पराली जलाने के मामले में आयोग सख्त: चार अधिकारियों को नोटिस, दो दिन में मांगा जवाब
आयोग के अनुसार, अमृतसर में 15 सितंबर से 14 अक्तूबर 2026 के बीच पराली जलाने के 78 मामले सामने आए, जबकि 2025 में इसी अवधि के दौरान 68 मामले दर्ज किए गए थे। डिटेल में पढ़ें खबर...
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पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए जारी निर्देशों के बावजूद दो जिलों में मामले पिछले साल से बढ़ गए हैं। तरनतारन में पराली जलाने की घटनाओं में 45 फीसदी और अमृतसर में 15 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दोनों जिलों के डिप्टी कमिश्नरों (डीसी) और एसएसपी से जवाब तलब किया है।
आयोग ने पूछा है कि आदेशों का पालन न करने पर उनके खिलाफ वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम की धारा-14 के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। आयोग ने चारों अधिकारियों को 21 अक्तूबर 2026 को शाम पांच बजे तक जवाब देने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय तक जवाब नहीं मिलने पर यह मान लिया जाएगा कि अधिकारियों को इस मामले में कुछ नहीं कहना है और अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई शुरू की जाएगी।
नोटिस की प्रति पंजाब के मुख्य सचिव को भी भेजी गई है। आयोग के अनुसार, अमृतसर में 15 सितंबर से 14 अक्तूबर 2026 के बीच पराली जलाने के 78 मामले सामने आए, जबकि 2025 में इसी अवधि के दौरान 68 मामले दर्ज किए गए थे। इसी तरह तरनतारन में इस साल उक्त अवधि में 68 मामले सामने आए, जबकि पिछले साल इनकी संख्या 47 थी।
इस तरह दोनों जिलों में पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। आयोग ने इससे पहले 9 और 10 अक्तूबर को दोनों जिलों का दौरा कर पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सख्त निगरानी के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मामलों में वृद्धि ने अधिकारियों की निगरानी और आदेशों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि अधिनियम की धारा-14 के तहत आदेशों का पालन न करने पर पांच वर्ष तक की कैद या एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं।
ड्रोन से निगरानी और एक्शन प्लान लागू करने पर जोर
आयोग ने कहा है कि पराली जलाने की कुछ घटनाएं निर्धारित मानक प्रोटोकॉल के तहत दर्ज नहीं हो पातीं। ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए आयोग लगातार ड्रोन से निगरानी बढ़ाने, कम लागत वाले सेंसर लगाने और एक्शन प्लान को सख्ती से लागू करने पर जोर देता रहा है। आयोग की टीमें प्रदेश के हॉटस्पॉट गांवों का दौरा भी कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद पराली जलाने की घटनाएं नहीं रुक रही हैं। दोनों जिलों के हालिया दौरे के दौरान भी अधिकारियों को निगरानी सख्त करने के निर्देश दिए गए थे।