पुरुषों की सेहत की बात आते ही टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की चर्चा शुरू हो जाती है। इसे आमतौर पर मेल हार्मोन के तौर पर जाना जाता है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि टेस्टोस्टेरोन यौन शक्ति के साथ स्पर्म बनाने, मांसपेशियों- हड्डियों को मजूबत रखने और शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए जरूरी होता है। जब किसी में इसका स्तर कम हो जाता है, तो इसका शरीर के कामकाज पर सीधा असर दिखने लगता है।
पुरुषों की सेहत: टेस्टोस्टेरोन कम होने पर शरीर में क्या-क्या बदलाव आते हैं? कहीं आपमें भी तो नहीं हो गई है कमी
टेस्टोस्टेरोन मांसपेशियों, हड्डियों, ऊर्जा और स्पर्म उत्पादन से जुड़ा महत्वपूर्ण हार्मोन है। इसकी कमी के लक्षण कई दूसरी समस्याओं में भी दिख सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष न निकालें। कैसे जानें कहीं आपमें इसकी कमी तो नहीं?
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पुरुषों के लिए जरूरी हार्मोन- टेस्टोस्टेरोन
टेस्टोस्टेरोन पुरुषों का मुख्य हार्मोन है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से अंडकोष में होता है। यह पुरुषों में चेहरे और शरीर के बाल, मांसपेशियों के विकास, यौन इच्छा, स्पर्म उत्पादन और हड्डियों के स्वास्थ्य में भूमिका निभाता है।
- एंडोक्राइन सोसाइटी के विशेषज्ञों के अनुसार टेस्टोस्टेरोन का स्तर दिनभर एक जैसा नहीं रहता। आमतौर पर सुबह इसका स्तर सबसे अधिक होता है।
- जिन पुरुषों में अंडकोष की समस्या, पिट्यूटरी ग्रंथि से जुड़ी परेशानी, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, कुछ क्रॉनिक बीमारियां होती हैं, उनमें टेस्टोस्टेरोन का खतरा अधिक होता है।
- इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ भी टेस्टोस्टेरोन में धीरे-धीरे कमी आ सकती है।
टेस्टोस्टेरोन कम होने के क्या कारण हैं?
टेस्टोस्टेरोन की कमी केवल उम्र बढ़ने से नहीं होती। अंडकोष में चोट या संक्रमण, कैंसर के इलाज में रेडिएशन या कीमोथेरेपी, पिट्यूटरी ग्रंथि की बीमारी, कुछ दवाएं भी लो टेस्टोस्टेरोन का कारण हो सकती हैं।
इसके अलावा अगर आप मोटापे, टाइप-2 डायबिटीज, किडनी या लिवर की पुरानी बीमारी का शिकार हैं या फिर नींद से जुड़ी समस्याएं रहती हैं तो इसके कारण भी टेस्टोस्टेरोन की कमी हो सकती है।
कैसे पता चलेगा कि टेस्टोस्टेरोन कम तो नहीं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, थकान या यौन इच्छा में कमी को देखकर खुद से टेस्टोस्टेरोन की कमी मान लेना सही नहीं है।
- एंडोक्राइन सोसाइटी के अनुसार इसका पता लगाने के लिए लक्षणों के साथ डॉक्टर कुछ जांच की सलाह दे सकते हैं।
- आमतौर पर सुबह जब टेस्टोस्टेरोन का स्तर अपेक्षाकृत अधिक होता है तब खून की जांच की जाती है।
- जरूरत पड़ने पर डॉक्टर कुछ अन्य हार्मोन की जांच करने की भी सलाह दे सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर टेस्टोस्टेरोन की कमी का कारण मोटापा, कोई बीमारी या ऐसी स्थिति है जिसे सुधारा जा सकता है, तो इसका इलाज जरूरी है। हाइपोगोनाडिज्म में कुछ लोगों को डॉक्टर टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की सलाह दे सकते हैं।
लाइफस्टाइल और खान-पान में सुधार के साथ पौष्टिक चीजों का नियमित सेवन भी टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने वाला हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।