पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के साथ होता है। वर्ष 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्तूबर को मनाई जाएगी। यह तिथि उन पितरों के लिए विशेष मानी जाती है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो। इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ पितरों के निमित्त दीपदान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या की शाम पितरों के नाम से दीपक जलाकर उनका स्मरण करने से उन्हें श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषाचार्य चंद्रेश शर्मा के अनुसार, इस दिन शाम के समय दीपदान का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि दीपक की रोशनी पितरों के मार्ग को प्रकाशित करती है और उनके प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम बनती है।
सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों को दें श्रद्धापूर्वक विदाई, जानें दीपदान की सही विधि और महत्व
सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर उन्हें श्रद्धापूर्वक विदाई देने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधि-विधान से किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
किस दिशा में करें पितरों के नाम दीपदान?
धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को पितरों से संबंधित माना गया है। इसी वजह से सर्वपितृ अमावस्या की शाम पितरों के निमित्त दीपक दक्षिण दिशा की ओर रखकर जलाने की परंपरा है। दीपदान करते समय पितरों का ध्यान करें और परिवार के दिवंगत सदस्यों की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद श्रद्धा और सम्मान के साथ पितरों को विदाई देने की कामना करें।
सूर्यास्त के बाद करें दीपदान
पितरों के नाम दीपदान के लिए सूर्यास्त के बाद का समय उपयुक्त माना जाता है। शाम के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा या दीपदान के स्थान को साफ कर लें। इसके बाद पितरों का स्मरण करते हुए दीपक प्रज्वलित करें। दीपक जलाते समय मन को शांत रखें और अपने पितरों की शांति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तरह श्रद्धापूर्वक किया गया दीपदान पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
पितरों के दीपक में कौन सा तेल डालें?
पितरों के निमित्त दीपक जलाने के लिए तिल के तेल का प्रयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अलावा सरसों के तेल का दीपक भी जलाया जा सकता है। यदि संभव हो तो दीपदान के लिए मिट्टी के दीपक का इस्तेमाल करें। दीपक में पर्याप्त तेल डालें, ताकि वह कुछ समय तक लगातार जलता रहे। दीपक प्रज्वलित करने के बाद पितरों का स्मरण करें और उनकी शांति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें।
सर्वपितृ अमावस्या की पूजा के लिए जरूरी सामग्री
सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध, तर्पण और पितरों के निमित्त पूजा करने के लिए घर की परंपरा के अनुसार सामग्री जुटाई जाती है। सामान्य तौर पर इन चीजों की जरूरत पड़ सकती है:
- साफ पानी
- काले तिल
- कुश
- चावल
- आटा
- घी
- फूल
- फल
- धूप और दीपक
- सात्विक भोजन की सामग्री
- पिंड बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
- वस्त्र
- दक्षिणा