सर्दी-खांसी, पेट दर्द जैसी आम समस्याओं में हम सभी अक्सर खुद से ही घरेलू उपचार करना शुरू कर देते हैं। खांसी में शहद, अदरक, हल्दी या काढ़े की सलाह दी जाती है। पेट खराब हुआ तो अजवाइन और गले में दर्द हुआ तो नमक के पानी से गरारे जैसे उपाय भारतीय घरों में लंबे समय से इस्तेमाल होते रहे हैं। वैस तो कुछ समस्याओं में ये आराम देने वाले भी हो सकते हैं, लेकिन सबसे बड़ी गलती तब होती है जब घरेलू नुस्खे को हर बीमारी का इलाज समझ लिया जाता है।
सेहत की बात: हर बीमारी में घरेलू नुस्खा आजमाना सही नहीं, ऐसे लक्षणों में तुरंत जाएं डॉक्टर के पास
घरेलू नुस्खे कुछ मामूली समस्याओं में राहत दे सकते हैं, लेकिन इन्हें हर बीमारी का इलाज नहीं मानना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, गंभीर दर्द, खून आने जैसे गंभीर लक्षणों में घरेलू इलाज के बजाय डॉक्टरी सलाह जरूरी है।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायरल बुखार, हल्के पेट दर्द या गैस जैसी कभी-कभार होने वाली समस्याओं में कुछ उपाय लाभ दे सकते हैं। पर अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार-बार वही समस्या हो रही है तो इसके कारणों का पता लगाने के लिए जांच कराना और समय रहते डॉक्टर की मदद लेने जरूरी हो जाता है।
सांस लेने में परेशानी या सीने में दिक्कत
सांस लेने में अचानक या गंभीर परेशानी को केवल भाप, अदरक की चाय या काढ़े से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सांस फूलना कई अलग-अलग स्थितियों का संकेत हो सकता है और कई बार ये गंभीर समस्याओं की ओर इशारा भी हो सकता है।
- अगर सांस लेने में कठिनाई हो रही है तो इसमें आपातकालीन मदद की जरूरत होती है।
- इसी तरह सीने में तेज और असामान्य दर्द, बेहोशी या हालत तेजी से बिगड़ने में भी घरेलू इलाज की जगह विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
बेहोशी या बहुत ज्यादा कमजोरी
अगर आपके आसपास या घर में कोई अचानक बेहोश हो जाए या अत्यधिक कमजोर महसूस करे तो इसे सामान्य थकान मानकर इग्नोर करना या खुद से कोई उपाय शुरू कर देना ठीक नहीं है।
- सांस लेने में परेशानी, दौरे पड़ना या त्वचा-होंठों के रंग में बदलाव जैसे संकेत गंभीर हो सकते हैं। कई बार हार्ट अटैक या शरीर में ऑक्सीजन की कमी में भी ऐसी दिक्कतें देखी जाती हैं। इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टरी मदद की जरूरत होती है।
बहुत तेज बुखार या लगातार बिगड़ते लक्षण
हर बुखार में डॉक्टर के पास जाना जरूरी नहीं होता, लेकिन बहुत तेज बुखार, लगातार बिगड़ते लक्षण या कई दिनों तक सुधार न होने जैसी स्थिति में घरेलू उपचार करते रहना नुकसानदायक हो सकता है।
- दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों स्वाइन फ्लू का खतरा देखा जा रहा है जिसमें होने वाला बुखार भी सामान्य लग सकता है। पर इसमें समय रहते डॉक्टरी सलाह जरूरी है। घरेलू उपाय कुछ लक्षणों में अस्थायी आराम दे सकते हैं, लेकिन अगर समय के साथ हालत सुधरने के बजाय बिगड़ रही हो तो विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
खून की उल्टी या मल में खून
शरीर से किसी भी तरह की ब्लीडिंग में सिर्फ खानपान या घरेलू उपचार के भरोसे बैठे रहना ठीक नहीं है। खून वाली उल्टी और मल में खून जैसे लक्षणों में तुरंत डॉक्टर की सलाह और जांच जरूरी है।
- लिवर या फेफड़ों की गंभीर बीमारियों में उल्टी के साथ खून आने की दिक्कत देखी जाती है। इसी तरह से डेंगू के गंभीर मामले में मल से खून आ सकता है। इन बीमारियों में समय रहते डॉक्टरी मदद जरूरी है। बिना कारण समझे घरेलू उपाय करते रहना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें