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एमपी: जहरीली गैस से चार मौतें, एक-एक कर टैंक में समाते गए युवक; उज्जैन होटल हादसे ने खड़े किए सुरक्षा पर सवाल

Sun, 01 Nov 2026 05:08 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Sun, 01 Nov 2026 05:08 PM IST
सार

उज्जैन के श्री गंगा होटल में फूड वेस्ट टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी से चार युवकों की मौत हो गई। होटल प्रबंधन ने 30-30 लाख रुपये सहायता का ऐलान किया। सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल उठे।

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Tragic Road Accident in Ujjain: Fast-Moving Vehicle Causes Major Crash, Several Injured
मृतकों के फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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देवास रोड स्थित श्री गंगा होटल में शनिवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद रविवार को पूरे शहर में शोक और आक्रोश का माहौल रहा। होटल के फूड वेस्ट टैंक (चैंबर) में जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी से दम घुटने के कारण जान गंवाने वाले चारों युवकों कमलेश तंबोली (30), नितिन (22), वाहिद (35) और होटल सुपरवाइजर मनोज मीणा (25) का रविवार को पोस्टमॉर्टम कराया गया। इसके बाद गमगीन माहौल में शव परिजनों को सौंप दिए गए।

इस बीच, स्थानीय सांसद अनिल फिरोजिया ने घोषणा की कि होटल प्रबंधन की ओर से प्रत्येक मृतक के परिवार को 30-30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया था।

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एक को बचाने में एक-एक कर मौत के आगोश में समाते गए चार युवक
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, होटल के आउटलेट से निकलने वाले फूड वेस्ट को एक बड़े भूमिगत टैंक में एकत्र किया जाता है। दिवाली और वीकेंड पर ग्राहकी का दबाव बढ़ने के कारण शनिवार को आउटसोर्स पर सफाई का काम कराया जा रहा था।

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मोटर से सफाई के दौरान सबसे पहले कमलेश तंबोली का पैर फिसला और वह टैंक के अंदर जा गिरा। उसे बचाने के प्रयास में नितिन और वाहिद भी नीचे उतर गए। तीनों को गिरता देख होटल का सुपरवाइजर मनोज मीणा भी वहां पहुंचा, लेकिन फिसलन के कारण वह भी टैंक में गिर गया।


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बंद वातावरण में सड़ रहे फूड वेस्ट से बनी जहरीली गैस और ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण चारों अचेत हो गए। दम घुटने से उनकी मौत हो गई। रेस्क्यू के लिए टैंक में उतरा पांचवां कर्मचारी हेमराज भी घबराहट और बेहोशी महसूस होने के बाद किसी तरह बाहर निकल आया। बाद में रेस्क्यू में शामिल दो अन्य लोगों और एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर की भी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

असुरक्षा और मजबूरी की भेंट चढ़ गईं चार जिंदगियां
इस हादसे ने चार परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। मृतकों में कोई परिवार की आर्थिक मदद के लिए अतिरिक्त काम कर रहा था, तो कोई बच्चों की जरूरतें पूरी करने के लिए ओवरटाइम कर रहा था।

कमलेश तंबोली: मजदूरी करने वाला कमलेश दिवाली से पहले परिवार के त्योहार का खर्च निकालने के लिए अतिरिक्त काम करने आया था। वह अपने पीछे पत्नी और चार साल की मासूम बेटी को छोड़ गया है।

वाहिद खान: ग्लोबल हॉस्पिटल में सफाईकर्मी वाहिद 12 हजार रुपये की मामूली तनख्वाह में चार बच्चों का पेट नहीं पाल पा रहा था। अस्पताल की ड्यूटी के बाद वह ओवरटाइम कर रहा था, ताकि बच्चों की जरूरतें पूरी कर सके।

नितिन: नगर निगम का संविदा कर्मचारी नितिन अविवाहित था। कम वेतन के कारण परिवार की आर्थिक मदद के लिए वह निजी स्तर पर सफाई का काम भी करता था।

मनोज मीणा: राजस्थान के झालावाड़ का रहने वाला मनोज चार दिन की छुट्टी काटकर शनिवार दोपहर ही ड्यूटी पर लौटा था। उसे अंदाजा भी नहीं था कि काम पर वापसी उसकी जिंदगी का आखिरी दिन बन जाएगी।



विशेषज्ञ की राय: बायोगैस और ऑक्सीजन की कमी बनी काल
माधव साइंस कॉलेज के रसायन विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेंद्र रघुवंशी के अनुसार, बंद और वायुरहित वातावरण में फूड वेस्ट का सड़ना एनएरोबिक डायजेशन कहलाता है। इस प्रक्रिया में 90 से 95 प्रतिशत तक मीथेन गैस बनती है। बिना ऑक्सीजन सिलेंडर, सेफ्टी बेल्ट और मास्क के ऐसे टैंक में उतरना सीधे तौर पर जान जोखिम में डालना है।

प्रशासन का रुख: होटल प्रबंधन पर दर्ज होगा लापरवाही का केस
मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए एसपी प्रदीप शर्मा ने स्पष्ट किया कि हादसे में सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन हुआ है। संबंधित पक्षों पर लापरवाही से मौत के मामले में धारा 106 बीएनएस / 304ए आईपीसी के तहत केस दर्ज किया जा रहा है। दूसरी ओर, वाल्मीकि सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश कोड़े ने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा और स्थायी सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

होटल संचालक की ओर से 30-30 लाख रुपये की सहायता का आश्वासन दिया गया है, लेकिन हादसे ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी और नगर निगम प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर बिना जरूरी सुरक्षा उपकरणों के कर्मचारियों को जहरीली गैस से भरे टैंक में उतरने की अनुमति कैसे दी गई? क्या सफाई कार्य के दौरान सुरक्षा इंतजामों की जांच की गई थी? हादसे के बाद इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।

 

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