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Shimla News: आईआईटी इंजीनियरों से कराएं शांति विहार जमीन की जांच
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भवन मालिकों ने डीसी से किया आग्रह
बोले, स्टेबिलिटी प्रमाणपत्र जारी करवाए प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के संजौली के समिट्री के शांति विहार वार्ड में फोरलेन के समानांतर बनाई जा रही टनल के निर्माण के बाद एक साथ आठ से 10 घरों में आई दरारों का निरीक्षण सोमवार को डीसी शिमला उपायुक्त अनुपम कश्यप ने एसडीएम मंजीत शर्मा के साथ किया। इस दौरान लोगों ने इस पूरे क्षेत्र की आईआईटी इंजीनियरों से जांच करवाने की मांग की।
सुबह 12 बजे उपायुक्त ने टनल के पास बने इन घरों में एक पेट्रोल पंप और एक निजी मेगा मार्ट के भवनों में आई दरारों को देखा। शांति विहार वार्ड के पार्षद विनीत शर्मा सहित भवन मालिक राजेंद्र जस्टा, आईडी शर्मा, राजेंद्र चौहान, मंजू चौहान, बृजेश और अन्य भवन मालिकों ने खुलकर अपनी बात उपायुक्त के सामने रखी। भवन मालिकों का कहना है कि टनल के ऊपर बने 12 में से 11 भवनों में दरारें आई हैं। दरारों को भरने और भवनों को सुरक्षित करने का जो कार्य एनएचएआई और निर्माण कंपनी से करवाया जा रहा है, उससे वह संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि यह कार्य विशेषज्ञों की निगरानी में हो। आईआईटी इंजीनियरों की टीम से प्रभावित भवनों की जांच करवाकर यह स्पष्ट किया जाए कि यह सुरक्षित हैं या नहीं। इसके लिए बाकायदा स्टेबिलिटी प्रमाणपत्र जारी किया जाए। प्रशासन लिखित में दें कि इन भवनों में लोग सुरक्षित रह सकते हैं। प्रमाणपत्र जारी होने के बाद ही भूमिगत टनल का निर्माण कार्य आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाए। डीसी ने सभी हितधारकों, भवन मालिकों, जनप्रतिनिधियों, एनएचएआई और निर्माण कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों की जल्द बैठक बुलाने की बात कही।
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बोले, स्टेबिलिटी प्रमाणपत्र जारी करवाए प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के संजौली के समिट्री के शांति विहार वार्ड में फोरलेन के समानांतर बनाई जा रही टनल के निर्माण के बाद एक साथ आठ से 10 घरों में आई दरारों का निरीक्षण सोमवार को डीसी शिमला उपायुक्त अनुपम कश्यप ने एसडीएम मंजीत शर्मा के साथ किया। इस दौरान लोगों ने इस पूरे क्षेत्र की आईआईटी इंजीनियरों से जांच करवाने की मांग की।
सुबह 12 बजे उपायुक्त ने टनल के पास बने इन घरों में एक पेट्रोल पंप और एक निजी मेगा मार्ट के भवनों में आई दरारों को देखा। शांति विहार वार्ड के पार्षद विनीत शर्मा सहित भवन मालिक राजेंद्र जस्टा, आईडी शर्मा, राजेंद्र चौहान, मंजू चौहान, बृजेश और अन्य भवन मालिकों ने खुलकर अपनी बात उपायुक्त के सामने रखी। भवन मालिकों का कहना है कि टनल के ऊपर बने 12 में से 11 भवनों में दरारें आई हैं। दरारों को भरने और भवनों को सुरक्षित करने का जो कार्य एनएचएआई और निर्माण कंपनी से करवाया जा रहा है, उससे वह संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि यह कार्य विशेषज्ञों की निगरानी में हो। आईआईटी इंजीनियरों की टीम से प्रभावित भवनों की जांच करवाकर यह स्पष्ट किया जाए कि यह सुरक्षित हैं या नहीं। इसके लिए बाकायदा स्टेबिलिटी प्रमाणपत्र जारी किया जाए। प्रशासन लिखित में दें कि इन भवनों में लोग सुरक्षित रह सकते हैं। प्रमाणपत्र जारी होने के बाद ही भूमिगत टनल का निर्माण कार्य आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाए। डीसी ने सभी हितधारकों, भवन मालिकों, जनप्रतिनिधियों, एनएचएआई और निर्माण कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों की जल्द बैठक बुलाने की बात कही।
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