Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां दुर्गा के हर स्वरूप का अपना विशेष महत्व है और उनकी पूजा करने से अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं। इन नौ दिनों में भक्त व्रत रखने के साथ ही विधि-विधान से देवी की उपासना करते हैं। साथ ही, सुबह और शाम मां की आरती करना भी शुभ माना जाता है। ऐसे में नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी के जिस स्वरूप की पूजा की जाती है, उसी के अनुसार उनकी आरती करना भी विशेष महत्व रखता है। इससे मनोवांछित फलों की प्राप्ति व जीवन में कई अच्छे बदलाव दिखते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि नवरात्रि के नौ दिनों में किस दिन किस माता की पूजा करनी चाहिए और उनकी कौन-सी आरती करनी शुभ मानी जाती है।
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शारदीय नवरात्रि 2026: नौ देवियों की पूजा के साथ करें उनकी आरती, जानें दिन के अनुसार पूरी जानकारी
Tue, 13 Oct 2026 05:41 AM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Tue, 13 Oct 2026 05:41 AM IST
सार
Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि देवी के हर स्वरूप का विशेष महत्व है और उनकी आराधना से अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं।
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Shardiya Navratri 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
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Shardiya Navratri 2026
- फोटो : freepik
शारदीय नवरात्रि 2026 कैलेंडर
- 11 अक्तूबर 2026-नवरात्रि का पहला दिन - मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना
- 12 अक्तूबर 2026 -नवरात्रि का दूसरा दिन - मां ब्रह्मचारिणी पूजा
- 13 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का तीसरा दिन - मां चंद्रघंटा पूजा
- 14 अक्तूबर 2026- नवरात्रि का चौथा दिन - मां कूष्मांडा पूजा
- 15 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का पांचवां दिन - मां स्कंदमाता पूजा
- 16 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का छठा दिन - षष्ठी पूजा, मां कात्यायनी पूजा
- 17 अक्तूबर 2026- नवरात्रि का सातवां दिन - सप्तमी पूजा, मां कालरात्रि पूजा
- 18 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का आठवां दिन - अष्टमी पूजा
- 19 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का नौवां दिन - नवमी पूजा
Shardiya Navratri 2026
- फोटो : adobe stock
मां शैलपुत्री आरती Maa Shailputri Aarti in Hindi
शैलपुत्री मां बैल सवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
शैलपुत्री मां बैल सवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
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Shardiya Navratri 2026
- फोटो : Amar Ujala
मां ब्रह्राचारिणी आरती Maa Brahmacharini Aarti
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।
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Shardiya Navratri 2026
- फोटो : अमर उजाला
मां चंद्रघंटा की आरती
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।
चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।
क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली।
मन की मालक मन भाती हो।
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।
सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।
कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।
चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।
क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली।
मन की मालक मन भाती हो।
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।
सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।
कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।