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हिमाचल: हाईकोर्ट ने कहा- अनुभव प्रमाण पत्र में हस्ताक्षर-सत्यापन नहीं होना सुधार योग्य त्रुटि

Mon, 28 Sep 2026 05:46 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 28 Sep 2026 05:46 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती प्रक्रिया के दौरान किसी उम्मीदवार का अनुभव प्रमाणपत्र समय पर जमा करवा दिया गया है लेकिन उस पर अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर नहीं हैं, तो इसे केवल एक सुधार योग्य प्रक्रियात्मक त्रुटि माना जाएगा। 

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Himachal High Court: Lack of signature verification on experience certificate is a rectifiable error
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती प्रक्रिया के दौरान किसी उम्मीदवार का अनुभव प्रमाणपत्र समय पर जमा करवा दिया गया है लेकिन उस पर अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर नहीं हैं, तो इसे केवल एक सुधार योग्य प्रक्रियात्मक त्रुटि माना जाएगा। कोर्ट ने माना कि ऐसी मामूली कमियों को सुधारने के लिए उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय देना पूरी तरह से न्यायसंगत है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने विशाल कुमार की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग ने मार्च 2024 में ग्रुप इंस्ट्रक्टर के 12 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। चेकलिस्ट कॉलम में उल्लेख था कि अनुभव प्रमाणपत्र संबंधित सरकारी अधिकारी या विभाग की ओर से सत्यापित या प्रति-हस्ताक्षरित होना चाहिए।

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दस्तावेज सत्यापन के दौरान आयोग ने पाया कि निजी प्रतिवादी के अनुभव प्रमाणपत्र पर लेबर ऑफिसर/लेबर इंस्पेक्टर के प्रति-हस्ताक्षर नहीं थे। आयोग ने 3 मार्च 2026 को सार्वजनिक नोटिस जारी कर निजी प्रतिवादी सहित अन्य उम्मीदवारों को 12 मार्च तक इस त्रुटि को सुधारने (प्रति-हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र जमा करने) का मौका दिया। त्रुटि दूर करने के बाद परिणाम घोषित हुआ। प्रतीक्षा सूची में निजी प्रतिवादी 71.50 अंकों के साथ पहले स्थान पर और याचिकाकर्ता समान अंक होने के बावजूद दूसरे स्थान पर रहा।

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याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तर्क दिया कि अंतिम तिथि (26 मार्च 2024) बीत जाने के बाद आयोग निजी प्रतिवादी को अनुभव प्रमाणपत्र सत्यापित कराने के लिए अतिरिक्त समय नहीं दे सकता था। कोर्ट ने पाया कि 5 दिसंबर 2022 के संशोधित भर्ती एवं पदोन्नति नियम में अनुभव प्रमाणपत्र को प्रति-हस्ताक्षरित कराने की कोई वैधानिक शर्त नहीं थी। यह शर्त केवल विज्ञापन की चेकलिस्ट के तहत एक सामान्य प्रक्रियात्मक निर्देश थी। उम्मीदवारों को चयन का मौलिक अधिकार भले ही न हो, लेकिन निष्पक्ष चयन प्रक्रिया में विचार किए जाने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। तकनीकी त्रुटियों या फॉर्मेट की कमियों के आधार पर उम्मीदवारी रद्द करना अनुचित है। जब तक कोई धोखाधड़ी या गलत जानकारी न दी गई हो, मामूली चूक के लिए उम्मीदवार का चयन नहीं रोका जाना चाहिए।

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