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Amritsar News: विदेशों से लौटे युवाओं के भविष्य पर भाकियू लक्खोवाल चिंतित
Tue, 22 Sep 2026 12:31 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
Updated Tue, 22 Sep 2026 12:31 AM IST
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कहा - डिपोर्ट होकर लौटे हर युवा को दोषी मानना ठीक नहीं, सरकार दे नई शुरुआत का मौका
संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल ने विदेशों से डिपोर्ट होकर पंजाब लौट रहे युवाओं के भविष्य पर चिंता जताई है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने इसे गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि रोजगार और बेहतर भविष्य की उम्मीद में कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में गए कई युवा अब इमीग्रेशन तथा कानूनी कारणों से वापस लौट रहे हैं।
लक्खोवाल ने बताया कि पंजाब के अनेक परिवारों ने बच्चों को विदेश भेजने के लिए जमीन-जायदाद बेच दी थी। विदेश में नीतियों के बदलाव से युवाओं की वापसी परिवारों के लिए आर्थिक संकट खड़ी कर सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार से विदेशी सरकारों से बातचीत कर भारतीय युवाओं के हितों की रक्षा की मांग की। केंद्र और राज्य सरकार को लौटे युवाओं की शिक्षा, कौशल और अनुभव के आधार पर पंजाब में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विशेष योजना बनानी चाहिए। उन्होंने जिला स्तर पर युवाओं के पंजीकरण और सरकारी-निजी क्षेत्र के साथ रोजगार मेले आयोजित करने का सुझाव दिया। विदेशों में हासिल कौशल को पंजाब के कृषि, उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र से जोड़ा जा सकता है।
पुनर्वास और सहायता की मांग
लक्खोवाल ने कहा कि कारोबार शुरू करने के इच्छुक युवाओं को आसान शर्तों पर ऋण, कौशल प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ मिले। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को परामर्श और सहायता दी जानी चाहिए। लौटे युवाओं को इमीग्रेशन और कानूनी मामलों में मुफ्त या कम लागत पर कानूनी सलाह की व्यवस्था हो। उन्होंने डिपोर्ट होकर लौटने वाले हर युवा को दोषी न मानने की अपील की। युवाओं को तिरस्कार के बजाय सम्मान और रोजगार देने के लिए सरकार व समाज को मिलकर ठोस पुनर्वास नीति बनानी चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल ने विदेशों से डिपोर्ट होकर पंजाब लौट रहे युवाओं के भविष्य पर चिंता जताई है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने इसे गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि रोजगार और बेहतर भविष्य की उम्मीद में कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में गए कई युवा अब इमीग्रेशन तथा कानूनी कारणों से वापस लौट रहे हैं।
लक्खोवाल ने बताया कि पंजाब के अनेक परिवारों ने बच्चों को विदेश भेजने के लिए जमीन-जायदाद बेच दी थी। विदेश में नीतियों के बदलाव से युवाओं की वापसी परिवारों के लिए आर्थिक संकट खड़ी कर सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार से विदेशी सरकारों से बातचीत कर भारतीय युवाओं के हितों की रक्षा की मांग की। केंद्र और राज्य सरकार को लौटे युवाओं की शिक्षा, कौशल और अनुभव के आधार पर पंजाब में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विशेष योजना बनानी चाहिए। उन्होंने जिला स्तर पर युवाओं के पंजीकरण और सरकारी-निजी क्षेत्र के साथ रोजगार मेले आयोजित करने का सुझाव दिया। विदेशों में हासिल कौशल को पंजाब के कृषि, उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र से जोड़ा जा सकता है।
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पुनर्वास और सहायता की मांग
लक्खोवाल ने कहा कि कारोबार शुरू करने के इच्छुक युवाओं को आसान शर्तों पर ऋण, कौशल प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ मिले। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को परामर्श और सहायता दी जानी चाहिए। लौटे युवाओं को इमीग्रेशन और कानूनी मामलों में मुफ्त या कम लागत पर कानूनी सलाह की व्यवस्था हो। उन्होंने डिपोर्ट होकर लौटने वाले हर युवा को दोषी न मानने की अपील की। युवाओं को तिरस्कार के बजाय सम्मान और रोजगार देने के लिए सरकार व समाज को मिलकर ठोस पुनर्वास नीति बनानी चाहिए।
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