activities Traditionally Avoided During Panchak

अक्तूबर में कब लगेगा पंचक? जानें शुरुआत और समाप्ति का समय, इन 5 कामों को लेकर बरतें सावधानी

Tue, 13 Oct 2026 07:13 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 13 Oct 2026 07:13 PM IST
सार

अक्तूबर 2026 में पंचक का काल 4 दिन 12 घंटे तक रहने वाला है। हिंदू धर्म में पंचक के दौरान कुछ कार्यों को करना शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं अक्तूबर में पंचक कब से शुरू होगा, कब समाप्त होगा।

विज्ञापन
Panchak in October 2026 Dates Timings and 5 Activities Traditionally Avoided During Panchak
अक्तूबर का पंचांग - फोटो : amar ujala

विस्तार

हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में पंचक की अवधि को महत्वपूर्ण माना जाता है। आमतौर पर पंचक हर महीने आता है और इसकी अवधि लगभग पांच दिनों की होती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इस समय पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठान करने पर कोई सामान्य रोक नहीं मानी जाती है। पंचक का प्रभाव किस प्रकार का होगा, इसे लेकर इसकी शुरुआत के दिन को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। अक्तूबर 2026 में पंचक की अवधि पांच दिन से कम रहेगी। आइए जानते हैं पंचक कब शुरू होगा, इसका समापन कब होगा और इस दौरान किन कार्यों को लेकर सावधानी बरतने की मान्यता है।

विज्ञापन


पंचक कब से कब तक रहेगा?
अक्तूबर में पंचक की शुरुआत बुधवार, 21 अक्तूबर को सुबह 6 बजकर 59 मिनट पर होगी। इसका समापन रविवार, 25 अक्तूबर को शाम 7 बजकर 21 मिनट पर होगा। इस तरह पंचक की कुल अवधि लगभग 4 दिन और 12 घंटे रहेगी।
विज्ञापन

ज्योतिष में पंचक उस अवधि को कहा जाता है, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहते हुए धनिष्ठा के उत्तरार्ध से लेकर रेवती नक्षत्र तक का गोचर करता है। इस अवधि में कुछ कार्यों को टालने की परंपरा है, जबकि पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से की जा सकती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

बुधवार से शुरू होने वाले पंचक को लेकर क्या मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक की शुरुआत जिस वार से होती है, उसके आधार पर इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। बुधवार और गुरुवार से शुरू होने वाले पंचक को कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में अपेक्षाकृत सामान्य या दोषमुक्त माना जाता है। इस बार अक्तूबर का पंचक बुधवार से शुरू हो रहा है। हालांकि, पंचक के प्रभाव और इस दौरान किए जाने वाले कार्यों को लेकर अलग-अलग ज्योतिषीय मान्यताएं मिलती हैं। इसलिए किसी विशेष मांगलिक कार्य के लिए शुभ मुहूर्त तय करना हो, तो पंचांग और संबंधित परंपरा के अनुसार विचार करना उचित रहता है।

पंचक के दौरान किन 5 कामों से बचने की मान्यता है?

  • दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचें: पारंपरिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को यम की दिशा कहा गया है। इसी कारण पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा जरूरी हो, तो अपनी सुविधा और परिस्थितियों के अनुसार योजना बनाएं। इसे किसी अनहोनी की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।
  • लकड़ी या ज्वलनशील सामग्री जमा न करें: पंचक के दौरान लकड़ी, घास और अन्य ज्वलनशील सामग्री इकट्ठा करने से बचने की मान्यता है। पारंपरिक विश्वास में इसे अग्नि से जुड़े जोखिमों के साथ जोड़ा जाता है। व्यावहारिक रूप से भी ज्वलनशील वस्तुओं को सुरक्षित ढंग से रखना जरूरी है।
  • नई चारपाई या पलंग बनवाने से बचें: कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान नई चारपाई बुनना, पलंग बनवाना या इस तरह का फर्नीचर तैयार करवाना टाल देना चाहिए। इसे पंचक के वर्जित कार्यों में गिना जाता है। हालांकि, यह एक पारंपरिक मान्यता है, कोई वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नियम नहीं।
  • मकान की छत डलवाने से बचने की परंपरा:पंचक के दौरान नए मकान की छत डलवाने या निर्माण से जुड़े कुछ विशेष कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस अवधि में ऐसा करने से घर-परिवार में परेशानियां आ सकती हैं। यदि निर्माण कार्य पहले से चल रहा हो, तो निर्णय लेते समय व्यावहारिक जरूरतों और संबंधित विशेषज्ञों की सलाह को भी ध्यान में रखना चाहिए।
  • कुछ मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त जरूर देखें: पंचक के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य करने से पहले शुभ मुहूर्त देखने की परंपरा है। कुछ लोग इस अवधि में नए फर्नीचर या विशेष वस्तुओं की खरीदारी भी टालते हैं। हालांकि, सभी मांगलिक कार्यों पर एक समान रोक नहीं मानी जाती है। किसी आयोजन की तारीख तय करने से पहले पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना बेहतर रहता है।

पंचक में मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार से जुड़ी क्या मान्यता है?
पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पंचक की अवधि में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो अंतिम संस्कार से जुड़ी कुछ विशेष विधियों का पालन करने की परंपरा है। कुछ रीति-रिवाजों में आटे या कुश से पांच प्रतीकात्मक पुतले बनाकर विशेष शांति-विधान किया जाता है। इसे पंचक शांति से जुड़ी परंपरा कहा जाता है। ऐसी स्थिति में परिवार को स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार किसी अनुभवी पंडित से मार्गदर्शन लेना चाहिए। अंतिम संस्कार के जरूरी कार्यों में देरी करने के बजाय धार्मिक विधि के बारे में तुरंत सलाह लेना उचित है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed