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Lucknow News: सुविधाओं के अभाव में डूब रही यूपी की तैराकी

Tue, 07 Jul 2026 03:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 03:00 AM IST
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UP's swimming scene sinking due to lack of facilities
केडी सिंह बाबू स्टे​डियम में खराब पड़ा स्वीमिंग पूल का डाइविंग बोर्ड।
अनुराग बाजपेईलखनऊ। तैराकी प्रदेश के उन चंद खेलों में शुमार है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना हमेशा ही बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में यहां के खिलाड़ियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की बात तो बेमानी होगी। इसमें यूपी स्वीमिंग एसोसिएशन की नाकामयाबी के साथ प्रदेश में तैराकी में सुविधाएं न मिलना बड़ा कारण रहा। आलम यह है कि गत वर्ष उत्तराखंड राष्ट्रीय खेलों में यूपी को स्वीमिंग एक भी पदक नहीं मिला।
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प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की बात की जाए तो अनुराग आर सिंह (वाराणसी), जिया यादव (झांसी), वेदांत चंद्रा (गौतमबुद्धनगर), शैला भाटी (गौतमबुद्धनगर), कृष्णा यादव (अयोध्या) राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर पहचान तो बनाई, लेकिन इसमें अधिकतर खिलाड़ी या तो प्रदेश के बाहर ट्रेनिंग ले रहे हैं या फिर निजी स्वीमिंग पूल में अभ्यास करके अपना कॅरिअर संवार रहे हैं।
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आज तैराकी तमाम खेलों का अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों के लिए महज फिटनेस और रिकवरी का माध्यम बनकर रह गई है। प्रदेश भर में सैकड़ों की संख्या में नए स्वीमिंग पूल खुल रहे हैं, लेकिन उनका उपयोग खिलाड़ियों को तैयार करने में नहीं बल्कि शौकिया लोगों को लुभाकर कमाई करना बन गया है।
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गोताखोरी में अर्श से फर्श पर पहुंचा यूपी
एक समय वह भी था, जब गोताखोरी में यूपी का दबदबा हुआ करता था। कीर्ति मिश्रा, आरएन सिंह, उमेश प्रसाद, संदीप मिश्रा, सचिन त्रिपाठी, पुष्पा मिश्रा, विनोद यादव समेत तमाम खिलाड़ियों ने प्रदेश का परचम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहराया। लखनऊ के हिमांशु तिवारी आखिरी गोताखोर थे, जिन्होंने भारत के लिए दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल (वर्ष 2010) में भाग लिया। इनमें से अधिकतर खिलाड़ियों ने लखनऊ में केडी सिंह स्टेडियम के ओलंपिक साइज स्वीमिंग पूल में अभ्यास करके भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाग लिया। एक साल पहले पूल में 19 करोड़ रुपये लगाकर इसका जीर्णोद्धार कराया गया, लेकिन डाइविंग बोर्ड मानकों के अनुरूप नहीं तैयार हुआ। ऐसे में यहां गोताखोरी की ट्रेनिंग बंद हो गई। पूल में तैराकी की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता तो आयोजित कर ली जाती है, लेकिन जब बात गोताखोरी आती है तो उनके लिए 35वीं वाहिनी पीएसी में बने डाइविंग बोर्ड का प्रयोग किया जाता है। आज प्रदेश में एक भी सरकारी स्वीमिंग पूल नहीं है, जहां एक मीटर और तीन मीटर स्प्रिंग डाइविंग बोर्ड के अलावा हाईबोर्ड डाइविंग होती है।

Iराष्ट्रीय स्तर पर यूपी की तैराकी बेहतर है, लेकिन प्रदर्शन के मामले में हमारे खिलाड़ी तैराकी के सुपर पावर कर्नाटक के अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु से पिछड़ जाते हैं। इसका प्रमुख कारण स्वीमिंग के लिए सुविधाओं का न मिलना है। अगर यूपी में तैराकी का एक ऐसा सरकारी सेंटर बना दिया जाए, जहां तैराकी के अलावा गोताखोरी की सभी सुविधाएं मुहैया हो तो यूपी में भी पुराने दिन वापस लौट सकते हैं। - रवीन कपूर (यूपी स्वीमिंग एसोसिएशन के डायरेक्टर)I

केडी सिंह बाबू स्टेडियम में खराब पड़ा स्वीमिंग पूल का डाइविंग बोर्ड।

केडी सिंह बाबू स्टेडियम में खराब पड़ा स्वीमिंग पूल का डाइविंग बोर्ड।

केडी सिंह बाबू स्टेडियम में खराब पड़ा स्वीमिंग पूल का डाइविंग बोर्ड।

केडी सिंह बाबू स्टेडियम में खराब पड़ा स्वीमिंग पूल का डाइविंग बोर्ड।

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