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शिवपुरी में बारिश के बीच अंतिम संस्कार: कहीं गीली लकड़ियों में डीजल डालकर चिता जलाई, कहीं टेंट-तिरपाल का सहारा

Wed, 26 Aug 2026 03:18 PM IST
शिवपुरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी Published by: शिवपुरी ब्यूरो Updated Wed, 26 Aug 2026 03:18 PM IST
सार

शिवपुरी के कई गांवों में मुक्तिधाम और शेड की सुविधा नहीं होने से बारिश में अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो रहा है। श्यामपुरा में गीली लकड़ियों पर डीजल डालकर चिता जलाई गई, जबकि हाथरस में टेंट-तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार हुआ।

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The lack of a crematorium in Shivpuri has become a curse; even cremating loved ones in the rain is a struggle
तिरपाल पकड़े ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कहते हैं कि अंतिम विदाई सम्मान के साथ होनी चाहिए, लेकिन शिवपुरी जिले के ग्रामीण अंचलों में यह सम्मान भी बारिश के पानी में बहता नजर आ रहा है। जिले के कई गांवों में आजादी के इतने साल बाद भी मुक्तिधाम और टिन शेड जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। इसका खामियाजा उन परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जिनके अपने बरसात के मौसम में दुनिया को अलविदा कह रहे हैं। परिजनों को घुटने तक कीचड़ और मूसलाधार बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिले के दो गांवों से सामने आए वीडियो ने व्यवस्थाओं की हकीकत सामने ला दी है।

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पहला मामला पोहरी जनपद की ग्राम पंचायत डिगडोली के मजरा गांव श्यामपुरा का है। यहां बुधवार सुबह 62 वर्षीय गणेशा कुशवाह का निधन हो गया। परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की तो सबसे बड़ी समस्या जगह की सामने आई। गांव में न तो पक्का मुक्तिधाम है और न ही बारिश से बचने के लिए कोई शेड।

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इसके बाद परिजन शव को गांव के बाहर नदी किनारे ले गए। इस दौरान तेज बारिश हो रही थी। चिता के लिए जुटाई गई लकड़ियां बारिश में पूरी तरह भीग चुकी थीं। काफी कोशिश के बाद भी लकड़ियों में आग नहीं लगी। आखिरकार ग्रामीण बाजार से डीजल लेकर आए और गीली लकड़ियों पर डालकर किसी तरह चिता को आग दी। इस दौरान परिजन बारिश में भीगते हुए खड़े रहे। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में ऐसी ही स्थिति बनती है। मुक्तिधाम के निर्माण के लिए कई बार आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।

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दूसरा मामला कहां से सामने आया?
दूसरा मामला करैरा जनपद की ग्राम पंचायत जुझाई के हाथरस गांव का है। यहां 90 वर्षीय रजिया लोधी पत्नी सुन्ना लोधी का निधन हो गया। परिवार के सामने भी बारिश के बीच अंतिम संस्कार करने की चुनौती थी, क्योंकि गांव में मुक्तिधाम नहीं है।


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परिजनों ने आपस में पैसे जुटाए और गांव में किराये पर मिलने वाला टेंट मंगवाया। श्मशान घाट पर टेंट लगाकर उसके ऊपर वाटरप्रूफ तिरपाल डाला गया, ताकि बारिश का पानी चिता तक न पहुंचे। इसी तिरपाल के नीचे किसी तरह अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की गई। ग्रामीणों ने बताया कि यह बड़ी विडंबना है कि पंचायत मुख्यालय जुझाई में दो-दो मुक्तिधाम बने हुए हैं, लेकिन हाथरस गांव आज भी इस सुविधा से वंचित है। यहां हर मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए टेंट और तिरपाल का खर्च ग्रामीणों को ही उठाना पड़ता है।

इस मामले में ग्राम पंचायत जुझाई की सरपंच अंगूरी जगदीश कोली ने अपनी मजबूरी बताई। उन्होंने कहा कि हाथरस गांव में मुक्तिधाम के लिए शासकीय जमीन आवंटित है, लेकिन गांव के ही कुछ लोगों ने उस पर अवैध कब्जा कर रखा है। कब्जे के कारण मुक्तिधाम का निर्माण अटका हुआ है। सरपंच ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही राजस्व विभाग की मदद से जमीन को कब्जामुक्त कराया जाएगा और वहां शेड सहित सर्वसुविधायुक्त मुक्तिधाम बनाया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों का सवाल यही है कि आखिर कब तक उन्हें अपनों को अंतिम विदाई देने के लिए बारिश रुकने का इंतजार करना पड़ेगा और खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ेगा।

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