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Amritsar News: एसजीपीसी हरिके में खालड़ा की याद में बनाएगी स्मारक
Sun, 06 Sep 2026 05:58 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
Updated Sun, 06 Sep 2026 05:58 PM IST
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श्री अकाल तख्त साहिब की सरपरस्ती में एसजीपीसी ने करवाया समागम
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने रविवार को श्री दरबार साहिब परिसर में जसवंत सिंह खालड़ा की याद में एक समागम आयोजित किया। इस दौरान श्री अकाल तख्त साहिब की सरपरस्ती में हरिके में खालड़ा के नाम पर स्मारक बनाने का एलान किया गया। यह घोषणा जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने की।
गड़गज्ज ने बताया कि वर्ष 1982 से 1994 के दौरान पंजाब में हजारों सिख नौजवानों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सरकारी दमन का सामना करना पड़ा था। कई लोगों की हत्या के बाद उनके शवों को लावारिस बताकर जला दिया गया या नदियों में बहा दिया गया था। उन्होंने कहा, जसवंत सिंह खालड़ा इन लावारिस शवों के वारिस बने और दिन-रात मेहनत कर उनके विवरण जुटाए। इसी संघर्ष के दौरान उनकी अगवा कर हत्या कर दी गई थी। एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि खालड़ा ने मानवाधिकार, हक-सच और इंसाफ के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनके परिवार ने भी सरकारी दमन के बावजूद इस संघर्ष को आगे बढ़ाया। जसवंत सिंह खालड़ा ने पंजाब में सरकारी दमन के शिकार हुए हजारों लोगों के लिए आवाज उठाई। समागम में खालड़ा की बहन बलबीर कौर और कुलदीप सिंह बचड़े की पत्नी कवलजीत कौर को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। अखंड पाठ के भोग के बाद गुरबाणी कीर्तन और अरदास भी हुई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने रविवार को श्री दरबार साहिब परिसर में जसवंत सिंह खालड़ा की याद में एक समागम आयोजित किया। इस दौरान श्री अकाल तख्त साहिब की सरपरस्ती में हरिके में खालड़ा के नाम पर स्मारक बनाने का एलान किया गया। यह घोषणा जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने की।
गड़गज्ज ने बताया कि वर्ष 1982 से 1994 के दौरान पंजाब में हजारों सिख नौजवानों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सरकारी दमन का सामना करना पड़ा था। कई लोगों की हत्या के बाद उनके शवों को लावारिस बताकर जला दिया गया या नदियों में बहा दिया गया था। उन्होंने कहा, जसवंत सिंह खालड़ा इन लावारिस शवों के वारिस बने और दिन-रात मेहनत कर उनके विवरण जुटाए। इसी संघर्ष के दौरान उनकी अगवा कर हत्या कर दी गई थी। एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि खालड़ा ने मानवाधिकार, हक-सच और इंसाफ के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनके परिवार ने भी सरकारी दमन के बावजूद इस संघर्ष को आगे बढ़ाया। जसवंत सिंह खालड़ा ने पंजाब में सरकारी दमन के शिकार हुए हजारों लोगों के लिए आवाज उठाई। समागम में खालड़ा की बहन बलबीर कौर और कुलदीप सिंह बचड़े की पत्नी कवलजीत कौर को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। अखंड पाठ के भोग के बाद गुरबाणी कीर्तन और अरदास भी हुई।
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