एमपी: बुंदेलखंड में गंभीर बीमारियों के कारणों की होगी पड़ताल, सागर विश्वविद्यालय-मेडिकल कॉलेज मिलकर करेंगे शोध
सागर विश्वविद्यालय और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ने गंभीर बीमारियों के अनुसंधान के लिए समझौता किया है। दोनों संस्थान कैंसर, गुर्दे के रोग, तपेदिक और थैलेसीमिया के कारणों, निदान तथा उपचार के नए विकल्पों पर संयुक्त शोध करेंगे।
विस्तार
बुंदेलखंड अंचल में लगातार पैर पसार रहीं कैंसर, गुर्दे के रोग, तपेदिक और थैलेसीमिया जैसी गंभीर तथा आनुवंशिक बीमारियों पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ने आपस में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत दोनों प्रतिष्ठित संस्थान चिकित्सा अनुसंधान, उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक सहयोग को नई दिशा प्रदान करेंगे। इस करार का मुख्य ध्येय दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता, आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं और संसाधनों का संयुक्त उपयोग कर क्षेत्र में फैली गंभीर बीमारियों के सटीक निदान, कारण तथा उपचार के नवीन विकल्पों की खोज करना है।
गंभीर बीमारियों के कारणों पर अध्ययन
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर के अनुसार अंचल में कैंसर और गुर्दे की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। दोनों संस्थान मिलकर इस बात की गहन पड़ताल करेंगे कि इन रोगों के पीछे मुख्य वजह लोगों का खान-पान है अथवा आनुवंशिक कारण। यह अनुसंधान केवल नए वैज्ञानिक सिद्धांत तक सीमित न रहकर बुंदेलखंड की स्थानीय बीमारियों के लिए नई औषधियों और उन्नत चिकित्सा प्रणालियों को विकसित करने में भी मदद करेगा।
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आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञों का सहयोग
सागर विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सी. पी. उपाध्याय ने बताया कि क्षेत्र में तपेदिक, विषाणु और जीवाणु जनित संक्रमणों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अंचल में कुछ विशेष बीमारियां और थैलेसीमिया के लक्षण भी सामने आए हैं। विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में उपलब्ध एकीकृत जीनोमिक्स सुविधा आनुवंशिक अध्ययन में अत्यंत प्रभावकारी साबित होगी। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज की एमडीआरयू सुविधा शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्राध्यापकों के अनुसंधान कार्य को गति प्रदान करेगी।
चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में नया अध्याय
समझौता ज्ञापन के समन्वयक प्रो. यू. के. पाटिल ने बताया कि इस संयुक्त पहल के माध्यम से साझा शोध परियोजनाओं, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और संगोष्ठियों का आयोजन होगा। इसके अलावा दोनों संस्थानों के बीच प्राध्यापकों तथा विद्यार्थियों के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहन मिलेगा। सागर विश्वविद्यालय के पास आधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाएं, उन्नत उपकरण तथा जीनोमिक्स, भेषज विज्ञान एवं आणविक जीव विज्ञान के विशेषज्ञ मौजूद हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज के पास अनुभवी चिकित्सक तथा रोगियों के नमूने एवं आंकड़े उपलब्ध हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नागेश दुबे ने इस समझौते को बुंदेलखंड में स्वास्थ्य अनुसंधान का एक नया मील का पत्थर करार दिया है।
